फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स

जानना जरूरी है: भारतीय सभ्यता में गहरी हैं गणतंत्र की जड़ें, वैदिक काल में भी ऐसे शासन के प्रमाण

डॉ. ज्ञानेंद्र नारायण राय, शताब्दी फेलो, भारत अध्ययन केंद्र, काशी हिंदू विश्वविद्यालय Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Sun, 26 Jan 2025 07:07 AM IST

सार

भारत में गणतंत्रात्मक राज्य की प्राचीनता के संकेत वैदिक काल से ही मिलते हैं। ‘गण’ शब्द का  ऋग्वेद में लगभग छियालीस बार और अथर्ववेद में नौ बार उल्लेख मिलता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला


काशी प्रसाद जायसवाल वैदिक काल में शासन के गणतंत्रात्मक रूप के अस्तित्व के पक्ष में ऐतरेय ब्राह्मण (7.3.14) के एक वचन के संदर्भ से एक दूसरा महत्वपूर्ण प्रमाण प्रस्तुत करते हैं, जिसमें कहा गया है कि उत्तरकुरुओं और उत्तरमदों में शासन के लिए समस्त समुदाय का अभिषेक किया जाता था।


उनकी संस्थाएं ‘वैराज्य अथवा गणतंत्रात्मक राज्य’ कहलाती थीं। काल दृष्टि से पाणिनि का व्याकरण ग्रंथ प्राचीनतम है, जिसमें राजनीतिक संघों के चिह्न स्पष्ट दिखाई देते हैं। ‘सङ्घ चानौत्तरार्ध्ये’ सूत्र से स्पष्ट होता है कि पाणिनि के समय में संघ का स्वरूप अच्छी तरह ज्ञात था। आरसी मजूमदार ने इन्हें नियमों और कानूनों द्वारा बंधी निश्चित संस्था के अर्थ में लिया है। परंतु काशीप्रसाद जायसवाल पाणिनि तथा पालि कृतियों के संदर्भों के आधार पर इस निष्कर्ष पर पहुंचते हैं कि मूलतः संघ और गण का प्रयोग गणतंत्रात्मक राज्यों के लिए हुआ था तथा धार्मिक संघों के लिए इनका प्रयोग बाद में हुआ। बौद्ध साहित्य विशेषकर जातकों में ‘गण’ का अर्थ एक ऐसी संस्था या समिति से है, जिसमें सदस्यगण मिलकर एक हो जाते थे। इसका दूसरा अर्थ गणराज्य भी है। बौद्धकाल में ‘गण’ शब्द का प्रयोग स्पष्ट रूप से जनतंत्रात्मक राज्यों के लिए होने लगा था। बौद्ध साहित्य में इस बात के सबल अंत:साक्ष्य हैं कि बुद्ध के आविर्भाव-काल में अनेक स्वतंत्र कबीले विद्यमान थे, जो अपना प्रशासन या तो प्रजातांत्रिक या कुलीन तंत्रीय व्यवस्था के अंतर्गत चलाते थे। काशीप्रसाद जायसवाल ने जैन ग्रंथ आचारांग सूत्र के आधार पर ‘गण’ के अस्तित्व का उल्लेख किया है। ‘गण’ का अर्थ है-संख्या, अतः गणराज्य का अर्थ हुआ-‘संख्या का शासन।’ मज्झिम निकाय में ‘संघ’ और ‘गण’ साथ-साथ व्यवहृत हुए हैं। त्रिपिटक से ज्ञात होता है कि बुद्ध के काल में मल्ल, लिच्छवी, विदेह आदि राज्य गणतंत्र थे। उनके कई पड़ोसी मगध और कौशल के राजा उन्हें बार-बार जीतने के उद्देश्य से चढ़ाई करने का यत्न करते रहते थे, इसलिए अपनी सुरक्षा के कारण ये गणतंत्र अपना एक संयुक्त राज्य (संघ) बीच-बीच में बनाते थे। स्पष्ट है कि ‘गण’ का अर्थ समूह से है। अतः गणतंत्र का अर्थ है-समूह संचालित राज्य प्रणाली।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next