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रक्षाबंधन 'लाइव'

Tue, 20 Aug 2013 12:26 AM IST
अरविंद तिवारी
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भारत निर्माण का इंद्रधनुष टीवी के पर्दे पर अपनी छटा बिखेर रहा है। विज्ञापन में हरियाली है, इसलिए आम आदमी महंगाई के सूखे में भी जिंदा है। ऐसे में रक्षाबंधन की खुशियां प्याज की तरह अलभ्य हैं। त्योहार अदृश्य मार के सिवाय और क्या है! फिर भी ‘लाइव’ रक्षाबंधन यहां प्रस्तुत है-
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महंगाई सज-धज के साथ हाथ में कीमती राखी लिए वित्त मंत्री के घर दस्तक दे रही है। वित्त मंत्री पसोपेश में हैं कि अगर इससे राखी बंधवा लेते हैं, तो जनता में गलत संदेश जाएगा। वह महंगाई को अंधेरे में आने की सलाह देते हैं। मगर महंगाई की ढीठता देखिए, वह दिन में ही राखी बांधने पर आमादा है। वह छल-छद्म से वित्त मंत्री जी को राखी बांधते हुए एक फिल्मी गीत गुनगुनाती है, भैया मेरे राखी के बंधन को निभाना...

देशभर की तमाम गृहणियां प्याज को राखी बांधना चाहती हैं, मगर प्याज भाव ही नहीं दे रहा। वह कहता है, सस्ते डोरे की राखी बंधवाने से मेरा अपमान होगा। इन दिनों मेरे जैसा वीआईपी इस देश में दूसरा नहीं है! उसे डर है कि ये गृहणियां कहीं राखी बांधकर गिफ्ट में उसे ही न मांग लें।
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देश की बड़ी-बड़ी कंपनियां रुपये को राखी बांधना चाहती हैं, मगर रुपया औंधे मुंह खाई में पड़ा है। कराहते हुए वह कहता है, मेरी प्यारी बहनो, मैं तुम्हारी रक्षा करने में असमर्थ हूं। मैं लाचार हूं, इसलिए तुम ‘डॉलर’ की कलाई में राखी बांध दो।

देश की तमाम सरकारें अपने-अपने क्षेत्र के माफिया के घर राखी लिए खड़ीं हैं। माफिया बाहर आते हैं और सरकारों से राखी बंधवाते हैं। इस अवसर पर माफिया भैया अपने घर ‘एट होम’ का आयोजन भी करते हैं, जिसमें सरकार को लजीज व्यंजन परोसे जाते हैं। राखी के बदले में माफिया अपनी-अपनी सरकार को रक्षा करने का भरोसा देते हैं। सामूहिक भोज में इस बार का मुख्य अतिथि खनन माफिया है। उसके हाथ में सबसे कीमती राखी बंधी है।

‘रिश्वत’ बहिना का राखी बांधते-बांधते बुरा हाल है। वह सुबह पांच बजे से ही नेताओं, अफसरों और बाबुओं की कलाई में राखी बांध रही है।

रक्षाबंधन के इस पुनीत अवसर पर एक महिला दहाड़ मारकर रो रही है। मैं उसके पास पहुंचता हूं। वह सिसकते हुए बताती है कि उसका नाम ‘नैतिकता’ है। उसका कोई भाई नहीं है, इसलिए वह किसी को राखी नहीं बांध पाती।
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