देश-दुनिया की निगाहें भारत में सरकार द्वारा प्रशासन के विभिन्न विभागों में अनुभवी पेशेवर प्रतिभाओं के संयुक्त सचिव स्तरीय पदों पर उपयोग लिए जाने संबंधी परिदृश्य पर लगी हुई हैं। इस अभियान के पीछे असाधारण योग्यता वाले अनुभवी पेशेवरों को उनकी प्रतिभा और क्षमता के हिसाब से प्रशासन व देश के विकास में योगदान देने का मौका सुनिश्चित करना है।
शुरुआत में निजी क्षेत्र के अनुभवी कुशल पेशेवर 10 सरकारी मंत्रालयों में संयुक्त सचिव के 10 पदों पर लैटरल एंट्री के तहत सीधे नियुक्ति प्राप्त कर सकेंगे। अभी इन पदों पर सिविल सर्विसेस परीक्षा से आईएएस बने अधिकारी कोई 25 साल की सेवा के बाद पहुंच पाते हैं।
नौकरशाही में लैटरल एंट्री का पहला प्रस्ताव 2005 में आया था। 2010 में दूसरी प्रशासनिक सुधार रिपोर्ट में भी इसकी अनुशंसा की गई। केंद्र में एनडीए की सरकार बनने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2016 में इसकी संभावना तलाशने के लिए एक कमेटी बनाई। केंद्र सरकार देश के साथ पूरी दुनिया से उच्च शिक्षा प्राप्त अनुभवी कुशल पेशेवरों और प्रतिभाओं को भारत से जोड़ने की डगर पर आगे बढ़ी है।
इसके तहत पहले चरण में उसने एक से 30 सितंबर, 2016 तक 100 आवेदकों के चयन हेतु ऑनलाइन पेशकश की थी, जिस पर बड़ी संख्या में देशी-विदेशी आवेदकों ने अनुबंध के आधार पर तीन साल के लिए देश के विकास में अपना योगदान देने के लिए आवेदन किया था।
अनुभवी और कुशल भारतीय पेशेवर प्रशासन का सक्रिय हिस्सा बनकर देश के विकास को गति दे सकते हैं। केवल सरकारी तंत्र में ही नहीं, निजी क्षेत्र में भी अनुभवी पेशेवरों की अहमियत बढ़ी है। भारतीय पेशेवर प्रतिभाओं के उपयोग के लिए विभिन्न देशों में ऊंचे वेतन की पेशकश भी की जा रही है। मैनपावर ग्रुप की स्टडी रिपोर्ट में कहा गया है कि रोजगार बाजार की नई जरूरतों के अनुरूप सुसज्जित भारतीय युवाओं की दुनिया में भारी मांग है।
अमेरिका के ड्यूक, कैलिफोर्निया और हार्वर्ड विश्वविद्यालयों के सहयोग से कॉफमैन फाउंडेशन द्वारा किए गए शोध अध्ययन में कहा गया है कि चूंकि भारत का आर्थिक परिदृश्य अनुकूल है, अत: अमेरिका और अन्य विकसित देशों से भारतीय प्रतिभाएं भारत की ओर तेजी से लौट सकती हैं। विश्व बैंक की एक रिपोर्ट वैश्विक विकास क्षितिज में भी कहा गया है कि अपने मजबूत उद्योग-व्यवसाय के कारण वर्ष 2025 तक विश्व अर्थव्यवस्था में भारत का दबदबा चमकता हुआ दिखाई देगा।
मोदी सरकार से पहले भी विभिन्न प्रधानमंत्रियों द्वारा पेशेवरों को सरकार के कार्यों में सहयोग हेतु जिम्मेदारी सौंपी जाती रही है। यूपीए सरकार के दूसरे कार्यकाल में नंदन नीलेकणी को लाया गया और उन्हें आधार के लिए अधिकार दिए गए। इंदिरा गांधी भी नियमित रूप से कारोबारी जगत की प्रतिभाओं को बेहतर उपयोग में लाती रहीं। दूरसंचार में क्रांति के लिए राजीव गांधी सैम पित्रोदा को लाए।
अटल बिहारी वाजपेयी ने आर वी शाही को बिजली सचिव की महत्वपूर्ण भूमिका दी थी, जिनके बेहतर नतीजे देखने को मिल रहे हैं। वी.पी. सिंह ने अरुण सिंह को जवाबदारी देकर रक्षा संगठन का आधुनिकीकरण करने के कदम उठाए। नरसिंह राव मनमोहन सिंह को लाए और उन्हें सीधे वित्त मंत्री बना दिया। मनमोहन सिंह के वित्त सचिव मोंटेक सिंह आहलूवालिया ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।
से में अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बड़ी संख्या में देश और विदेश की कुशल प्रतिभाओं और पेशेवरों का प्रशासन तथा सरकारी कार्य में सहयोग लेने का जो अभियान चलाया गया है, वह अवश्य लाभप्रद होगा।