इंदौर की घटना कोई पहली नहीं है, जब इतनी कम उम्र में बच्चों में हिंसक प्रवृत्ति देखने को मिली हो। बीते मई में भी मध्य प्रदेश स्थित सिवनी में तीन बच्चों ने मिलकर अपने एक 12 वर्षीय दोस्त की हत्या कर दी थी। आए दिन ऐसी खबरों से हमारा सामना होता रहता है, जिसमें कम उम्र के बच्चे या किशोर हिंसक घटनाओं को अंजाम देते दिखते हैं। यह हिंसा केवल ऑफलाइन माध्यमों तक ही सीमित नहीं है।
ऑस्ट्रेलिया की ई-सेफ्टी कमिश्नर जूली इनमैन ग्रांट ने बताया कि उन्हें अगस्त में बच्चों द्वारा अपने साथियों को धमकाने के लिए उनकी यौन छवियां बनाने की पहली शिकायत मिली थी। विश्व स्वास्थ्य संगठन का अनुमान है कि दो से 17 वर्ष की उम्र के एक अरब बच्चे एक ही वर्ष में शारीरिक, यौन या भावनात्मक हिंसा या उपेक्षा का अनुभव करते हैं।
महात्मा गांधी ने कहा था, 'अहिंसा ताकतवर लोगों का हथियार है', लेकिन वास्तव में स्कूलों में हिंसा बच्चों में घरों से बाहर अधिकार की भावना पैदा कर रही है। बच्चों में हिंसक प्रवृत्ति कहां से आती है, उन कारकों पर विचार करना बेहद आवश्यक है। पहला है, सामाजिक वातावरण, यानी जहां बच्चे का पालन-पोषण होता है, वह उनके व्यवहार को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करता है। घर, समाज या मीडिया में हिंसा देखकर उनके व्यवहार में उसी तरह की धारणाएं आकार लेती हैं। दूसरा, बच्चे अंतर्निहित मनोवैज्ञानिक विषयों या पिछले दर्दनाक अनुभवों के कारण भी हिंसक प्रवृत्ति प्रदर्शित कर सकते हैं। कुछ बच्चे अपने भावनात्मक दर्द को कम करने के तरीके के रूप में भी हिंसा का सहारा लेते हैं। तीसरा, बच्चे अपने साथियों के आक्रामक व्यवहार की नकल करते हैं। शक्तिशाली होने या माने जाने की इच्छा उन्हें हिंसक कार्यों की ओर प्रेरित कर सकती है।
चौथा, कभी-कभी बच्चों की पूरी न हुई जरूरतें भी उन्हें हिंसा की ओर धकेल सकती हैं। पांचवां, प्रौद्योगिकी के विकास के साथ साइबर बुलिंग और हिंसक ऑनलाइन गेमों का जोखिम तेजी से बढ़ रहा है। हिंसक ऑनलाइन गेम छात्रों को हिंसा के रूप में अपनी आक्रामक ऊर्जा को व्यक्त करने का मौका देते हैं। इससे उन पर स्थायी मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ सकता है। छठा, बच्चे के जीवन में सकारात्मक रोल मॉडल या सलाहकारों की अनुपस्थिति भी बच्चे को गलत संगति की ओर मोड़कर हिंसक बना सकती है।
बच्चों में हिंसक प्रवृत्ति विकसित होने से रोकने के लिए सर्वप्रथम माता-पिता, परिवार, शिक्षक और समाज के समर्थन की आवश्यकता है। उनके साथ अधिक से अधिक समय व्यतीत करने, उनमें संस्कारों का पोषण करने, उन्हें संघर्ष समाधान कौशल सिखाने, संचार कौशल विकसित करने, भावनात्मक समर्थन देने और उनमें सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने पर ध्यान देने की बेहद आवश्यकता है, ताकि बच्चों को खुद को अभिव्यक्त करने के स्वस्थ तरीके विकसित करने में मदद मिल सके।
परिवार का किसी बच्चे के व्यवहार पर गहरा प्रभाव पड़ता है, इसलिए परिवार के लोगों के बीच बेहतर संबंध होना चाहिए। साथ ही, शिक्षा और जागरूकता के जरिये बच्चों के लिए एक सुरक्षित वातावरण तैयार किया जाए, जहां उनका सर्वांगीण विकास हो सके। बच्चों को मोबाइल के सही उपयोग के बारे में भी बताया जाए। परिवार, समाज और शैक्षणिक संस्थान ऐसे वातावरण बना सकते हैं, जो स्वस्थ संबंधों, सहानुभूति और प्रभावी संघर्ष समाधान कौशल को बढ़ावा देंगे, जिससे बच्चों में सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होगा और ऐसी घटनाओं पर नियंत्रण पाने में मदद मिलेगी। मदर टेरेसा ने भी कहा था, 'यदि हमारे पास शांति नहीं है, तो इसका कारण है कि हम भूल गए हैं कि हम सभी एक-दूसरे के लिए बने हैं।'