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धर्मांतरण और चेतावनी: सवाल सिर्फ एक छांगुर का नहीं, प्रशासन और समाज को निरंतर सतर्क रहने की जरूरत

अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: ज्योति भास्कर Updated Mon, 21 Jul 2025 07:51 AM IST

सार

जमालुद्दीन उर्फ छांगुर के मामले में धर-पकड़ चल ही रही थी कि अब उत्तर प्रदेश पुलिस ने धर्मांतरण के बड़े गिरोह का भंडाफोड़ कर देश में सुनियोजित ढंग से चल रहे धर्म परिवर्तन को उजागर किया है। सवाल सिर्फ एक छांगुर का नहीं, इसलिए प्रशासन और समाज को इस मामले में निरंतर सतर्क रहने की जरूरत है।
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बलरामपुर के जमालुद्दीन उर्फ छांगुर पर उत्तर प्रदेश में हो रही कार्रवाई - फोटो : अमर उजाला


यह नेटवर्क केवल धर्मांतरण तक सीमित न रहकर, इसके जरिये युवाओं को कट्टरपंथ के लिए उकसाने और उन्हें देशविरोधी एजेंडे से जोड़ने का काम कर रहा था, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से भी एक बेहद अहम मामला है। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि इस नेटवर्क का संपर्क लश्कर-ए-ताइबा से भी है।


ध्यान देने वाली बात यह भी है कि ये मामले तो सामने आ गए, वरना न जाने कितने छांगुर और धर्मांतरण के अवैध नेटवर्क अब भी देश में चल रहे होंगे। दशक भर से ज्यादा समय से छांगुर भी अपने गैर-कानूनी धंधे चला ही रहा था, क्या प्रशासन को इसकी भनक नहीं होगी?


मुख्यमंत्री कितने ही बेहतरीन प्रबंधक हों, काम तो उन्हें भी प्रशासनिक अमले से ही कराना है। इसलिए, जरूरी है कि उन अधिकारियों व प्रशासकों पर भी कठोर कार्यवाही हो, जिनकी बदौलत ऐसे नेटवर्कों को पनपने का मौका मिलता है। इन कार्रवाइयों को केवल गिरफ्तारियों तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए, ये समाज और प्रशासन के लिए एक चेतावनी भी है कि ऐसी गतिविधियों को रोकने के लिए निरंतर सतर्क और समन्वित प्रयास किए जाएं।


विशेष चिंता का विषय यह भी है कि इस नेटवर्क द्वारा व्हाट्स एप ग्रुप, टेलीग्राम चैनल और कोड वर्ड्स के जरिये कट्टरपंथी संदेश प्रसारित किए जा रहे थे। लिहाजा केंद्र व राज्य सरकारों को डिजिटल प्लेटफॉर्मों और विदेशी फंडिंग के दुरुपयोग को रोकने के लिए मजबूत तंत्र विकसित करना चाहिए। जिस तरह से छह राज्यों से आरोपी पकड़े गए हैं, उससे यह भी साफ है कि अन्य राज्य सरकारें भी ऐसे संगठनों पर नजर रखें और आपसी सहयोग बढ़ाएं।


राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों को भी इस नेटवर्क के अंतरराष्ट्रीय पहलुओं की जांच करनी चाहिए, क्योंकि धर्मांतरण और कट्टरपंथ, अक्सर विदेशी फंडिंग और बाहरी एजेंडे से प्रेरित होते हैं। समाज को भी धार्मिक व सामाजिक सहिष्णुता को बढ़ावा देने की दिशा में काम करना होगा, ताकि ऐसी साजिशों के लिए कोई जगह ही न बचे।

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