आइए विराजिए टाइम मशीन में। हम पीछे चलते हैं, जहां पुतिन की जिद की जड़ है। हम अजोव सागर के तट पर तागानरोग शहर की तरफ बढ़ रहे हैं। हमारे वहां पहुंचने तक 1698 शुरू हो गया होगा। टाइम मशीन तागानरोग की धूल भरी हवा में उतर रही है। आज से करीब दो सौ साल बाद 19वीं सदी में यह शहर एक अनोखे कहानीकार के नाम से जाना जाएगा, जिसका नाम होगा अंतोन चेखव। बहरहाल इस वक्त अजोव तट पर लकड़ी की खटखट और मजदूरों की आवाजों के बीच वह जो लंबा जोशीला सेनानायक दिख रहा है-वह पीटर द ग्रेट है। वह अपने पहले नौसैनिक अड्डे का जायजा ले रहे हैं और जहाज निर्माताओं से कह रहे हैं कि ये जहाज रूस को अमर बनाएंगे! दो साल पहले ही उन्होंने ओटोमन से अजोव को जीता है। इस छोटी-सी जीत से पीटर द ग्रेट को ब्लैक सी तक पहुंचने का रास्ता मिला है। उन्होंने तागानरोग में रूस का पहला नौसैनिक अड्डा बनाया है। वह बुदबुदा रहे हैं-ब्लैक सी के बिना रूस अधूरा है। उन्हें पता है कि अगर नौसेना नहीं, तो कुछ नहीं। अलबत्ता ब्लैक सी पर काबिज ताकतवर ओटोमन को चुनौती देना अभी कठिन है। उनकी निगाहें अब बाल्टिक की तरफ मुड़ गई हैं। उधर भी तो नौसेना चाहिए!
टाइम मशीन पीटर के पीछे-पीछे बाल्टिक तट पर आ गई है। यह 18वीं सदी का शुरुआती दशक है। वह सामने फिनलैंड की खाड़ी है, जिसके तट पर चमक रहा है भव्य और दर्दनाक शहर सेंट पीटर्सबर्ग। करीब एक लाख गुलामों की कुर्बानी के बाद रूस का यह शानदार शहर उत्तर का पेरिस कहा जाएगा। पीटर को यहीं से बाल्टिक सागर में आगे बढ़ने और अपने सबसे बड़े शत्रु स्वीडन के किंग चार्ल्स 12वें को चुनौती देने का मौका मिलेगा। टाइम मशीन की अगली मंजिल है क्रीमिया। वर्ष 1783। हम जब तक बाल्टिक में हैं, तब तक तातार और तुर्की कबीलों की जकड़ से छूटने के बाद ब्लैक सी के मार्गों और तटों पर ओटोमन साम्राज्य की तूती बोल रही है। पीटर द ग्रेट बाल्टिक में व्यस्त थे, इधर ब्लैक सी को टर्किश सी कहा जाने लगा है। यह 18वीं सदी का आखिरी दशक है।
पीटर द ग्रेट दुनिया से गुजर चुके हैं। रूस की रानी कैथरीन द ग्रेट की सेनाएं क्रीमिया में मोर्चा बांधे हैं और स्कॉटिश-अमेरिकी कमांडर जॉन पॉल के साथ ओटोमन सैनिकों को खदेड़ रही हैं। अब क्रीमिया रूस का हिस्सा बन रहा है। यह पीटर के सपने के बड़ी जीत है। सेवास्तोपोल में ब्लैक सी फ्लीट का गठन हो रहा है। रूसी जहाज तट पर लंगर डाले हैं। कैथरीन ने ब्लैक सी को रूस के कब्जे वाली झील बनाने की बुनियाद रख दी है। यह लीजिए, हम नवारिनो की जंग (1827) के बीचोंबीच आ गए हैं। नीचे समुद्र में आग लगी है। रूसी, ब्रिटिश, और फ्रांसीसी जहाजों ने ओटोमन बेड़े को घेर लिया है। इस जीत ने रूस को यूरोप में समुद्री ताकत का दर्जा दिया, लेकिन यह गठबंधन जल्द टूट जाएगा।
टाइम मशील का अगला पड़ाव 1853 है। हम क्रीमिया के युद्ध क्षेत्र में जा रहे हैं। सेवास्तोपोल की सड़कों पर धुआं और मलबा पसरा है। ब्रिटेन, फ्रांस, और ओटोमनों ने शहर को ग्यारह महीने से बंधक बनाया हुआ है। रूसी नाविक आखिरी गोला-बारूद के साथ तोपें दाग रहे हैं। रूस हार गया है। उसे सेवास्तोपोल छोड़ना पड़ा। पेरिस की संधि के साथ अब ब्लैक सी फिर रूस के हाथ से निकल गया। यहां एक युवा सैनिक है, जिसका नाम है लियो टॉल्स्टॉय, जो अपनी डायरी में इस घेराबंदी के संस्मरण लिखकर इस लड़ाई को अमर कर देगा। आने वाली दुनिया इन्हें सेवास्तोपोल स्केचेज के नाम से पढ़ेगी। टाइम मशीन की अगली मंजिल है क्रीमिया, 2014। 19वीं से 21वीं सदी तक सफर जरा लंबा है। पहले विश्वयुद्ध में रूस ने सिर्फ इसलिए दखल दिया था कि उसे ब्लैक सी को भूमध्य सागर को जोड़ने वाले बास्फोरस स्ट्रेट पर कब्जा मिल सके, जो तुर्किये के पास से गुजरती है। ओटोमन और जर्मन शासकों ने स्ट्रेट बंद कर दिया और रूसी अर्थव्यवस्था हांफने लगी। शीतयुद्ध की शुरुआत के साथ अमेरिका ने ट्रूमन डॉक्ट्रिन पर अमल शुरू किया। 1952 में तुर्किये व ग्रीस नाटो के सदस्य हो गए। इसके साथ ब्लैक सी और आसपास के इलाके में अमेरिकी दबदबा बढ़ गया।
अब हम वापस क्रीमिया यानी सेवास्तोपोल आ गए हैं। पुतिन की सेनाओं ने क्रीमिया पर कब्जा कर लिया है। रूसी कह रहे हैं कि यह इतिहास का न्याय है। क्रीमियन चीख रहे हैं कि यह साम्राज्यवाद है! सेवास्तोपोल फिर रूसी नौसैनिक का गढ़ बन गया है। ब्लैक सी के तट पर जहाज गर्व से खड़े हैं, मगर यूक्रेन कुछ बड़ी तैयारी कर रहा है। टाइम मशीन तेजी से 2022 के ओशिकोव की तरफ बढ़ रही है। रूस और यूक्रेन के बीच जंग शुरू हो चुकी है। यूक्रेन ने ओशिकोव पर हमला कर दिया। यह रूस की नौसेना का अड्डा है, जो ब्लैक सी की निगरानी करता है। वह देखिए, रूस के ब्लैक सी फ्लीट का गौरव, विमान वाहक जहाज मॉस्क्वा, यूक्रेनी नेप्च्यून मिसाइलों से जल रहा है।
पुतिन का मकसद था-नाटो को ब्लैक सी से दूर रखना। लेकिन यूक्रेन ने ब्लैक सी के सपने पर कालिख पोत दी है। क्रीमिया पर कब्जे का जवाब है यह! अब हम अलास्का आ गए हैं। पुतिन और ट्रंप के विमान अभी-अभी यहां से उड़े हैं। पुतिन की योजना सरगोशियों में है, इस सफर से आपको भी समझ में आ गया होगा कि रूस क्रीमिया और ओशकिव क्यों नहीं छोड़ना चाहता, पुतिन नाटो की ब्लैक सी में मौजूदगी से क्यों सशंकित हैं। तो अब आप भी इस बहस में अपनी गिरह लगाइए। टाइम मशीन का सफर यहीं तक। इतिहास बता रहा है कि पीटर से पुतिन तक, 325 साल की हर जंग, हर संधि, हर दांव से एक ही सवाल निकला है कि ब्लैक सी किसका? नाटो के लिए क्रीमिया पर रूस के कब्जे का मतलब है साम्राज्यवाद, जबकि रूस के लिए क्रीमिया खोना यानी ब्लैक सी का सपना खत्म। यह जंग इतनी जल्दी नहीं रुकेगी शायद! फिर मिलते हैं अगले सफर पर...