पिछले कुछ हफ्तों से क्रेमलिन यानी रूस के राष्ट्रपति भवन पर आरोप लग रहे थे कि वह पूर्वी यूक्रेन में दोहरे खेल में जुटा हुआ है। एक ओर तो वह सार्वजनिक तौर पर शांति वार्ताओं की वकालत करते दिखता है और दूसरी ओर गोपनीय तरीके से विद्रोहियों को हथियार पहुंचा रहा है। बृहस्पतिवार को मलयेशियाई यात्री विमान के यूक्रेन में मार गिराए जाने के बाद ये आरोप सच प्रतीत होते हैं। अभी इस हादसे की जांच होनी है। मगर कीव से लेकर वाशिंगटन तक जताए जा रहे शक की सुई अब रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की दहलीज पर आकर टिक गई है।
कार्नेगी मास्को सेंटर के निदेशक दिमित्री त्रेनिन कहते हैं, 'यह क्रेमलिन के लिए बहुत ही शर्मनाक वक्त है। पश्चिम के सभी देश और यूक्रेन में भी, सभी क्रेमलिन पर उंगली उठा रहे हैं। उन्हें किसी जांच का इंतजार नहीं।' हालांकि पुतिन ने यूक्रेन पर ही उंगली उठाई है। आर्थिक मामलों के संबंध में हुई कैबिनेट की बैठक के बाद पुतिन का बयान था, इस भयानक त्रासदी की जिम्मेदारी उस देश की है, जिसके क्षेत्र में यह घटना हुई है। हादसे की संभावित वजह बताए बिना पुतिन ने कहा कि अगर यूक्रेन दक्षिण पूर्व में सैन्य ऑपरेशन को अंजाम न देता, तो यह त्रासदी रोकी जा सकती थी। उल्लेखनीय है कि दस दिनों के अस्थायी संघर्ष विराम की अवधि जून के आखिर में खत्म हो गई।
पुतिन ने कहा है कि उनकी जद में जो भी होगा, वह करेंगे, ताकि इस घटना की सही तस्वीर यूक्रेन सहित पूरी दुनिया के सामने आ सके। रूस ने विद्रोहियों को लड़ाके और हथियार मुहैया कराने के आरोपों को सिरे से नकार दिया है। लेकिन हर बीतते सप्ताह के साथ हिंसा बढ़ने के कारण इस युद्ध में रूसी सुरक्षा एजेंसियों की संलिप्तता को लेकर नए सवाल उठने शुरू हो गए थे। बुधवार को ही अमेरिका ने रूस के अलगाववादियों को हथियार मुहैया कराने के आरोप के साथ वहां के कुछ बैंकों और तेल कंपनियों पर नए कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं।
वैसे रूसी सेना ने इसी हफ्ते उस आरोप को भी खारिज कर दिया था, जिसमें यूक्रेन के एक सैन्य विमान को मार गिराने में उसकी संलिप्तता की बात कही गई थी। लेकिन यूक्रेन के रक्षा मंत्री का कहना था कि विमान 21,000 फुट की ऊंचाई पर उड़ रहा था, और इतनी अधिक ऊंचाई पर उड़ रहे विमान को मार गिराने वाली मिसाइल बिना रूस की सहायता से विद्रोहियों के हाथ नहीं लग सकती। कुछ इसी तरह की रूसी संलिप्तता की बात फ्लाइट 17 हादसे में भी कही जा रही है।
वैसे रूसी विश्लेषकों ने भी पुतिन और रूसी सरकार के उस दावे का मजाक उड़ाया था, जिसमें कहा गया था कि यूक्रेन में जारी संकट का कूटनीतिक हल निकालने को वह अकेले ही तत्पर हैं। इस संकट की वजह विगत फरवरी में कीव में रूसी समर्थक सरकार के तख्तापलट को बताया गया था, जिसने यूरोप के साथ घनिष्ठ संबंध बनाने से इन्कार कर दिया था। पुतिन से अपने रिश्ते का हवाला देते हुए एक पूर्व खुफिया अधिकारी ने कहा, 'पुतिन के लिए यह महज एक खेल है। एक तरफ उन्हें शांतिदूत बनना पसंद है, तो दूसरी तरफ वह विद्रोहियों को हथियार भेज रहे हैं। यह बिल्कुल केजीबी वाली शैली है।' वैसे अमेरिका और कुछ यूरोपीय देशों ने रूस पर यह आरोप लगाया है कि वह कई महीनों से अपने सैनिकों और हथियारों को सीमा पार भेज रहा है, जबकि अलगाववादियों ने रूसी मदद के तमाम आरोपों का खंडन किया है। दोनेत्सक और लुहांस्क पर शासन कर रही अलगाववादी सरकारों का कहना है कि उनके पास जो रूसी हथियार हैं, वे उन्होंने यूक्रेन के सैन्य अड्डों से चुराए हैं।
फ्लाइट 17 पर हुए इस हमले ने शीत युद्ध की उस भयानक घटना की याद ताजा कर दी है, जब एक सितंबर, 1983 को सोवियत वायु सेना ने भटक कर सोवियत आकाश में घुस आए कोरियाई बोइंग विमान को मार गिराया था। विमान में सवार सभी 269 यात्रियों की मौत हो गई थी। मास्को तब तक इस घटना की जांच को अनसुना करता रहा, जब तक सोवियत संघ का विघटन नहीं हो गया।
बहरहाल, बृहस्पतिवार को हुए विमान हादसे के तत्काल बाद क्रेमलिन ने पुतिन और बराक ओबामा के बीच पूर्व निर्धारित टेलीफोन वार्ता का सारांश जारी किया है, जिसमें कहा गया है, 'दोनों पक्षों ने यूक्रेन संकट पर विस्तार से चर्चा की'। पुतिन ने तत्काल संघर्ष-विराम की जरूरत को दोहराया है। उन्होंने हालिया प्रतिबंधों पर निराशा भी व्यक्त की। दुर्घटना का संदर्भ अंत के सिर्फ एक वाक्य में नजर आया, जिसके मुताबिक दोनों नेताओं की वार्ता से ठीक पहले उन्हें यूक्रेन के क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त मलयेशियाई विमान के संबंध में हवाई यातायात नियंत्रक की रिपोर्ट मिली है। संभवतः ऐसा इसलिए होगा, क्योंकि पुतिन खुद बृहस्पतिवार को दोपहर बाद ब्राजील से लौटने के क्रम में पूर्वी यूरोप के ऊपर से गुजर रहे थे।
सरकारी टेलीविजन पर सरकार के रुख को ही दिखाया गया है। क्रेमलिन के करीबी विश्लेषक भी यूक्रेन को ही जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। यही नहीं, रोसिया 24 नामक चैनल में तो यह भी दावा किया गया कि मिसाइल हमले के कोई प्रमाण नहीं मिले हैं। एक विश्लेषक के मुताबिक, फ्लाइट 17 यूक्रेन के किसी सैन्य विमान से न टकरा गई हो, क्योंकि आकाशीय सीमा के प्रति यूक्रेन का रवैया ढीला-ढीला है।
यह मायने नहीं रखता कि क्रेमलिन क्या कहता है और क्या करता है। मगर बिना सैन्य प्रशिक्षण के ऐसी जटिल वायु रक्षा प्रणाली को संचालित नहीं किया जा सकता, जिससे इतनी ऊंचाई पर मिसाइल दागी जानी हो। इसी वजह से शक की सुई मॉस्को की ओर मुड़ गई है।
आर्थिक विश्लेषक और राजनीतिक टिप्पणीकार किरिल रोगोव के शब्दों में कहें, तो बात जब भी सैन्य समर्थन की आई, 'पुतिन ने अपने ही हितों को ज्यादा तवज्जो दी। उन्होंने कई गलतियां की हैं, लेकिन उन गलतियों को सुधारने के क्रम में उन्होंने अपनी महत्वाकांक्षा और बढ़ा दी। यह एक खतरनाक रणनीति थी और अब इसका नतीजा सबके सामने है।'