आखिरकार दिल्ली में सरकार रूपी व्यंजन नहीं ही बन पाया। अब नए सिरे से पकवान बनाने की तैयारी है। जबकि महीनों से लोग नए पकवान का इंतजार कर रहे थे। वे पूछ रहे थे कि सरकार कैसे बनेगी। बनेगी, तो उसकी रेसिपी क्या होगी? जब एक मसाले से सरकार नहीं बन पा रही, तो कौन-सा नया मसाला प्रयोग में लाया जाएगा।
कुछ लोग कह रहे थे कि आप के पेड़ से एकाध तेजपत्ता भी तोड़ लिया जाए। कहते हैं, आप के कुछ पत्ते खुद रेसिपी में गिरने को तैयार थे। पर ऐसा नहीं हो पाया।
कई पकवान आसानी से बन जाते हैं, तो कुछ को पकने में बहुत समय लगता है। दिल्ली सरकार भी ऐसा ही पकवान है। कितने दिनों से भट्ठी चढ़ी हुई थी। कच्चा माल तैयार था। बेसन में मसाले मिलने को तैयार थे। थोड़े मसाले कम पड़ रहे थे। अभी इसी चूल्हे पर थोड़े समय पहले आप वालों ने सरकार-व्यंजन बना दिया था।
बनाने का अनुभव तो उन्हें था नहीं। कांग्रेसी मसाले थोड़े पुराने थे, आप वालों के बेसन में मिलाया गया। लगा कि बर्फी बन जाएगी। पर बार-बार बेसन को धरने पर रखने से बर्फी ही सूख गई।
तब से दिल्ली के लोग व्यंजन का इंतजार कर रहे थे। सरकार रूपी व्यंजन बनाने में इतना समय शायद ही कभी लगा हो। पुराने दौर में पकवान बनाना आसान रहता था। कितनी भी विधायक सामग्री कम पड़ जाए, सरकार पकवान बनने में कोई मुश्किल नहीं आती थी। कई बार ये सामग्रियां अलग स्वाद और विचारधारा की होती थीं। इसके बावजूद साथ-साथ मिलकर मीठा-नमकीन-खट्टा सरकार पकवान का स्वाद ले लेते थे।
पर इस बार माजरा अलग है। हरियाणा और महाराष्ट्र में अत्यधिक स्वादिष्ट व्यंजन बनने के कारण भाजपा को दिल्ली की मिलावट वाली रेसिपी में कुछ मजा नहीं आ रहा था। इसलिए अब वह यहां नए सिरे से केसरिया मिठाई बनाने के मूड में है। उसे लगता है कि दिल्ली में मिलावटी व्यंजन से लोगों का हाजमा खराब हो सकता है। अब यह दिल्ली के लोगों के भाग्य में है कि उसे क्या मिलता है!