इतिहास में इसके महत्व का एहसास तब हुआ, जब महात्मा गांधी ने ब्रिटिश मिल में बने कपड़े का विरोध करने के लिए इसका इस्तेमाल किया। एक कपड़ा, जिसने आजादी की लड़ाई में अहम भूमिका निभाई और 17वीं-18वीं शताब्दी के दौरान यूरोप के लिए एक प्रमुख व्यापारिक वस्तु थी, सस्ते पावरलूम कपड़ों के आगमन के कारण लुप्त होने के कगार पर था।
मगर हाल के वर्षों में सरकार सक्रिय रूप से खादी उद्योग को पुनर्जीवित करने के प्रयास कर रही है और लोगों को खादी के उत्पाद खरीदने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। खादी के बारे में हाल के आंकड़े बताते हैं, '2013-14 में खादी की कुल बिक्री 1,081.04 करोड़ रुपये से करीब 450 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 2022-23 में 5,942.93 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।' यह लोगों पर सकारात्मक प्रभाव का संकेत देता है और खादी निर्माताओं और प्रमोटरों के लिए आशा की एक किरण है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खादी कारीगरों और खादी कार्यकर्ताओं को बढ़ावा देने पर ध्यान दे रहे हैं। उन्होंने ग्रामीण भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में खादी की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया है और इसके बारे में ‘मन की बात’ के विभिन्न एपिसोड सहित कई प्लेटफार्मों पर बात की है।
हालांकि, यह अब भी कई लोगों के वार्डरोब में अपनी जगह नहीं बना पाई है। लगता है कि लोगों के मन से मोटे खुरदरे कुर्ते की पारंपरिक छवि अभी तक गई नहीं है। अच्छी खबर यह है कि खादी, अब एक खुरदरा वस्त्र नहीं, बल्कि रेशम की तरह मुलायम और मलमल की तरह आरामदायक हो गई है। गर्मी के मौसम में खुद को ठंडा और सर्दी में गर्म रखने की खादी की अद्भुत क्षमता को महसूस करते हुए सक्रिय डिजाइनरों और अन्य कपड़ा ब्रांडों द्वारा इसे फिर से परिभाषित किया जा रहा है। आज, खादी न केवल कपास से बनाई जाती है, बल्कि ऊन, रेशम और कई अन्य मिश्रणों में भी आती है। खादी डेनिम जींस से लेकर खादी लहंगे तक विविध उत्पादों के आकार और रूपों को खादी खूबसूरती से अपनाती है। पारंपरिक पहनावे से लेकर पाश्चात्य लिबास तक इसे उपयुक्त फैशन विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। आज जब दुनिया जलवायु परिवर्तन से लड़ रही है और सतत विकास लक्ष्यों के बारे में बात कर रही है, खादी का महत्व इसके न्यूनतम कार्बन फुटप्रिंट के कारण कई गुना बढ़ गया है।
केंद्रीय स्तर पर, खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) खादी के विकास के कार्यक्रमों की योजना, प्रचार, संगठन और कार्यान्वयन में सक्रिय रूप से शामिल है। केवीआईसी ने अपनी खादी विकास योजना के तहत राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान (निफ्ट) के सहयोग से 'खादी के लिए उत्कृष्टता केंद्र' स्थापित करने का निर्णय लिया है। निफ्ट डिजाइन शिक्षा में अग्रणी संस्थान है और खादी डिजाइन को पुनर्जीवित करने में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। इसका उद्देश्य उन्नत घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए नए खादी उत्पादों को विकसित करना और खादी ब्रांड को मजबूत करना है। उपभोक्ताओं का खादी फैशन के प्रति एक सकारात्मक दृष्टिकोण खादी उद्योग के विकास को गति देने में योगदान दे सकता है, ताकि इसे उचित मान्यता मिल सके।
-राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान, कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश से संबद्ध।