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Republic Day: संविधान के 75 वर्ष पूरे, तिरंगे के धागों में बुनी भारतीय एकता की कहानी; जिम्मेदारी समझने का मौका

नवीन जिंदल, भाजपा सांसद Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Sun, 26 Jan 2025 07:21 AM IST

सार

‘हर घर तिरंगा’ जैसे अभियानों ने तिरंगे को केवल एक ध्वज से ऊपर उठाकर ऐसी भावना का प्रतीक बनाया है, जो हर भारतीय के दिल में बसी है। संविधान के 75 वर्ष पूरे होने पर तिरंगे के धागों में बुनी भारतीय एकता की कहानी
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भाजपा सांसद नवीन जिंदल - फोटो : अमर उजाला


प्रेरणा का प्रतीक

हमारे राष्ट्रीय ध्वज की यात्रा भारत की स्वतंत्रता की कहानी के साथ गहराई से जुड़ी है। 1905 में पहली बार एक ध्वज बनाया गया, जिसे सिस्टर निवेदिता ने डिजाइन किया था, जो पूरे देश का प्रतिनिधित्व करता था। 1921 में महात्मा गांधी ने एक ऐसा झंडा प्रस्तावित किया, जो संपूर्ण विकास और आत्मनिर्भरता का प्रतीक था। यह विचार एक नए भारत की नींव रखता था- एक ऐसा भारत, जो समानता, न्याय और अखंडता के सिद्धांतों पर आधारित हो। 1931 में वर्तमान तिरंगे का प्रारूप अपनाया गया, जिसमें सबसे ऊपर भगवा, बीच में सफेद पट्टी पर चरखा और नीचे हरी पट्टी थी। 22 जुलाई, 1947 को संविधान सभा ने तिरंगे को राष्ट्रीय ध्वज के रूप में स्वीकार किया तो चरखे की जगह अशोक चक्र ने ले ली। 26 जनवरी, 1950 को संविधान लागू होने के बाद तिरंगा राष्ट्र की एकता-अखंडता, स्वतंत्रता, समानता, आपसी सद्भाव, स्वशासन के हमारे संकल्प का और गहरा प्रतीक बन गया। इसके बाद से हमारा राष्ट्रीय ध्वज ऊंचे पहाड़ों से लेकर महासागरों की गहराई तक और यहां तक कि अंतरिक्ष में भी भारत की प्रगति और दृढ़ता का परिचय दे  रहा है।


हर भारतीय के करीब

2004 में मेरे 10 वर्षों के प्रयासों से सुप्रीम कोर्ट ने हर भारतीय को हर दिन तिरंगा फहराने का अधिकार दिया। इससे पहले यह अधिकार केवल विशेष अवसरों तक सीमित था। यह ऐतिहासिक फैसला न केवल तिरंगे को लोगों के करीब लाया, बल्कि इसे हर नागरिक के गर्व और देशभक्ति का प्रतीक भी बना दिया। वर्ष 2004 में क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर ने अपने हेलमेट पर तिरंगा लगाया तो ध्वज संहिता पर राष्ट्रीय बहस छिड़ गई। इसने हमें यह समझने का अवसर दिया कि तिरंगे का सम्मान और उसकी गरिमा बनाए रखना कितना महत्वपूर्ण है। 2005 में मैंने संसद में इस मुद्दे को उठाया और संसद ने सर्वसम्मति से प्रावधान को मंजूरी दी कि झंडे को कपड़ों पर सम्मान के साथ कमर से ऊपर प्रदर्शित किया जा सकता है। इससे पहले तिरंगे को कपड़ों पर प्रदर्शित करने की अनुमति नहीं थी।


राष्ट्रीय एकता का संकल्प

अब संविधान के 75 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में फ्लैग फाउंडेशन ऑफ इंडिया द्वारा चलाया गया ‘मेरा धागा, मेरा तिरंगा, मेरा देश’ केवल एक अभियान नहीं है, बल्कि यह एक भावनात्मक यात्रा भी है, जो हर भारतीय को तिरंगे की शान बढ़ाने में योगदान करने का अवसर प्रदान करती है। इस अभियान के तहत देशवासियों द्वारा भेजा गया हर धागा हमारे राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक है, क्योंकि हमने उन धागों से तिरंगा झंडा बनाकर संविधान के 75 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में एकता के झंडे का प्रतीक माना है, जो हमारी सामूहिक शक्ति को दर्शाता है। यह पहल न केवल तिरंगे की ऐतिहासिक यात्रा को मनाने का अवसर देती है, बल्कि हमें इसके मूल्यों और आदर्शों से जुड़ने के लिए भी प्रेरित करती है। तिरंगा न केवल स्वतंत्रता सेनानियों की कुर्बानियों की याद दिलाता है, बल्कि यह हमें अपने संविधान निर्माताओं की दूरदृष्टि और लोकतांत्रिक मूल्यों को आत्मसात करने का आह्वान भी करता है।


जीवन का हिस्सा

तिरंगे का सम्मान केवल औपचारिक समारोहों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। यह हमारे विचारों, शब्दों और कर्मों में जीवित रहना चाहिए। जब भी हम तिरंगे को देखें, यह हमें न्याय, समानता और स्वतंत्रता के सिद्धांतों की याद दिलाए। ‘हर घर तिरंगा’ जैसे अभियानों ने लोगों को राष्ट्रीय गौरव और एकता का अनुभव करने का मौका दिया है। यह तिरंगे को केवल एक ध्वज से ऊपर उठाकर ऐसी भावना का प्रतीक बनाता है, जो हर भारतीय के दिल में है।


एक मजबूत भारत का निर्माण

संविधान के 75 वर्षों का यह जश्न हमें उपलब्धियों का मूल्यांकन करने और अपनी जिम्मेदारियों को समझने का मौका देता है। यह हमें प्रेरित करता है कि हम एक ऐसा भारत बनाएं, जो हर चुनौती का सामना करने में सक्षम हो और तिरंगे की जीवंतता को हमेशा ऊंचा रखे। ‘मेरा धागा, मेरा तिरंगा, मेरा देश’ हमारी प्रतिबद्धता का प्रतीक है। यह हमारे संविधान, स्वतंत्रता सेनानियों और हमारी लोकतांत्रिक परंपराओं के प्रति गहरी निष्ठा का प्रतीक है। आइए, तिरंगे की छांव में एकजुट होकर एक ऐसा भारत बनाएं, जो अपने गौरवशाली इतिहास और उज्ज्वल भविष्य का प्रतिबिंब हो। हमारी शक्ति और प्रेरणा का स्रोत हमारा तिरंगा हमेशा ऊंचा लहराता रहे।

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