सूखा प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली (डीईडब्ल्यूएस) के अनुसार भारत का करीब 42 फीसदी हिस्सा (लगभग आधा देश) असामान्य रूप से सूखे की चपेट में है, जो कि पिछले वर्ष से करीब छह फीसदी ज्यादा है। लेकिन हैरानी की बात है कि मानव अस्तित्व और अच्छे स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी पानी हाल ही में संपन्न हुए लोकसभा चुनाव में प्रमुख मुद्दा नहीं बन सका था, जिसमें नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री के रूप में दोबारा वापसी की है।
अब भारत का एक राज्य-मध्य प्रदेश यह सुनिश्चित करने के लिए पानी के अधिकार संबंधी कानून पर विचार कर रहा है, कि सभी निवासियों को पर्याप्त पानी की आपूर्ति हो सके। पिछले हफ्ते मध्य प्रदेश सरकार ने पुष्टि की कि वह अपने नागरिकों को स्वास्थ्य देखभाल के साथ पर्याप्त पानी की विधायी गारंटी पर विचार कर रही है। अगर ऐसा हो जाता है, तो मध्य भारत का यह राज्य, जहां फिलहाल विपक्षी कांग्रेस पार्टी की सरकार है, जल सुरक्षा पर इस तरह का सक्रिय कदम उठाने वाला देश का पहला राज्य बन जाएगा।