ओहायो स्टेट यूनिवर्सिटी में मनोविज्ञान के प्रोफेसर केंटारो फुजिता कहते हैं कि इच्छाशक्ति को बेहतर बनाने के लिए, बस ‘और ज्यादा कोशिश’ करना जरूरी है। जबकि आत्म-नियंत्रण में कुछ कौशल शामिल होते हैं, जिन्हें सीखा जा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब आत्म-नियंत्रण होता है, तो हम अस्वस्थ आवेगों का विरोध कर सकते हैं और जब हमें कुछ छोड़ने का मन हो, तब भी डटे रह सकते हैं। कुछ मनोवैज्ञानिकों ने इसे ‘सबसे बड़ी मानवीय शक्ति’ कहा है। जिन लोगों में आत्म-नियंत्रण अधिक होता है, वे दूसरों की तुलना में ज्यादा सफल होते हैं।
मिशिगन विश्वविद्यालय में इमोशन और सेल्फ-कंट्रोल लैब के निदेशक एथन क्रॉस ने कहा कि आत्म-नियंत्रण विकसित करना आत्म-सशक्तीकरण से शुरू होता है। उन्होंने सुझाव दिया कि उन पलों पर ध्यान केंद्रित करें, जब आप किसी लक्ष्य को पूरा करने में सफल रहे हों। आप उन पलों के बारे में भी सोच सकते हैं, जब आपके परिवार का कोई सदस्य या मित्र सफल रहा हो, यानी यदि वे ऐसा कर सकते हैं, तो आप भी कर सकते हैं। आत्म-नियंत्रण में सुधार की कई रणनीतियां हैं, और शोध बताते हैं कि सिर्फ एक को चुनने की तुलना में कई रणनीतियां आजमाना बेहतर है। यहां कुछ विकल्प दिए गए हैं, जैसे दिनचर्या बनाना, अपनी प्रगति पर नजर रखना, अपने आसपास सकारात्मक लोगों को रखना और खुद के बजाय समूह की भलाई पर ध्यान देना। आत्म-नियंत्रण तब आसान होता है, जब आप भावनाओं और प्रलोभनों को कम करने या किसी विशिष्ट लक्ष्य को निर्धारित करने के लिए अपने विचारों को पुनः ढालते हैं। जब लोगों को अपनी भावनाओं पर काबू पाने में दिक्कत होती है, तो उनका मूड अक्सर नकारात्मक विचारों से बिगड़ जाता है। संतुलन पाने के लिए उस विचार को ज्यादा तटस्थ तरीके से ढालने की कोशिश करें।
मन में स्पष्ट लक्ष्य रखने से आपको आत्म-नियंत्रण के लिए एक ढांचा बनाने में मदद मिल सकती है। याद रखें, बेहतर आत्म-नियंत्रण हासिल करने के प्रयास में यदि आप समय-समय पर चूक जाते हैं, तब भी आप अपने लक्ष्य की ओर प्रगति कर सकते हैं। मुख्य बात है आगे बढ़ते रहना।