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माताओं के प्रति सम्मान बना रहे

Sun, 29 Sep 2013 05:19 PM IST
शिवकुमार गोयल
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अपनी पत्नी जांबवती के पुत्रवती होने की अभिलाषा पूरी करने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने एक बार हिमालय क्षेत्र के एक आश्रम में भगवान शिव की आराधना की। वह प्रतिदिन विधि-विधान से पूजा और तप करने लगे। लंबे समय तक उपासना करने से भगवान शिव ने प्रकट होकर श्रीकृष्ण को दर्शन दिए। भगवान शिव के अनूठे तेज से श्रीकृष्ण की आंखें बंद हो गईं। वह हाथ जोड़कर खड़े।
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भगवान शिव ने कहा, हे श्रीकृष्ण, आपने असंख्य बार मेरी आराधना की है। मैं स्वयं आपके बालरूप के दर्शन के लिए ब्रज गया था। मैं आपसे बहुत प्रसन्न हूं। श्रीकृष्ण ने आदर सहित भगवान महादेव की स्तुति की।

महादेव ने कहा, मैं आपकी भक्ति से परम संतुष्ट हूं। मैं चाहता हूं कि आप मुझसे कोई वर मांगें।

श्रीकृष्ण ने नतमस्तक होकर कहा, मैं आपके दर्शन से ही कृतकृत्य हो गया। आपकी आज्ञा का पालन करने के लिए मैं प्रार्थना करता हूं कि मुझे वरदान दें कि मेरी धर्म में दृढ़ बुद्धि बनी रहे। अपयश का कोई कार्य मुझसे न होने पाए। योग-साधना की ओर प्रवृत्ति बनी रहे। समय-समय पर आपका सान्निध्य प्राप्त होता रहे। जांबवती को पुत्र प्राप्ति हो।
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महादेव ने तमाम इच्छाओं की पूर्ति का वर दे दिया। पार्वती जी ने कहा, कृष्ण मुझसे भी तो कुछ मांगिए। श्रीकृष्ण ने हाथ जोड़कर कहा, हृदय में शांति रहे और सब माताओं के प्रति मेरा समान स्नेह रहे-ऐसा वर दीजिए।
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