फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स

सवाल जो पूछे जाने चाहिए: सांसदों को सार्थक चर्चा करनी चाहिए, बुनियादी सेवाओं की खामियों को दूर करना होगा

शंकर अय्यर
Updated Mon, 21 Jul 2025 07:21 AM IST

सार

आज से संसद का मानसून सत्र शुरू हो रहा है। सांसदों को ऑपरेशन सिंदूर मामले में ट्रंप के दावों, विमान दुर्घटना, मुद्रास्फीति, एमएसएमई के हाल तथा पुलों व गड्ढों के बारे में सार्थक चर्चा करनी चाहिए। भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए शासन-व्यवस्था और बुनियादी सेवाओं की खामियों को दूर करना होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
लोकसभा की कार्यवाही (फाइल) - फोटो : संसद टीवी यू-वीडियो ग्रैब


ऑपरेशन सिंदूर-इस सत्र में राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद के मुद्दे पर मुख्य रूप से चर्चा हो सकती है। पहलगाम आतंकी हमले के बाद यह पहला मानसून सत्र है। सरकार से उम्मीद है कि वह खुफिया विफलता, सुरक्षा चूक, आतंकवादी के पकड़े जाने और चार दिनों तक चली मुठभेड़ पर जवाब देगी। युद्धविराम पर सबका ध्यान है। क्या यह युद्धविराम थोपा गया था, जिसको लेकर भारत के इन्कार के बावजूद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बार-बार दावा कर रहे हैं? युद्धविराम का समय महत्वपूर्ण है, लेकिन कब, कैसे और किसने इसमें मध्यस्थता की, इससे परे यह सवाल भी है कि अमेरिका ने हस्तक्षेप क्यों किया। क्या इसका कारण नूर खान एयरबेस पर ब्रह्मोस का हमला ही था? क्या नूर खान एयरबेस स्थित पाकिस्तानी परमाणु स्थल और प्रणालियां अमेरिकी नियंत्रण में हैं, जैसा कि पाकिस्तानी विशेषज्ञों का दावा है और यदि ऐसा है, तो भारत की सुरक्षा के लिए इसका क्या मतलब है?


एयर इंडिया विमान दुर्घटना- अहमदाबाद से लंदन जा रही एयर इंडिया विमान दुर्घटना, जिसमें 260 लोगों की जान चली गई, हाल के विमानन इतिहास की सबसे भीषण दुर्घटना है। यह दुर्घटना कैसे और क्यों हुई, यह एयर इंडिया और संकटग्रस्त बोइंग, दोनों के लिए अहम है। इस दुर्घटना की जांच करने वाली भारतीय वायु दुर्घटना जांच ब्यूरो ने एक प्रारंभिक रिपोर्ट जारी की, जिसमें कॉकपिट में हुई बातचीत के अंशों के आधार पर पायलटों पर दोष मढ़ा गया। आखिर पूरी बातचीत क्यों नहीं जारी की गई? क्या गलती के बारे में अनुमान लगाकर प्रारंभिक रिपोर्ट जारी करना और फिर स्पष्टीकरण जारी करना सामान्य बात है? क्या यह रिपोर्ट अमेरिकी मीडिया में लीक हुई, और किसने ऐसा किया?नागरिक उड्डयन महानिदेशालय द्वारा एयरलाइनों को ईंधन स्विच की जांच करने के निर्देश का क्या मतलब है? 35 करोड़ से ज्यादा लोग हर साल हवाई यात्रा करते हैं, इसके बारे में वे स्पष्टता और जवाबदेही के हकदार हैं।


मुद्रास्फीति का परिदृश्य- इस सप्ताह के शुरू में, सांख्यिकी मंत्रालय ने जून के लिए खुदरा मुद्रास्फीति दर (2.1 प्रतिशत) जारी की, जिसमें जोर देकर कहा गया, 'यह जनवरी, 2019 के बाद वर्ष-दर-वर्ष सबसे कम मुद्रास्फीति है।' इनसे परे, सवाल यह उठता है कि ऐसा महसूस क्यों नहीं होता! दरअसल, रिजर्व बैंक के घरेलू मुद्रास्फीति प्रत्याशा सर्वेक्षण से पता चलता है कि 80 प्रतिशत उत्तरदाताओं का मानना है कि मुद्रास्फीति बढ़ेगी और 54 प्रतिशत से ज्यादा का मानना है कि यह और तेजी से बढ़ेगी। तथ्य यह है कि सेवाओं की लागत बढ़ रही है और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में गिरावट मुख्यतः सब्जियों और दालों की कम कीमतों के कारण है। तेल की कीमतें 17.7 प्रतिशत, फलों की कीमतें 12.5 प्रतिशत और व्यक्तिगत देखभाल उत्पादों की कीमतें 14.7 प्रतिशत बढ़ी हैं।


सांसदों को स्पष्ट रूप से पूछना चाहिए कि सरकार ने मुद्रास्फीति को कम करने के लिए क्या किया और इसे कम रखने की क्या योजना है, यदि निश्चित रूप से यह सब आंकड़ों का संयोग न हो।


बजट के वादे- फरवरी में सरकार ने सूक्ष्म उद्यमों को आसानी से कर्ज उपलब्ध कराने के लिए उद्यम क्रेडिट कार्ड की घोषणा की थी। बजट भाषण में कहा गया था कि उद्यम पोर्टल पर पंजीकृत सूक्ष्म उद्यमों को पांच लाख रुपये तक का क्रेडिट कार्ड दिया जाएगा और पहले वर्ष में 10 लाख कार्ड जारी किए जाएंगे। उद्यम पोर्टल पर 2.7 करोड़ से ज्यादा सूक्ष्म उद्यम पंजीकृत हैं। एमएसएमई का सकल घरेलू उत्पाद में 30 प्रतिशत, विनिर्माण में 45 प्रतिशत और निर्यात में 48 प्रतिशत योगदान है। क्या सांसद पूछ सकते हैं कि अप्रैल से जून के बीच कितने कार्ड जारी किए गए हैं?


जहां एमएसएमई संघर्ष कर रहे हैं, वहीं सरकारी स्वामित्व वाली एमटीएनएल पर लगातार देनदारी बढ़ रही है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, उस पर सात सरकारी बैंकों के 8,585 करोड़ रुपये बकाया हैं। एमटीएनएल और बीएसएनएल को मिलाकर कुल 72,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का घाटा हो चुका है। बजट में विनिवेश के लिए 47,000 करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा गया है। इस मामले में क्या प्रगति हुई है?
विज्ञापन


पुल और गड्ढे- शायद ही कभी कोई राष्ट्र अपने पुलों और राजमार्गों की हालत देखकर इतना हैरान हुआ हो। इस महीने की शुरुआत में, वडोदरा में एक पुल ढहने से 21 लोगों की मौत हो गई थी। नए बने राष्ट्रीय राजमार्ग बह गए हैं। शहर की सड़कें और एक्सप्रेस-वे गड्ढों से भरे पड़े हैं। लगभग हर शहर हर साल गड्ढों को भरने के लिए सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च करता है। समस्या की गंभीरता ने इस बारे में पोस्ट और नागरिक सक्रियता की बाढ़ ला दी है।


सांसदों को सबसे पहले पुल ढहने की घटनाओं पर स्थिति रिपोर्ट मांगनी चाहिए-पुलों की स्थिति का आकलन करने और समाप्ति तिथियां निर्धारित करने के मंत्रालय के 2016 के वादे का क्या हुआ? भारत को देश भर में गड्ढों पर किए जाने वाले खर्च पर एक श्वेत पत्र जारी करना चाहिए और एक तकनीकी समिति का गठन करना चाहिए, जो घटिया सड़क निर्माण के कारणों की पहचान करे। पुलों, हवाई अड्डों और सड़कों में मौजूद संरचनात्मक खामियों की भयावहता राष्ट्रीय शर्मिंदगी का विषय है।


विकास की पुरानी कहावत कहती है कि जिसे मापा जा सकता है, उसे बेहतर बनाया जा सकता है। विकसित राष्ट्र का दर्जा पाने के लिए भारत को सबसे पहले शासन-व्यवस्था और बुनियादी सेवाओं की आपूर्ति की खामियों को दूर करना होगा।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next