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बुढ़ापे में मकान बनाने का आनंद

Thu, 29 Jan 2015 11:08 PM IST
ओमप्रकाश मंजुल
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यों तो मकान मालिक बनने का हर आयु में आनंद है, पर यदि मकान बुढ़ापे में बनाया जाए, तो क्या कहने! पहले जब मैं सुनता था कि अमुक आदमी सेवानिवृत्त होकर मकान बनवाने में व्यस्त है, तो आश्चर्य होता था कि आदमी आखिर रिटायर हो जाने के बाद ही इस काम में क्यों लगता है। सेवावधि में मकान बनवाना प्रतिबंधित है क्या? हालांकि आजकल मोटी आमदनी वाले युवा नौकरी के पहले-दूसरे साल ही फ्लैट मालिक हो जाते हैं, पर मकान बनाने के आनंद से वे ताउम्र वंचित रहते हैं।
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बुढ़ापे में मकान का नवनिर्माण न भी कराएं, तो जीर्णोद्धार करने में ही इतना मजा आ जाएगा कि जीर्ण-शीर्ण देह का उद्धार हो जाएगा। इस काम में कभी आपको ठेकेदार को बुलाने जाना होगा, कभी मजदूरों को ईंट-गारा ढोने में मदद करनी होगी, कभी उन्हें चाय की सर्विस देनी होगी। जाहिर है, मकान बनकर तैयार होते-होते आप की उम्र कुछ साल घट जाएगी।

जब मैं स्वयं सेवानिवृत्त हुआ, तो मुझे एहसास हुआ कि इस आयु में मकान बनवाना बुढ़ापे का सबसे बड़ा सुख है। जिंदगी भर की कमाई का बड़ा हिस्सा इसी में लगा देना बुद्धिमानी है। नहीं तो औलादें अगर 'अच्छी' निकल गईं, जैसी कि आजकल अक्सर निकल ही जाती हैं, तो वे कम समय में ही पिता के जीवन भर की कमाई ठिकाने लगा देंगी। ऐसे में ईंट-गारा जोड़कर मकान बनवा लेना सबसे सुरक्षित निवेश है। बुढ़ापे में समय काटना एक बड़ी समस्या है। मकान बनाते हुए, ठेकेदार और मजदूरों से बात करते हुए यह समय आराम से कट जाता है।
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मकान बनाते हुए रिटायर बूढ़े अपनी पत्नियों द्वारा मचाए जाने वाले घमासान से भी बच जाते हैं। पति के सेवानिवृत्त होने पर पत्नियां घर में घमासान मचाने के लिए बेचैन रहती हैं। लेकिन भवन निर्माण के समय मिस्री-मजदूरों का लिहाज करने के कारण यह महाभारत मजबूरन कुछ महीने तक टालना पड़ता है। अतः जो रिटायर लोग अपना समय काटने के लिए बेचैन हैं, उन्हें मेरा सुझाव है कि वे जल्दी ही मकान बनाने के प्रस्ताव पर काम शुरू कर दें।
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