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संतों को चमत्कार से बचना चाहिए

Tue, 08 Jan 2013 12:23 AM IST
शिवकुमार गोयल
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भगवान बुद्ध के समय की बात है। एक व्यक्ति ने ऊंचे खंभे पर मद्य से भरी एक रत्नजड़ित सुंदर सुराही टांग दी। उसने घोषणा कर दी कि यदि कोई साधक, सिद्ध या योगी इस सुराही को बिना किसी सीढ़ी का सहारा लिए मंत्र या यौगिक शक्ति से उतार देगा, मैं उसे असीमित धन देकर पुरस्कृत करूंगा।
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कश्यप नामक बौद्ध भिक्षु ने जब यह घोषणा सुनी, तो वह भी वहां पहुंचे। उन्होंने ऊंचे खंभे से उस सुराही को हाथ बढ़ाकर ही उतार लिया। भिक्षु के इस चमत्कार को देखकर सभी दंग रह गए। पुरस्कारस्वरूप मिले उस रत्नजड़ित पात्र को लेकर वह भिक्षु भगवान बुद्ध के पास पहुंचा।

भगवान बुद्ध से किसी ने कहा, भंते, आपका शिष्य कश्यप तो बहुत चमत्कारी है। उसने आज ऊंचे खंभे पर टंगे मद्य से भरे बहुमूल्य पात्र को बिना सीढ़ी की सहायता लिए यों ही हाथ ऊपर कर उतार लिया। उसके इस चमत्कार की चारों ओर चर्चा है।
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बुद्ध यह सुनते ही कश्यप के पास पहुंचे। उन्होंने उस पात्र को उठाकर जमीन पर पटक कर तोड़ डाला और बोले, मैं अपनी ऊर्जा को इन चमत्कारों में न लगाने का सदैव उपदेश देता हूं। मोह, वशीकरण, चमत्कार आदि के चक्कर में पड़ने वाला धर्म का नहीं, अधर्म का आचरण करता है। भिक्षुओं को चमत्कार का नहीं, सदाचार का आचरण करना चाहिए।
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