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पंजाब में नशे का बदलता चेहरा: देश की आंतरिक सुरक्षा, राष्ट्रीय हितों के लिए गंभीर चुनौती, सामूहिक संकल्प जरूरी

आशीष तिवारी
Updated Wed, 21 Oct 2026 05:53 AM IST

सार

पंजाब ने आतंकवाद का मुश्किल दौर देखा है। अब वहां नशे का बदलता स्वरूप देश की आंतरिक सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों के लिए गंभीर चुनौती बन चुका है।
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नशे का बदलता स्वरूप देश की आंतरिक सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों के लिए गंभीर चुनौती - फोटो : अमर उजाला प्रिंट


आज इस संकट को केवल कानून-व्यवस्था से जुड़ी समस्या मानना सही नहीं होगा। जब नशे की तस्करी के साथ हथियारों की तस्करी, ड्रोन से सीमा पार सामान भेजने, हवाला के जरिये पैसे का लेन-देन और अपराधी गिरोहों की भूमिका भी सामने आती है, तो मामला नार्को टेररिज्म का रूप ले लेता है। इसका अर्थ है कि नशे से कमाए गए धन का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों, हथियारों की खरीद और देश में अस्थिरता फैलाने के लिए किया जा सकता है। पंजाब की भौगोलिक स्थिति, पाकिस्तान के साथ लगती अंतरराष्ट्रीय सीमा और सीमा पार सक्रिय तस्करी के नेटवर्क इस चुनौती को और गंभीर बनाते हैं।


2015 में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब में 601.88 किलोग्राम हेरोइन पकड़ी गई। 2024 में यह मात्रा बढ़कर 1,150 किलोग्राम हो गई, जो देशभर में उस वर्ष पकड़ी गई कुल 2,596 किलोग्राम हेरोइन का लगभग 44.5 प्रतिशत थी। 2025 में स्थिति और चिंताजनक दिखाई दी, जब पंजाब में 2,086 किलोग्राम हेरोइन की बरामदगी दर्ज की गई। यह देशभर में पकड़ी गई 3,567 किलोग्राम हेरोइन का लगभग 58.5 प्रतिशत था।  2025 की रिपोर्ट का एक और चिंताजनक पहलू सीमा पार से ड्रोन के जरिये नशीले पदार्थों की तस्करी है। देशभर में दर्ज 305 ड्रोन-संबंधी मामलों में से 298 मामले पंजाब में सामने आए और इन मामलों में लगभग 461 किलोग्राम नशीले पदार्थ पकड़े गए।


नशे का दूसरा गंभीर रूप उन दवाओं का है, जिनका उपयोग चिकित्सकीय जरूरतों के लिए होता है, लेकिन गलत बिक्री, बिना उचित पर्चे के वितरण, फर्जी बिलिंग और अवैध आपूर्ति के माध्यम से उनका दुरुपयोग होने लगता है। दवा उद्योग और वैध चिकित्सा व्यवस्था को संदेह के घेरे में खड़ा करना समाधान नहीं है, लेकिन उन दुकानों, वितरकों और आपूर्तिकर्ताओं के विरुद्ध सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, जो नियमों को ताक पर रखकर नशीली दवाओं को अवैध बाजार तक पहुंचाते हैं। केवल छिटपुट छापों से इस समस्या का समाधान नहीं होगा। इसके लिए ड्रग नियंत्रक विभाग, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और केंद्रीय एजेंसियों के बीच नियमित सूचना साझा करने की व्यवस्था होनी चाहिए।


मार्च 2023 में केंद्र सरकार ने संसद में बताया था कि पंजाब की भारत-पाकिस्तान सीमा पर ड्रोन से जुड़े 28 मामलों में 125.174 किलोग्राम हेरोइन के साथ पिस्तौल, कारतूस, डेटोनेटर और 4.750 किलोग्राम अन्य विस्फोटक सामग्री बरामद की गई थी। राष्ट्रीय जांच एजेंसी के मामलों में पाकिस्तान में मौजूद हरविंदर सिंह संधू उर्फ रिंदा और विदेश में सक्रिय लखबीर सिंह लांडा तथा अर्शदीप सिंह उर्फ अर्श डल्ला के नाम हथियारों की तस्करी, जबरन वसूली और आतंकवादी गतिविधियों से जुड़े आरोपों के संदर्भ में सामने आए हैं। दिसंबर 2024 में एनआईए ने लांडा और गैंगस्टर पवित्र बटाला से जुड़े कथित नेटवर्क के एक सहयोगी की गिरफ्तारी की जानकारी दी थी। अक्तूबर 2025 में एनआईए ने पाकिस्तान से समुद्री मार्ग के जरिये गुजरात लाई गई और पंजाब पहुंचाई जाने वाली 500 किलोग्राम हेरोइन की खेप से जुड़े अंतरराष्ट्रीय मामले में आठ आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था। जांच एजेंसी ने इस मामले को लश्कर-ए-ताइबा के लिए धन जुटाने की कथित साजिश से जोड़ा।


पंजाब को इस लड़ाई में केंद्र और राज्य के बीच राजनीतिक खींचतान से ऊपर उठकर काम करना होगा। सीमा सुरक्षा बल, पंजाब पुलिस, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, राजस्व खुफिया निदेशालय, औषधि नियंत्रक विभाग और वित्तीय जांच एजेंसियों के बीच खुफिया जानकारी का त्वरित आदान-प्रदान होना चाहिए। पंजाब ने आतंकवाद का कठिन दौर देखा है और अपनी सामाजिक एकजुटता से उससे उबरने का रास्ता भी बनाया है। आज नशे और नार्को टेररिज्म की चुनौती के सामने भी वैसी ही दृढ़ता, पारदर्शिता और सामूहिक संकल्प की जरूरत है।

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