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थिएटर कमांड की तैयारी: सैन्य सुधारों की नई राह पर फौज, एकजुटता और तकनीक पर जोर

हर्ष कक्कड़
Updated Tue, 23 Sep 2025 07:37 AM IST

सार

कोलकाता में संयुक्त कमांडरों के सम्मेलन में सेना के भविष्य के सुधारों पर जोर दिया गया। सशस्त्र बल लगातार एकीकरण और एकजुटता की ओर बढ़ रहे हैं। अंततः एकीकृत थिएटर कमांड का निर्माण होगा, जो फिलहाल कुछ दूर है। तब तक ऐसे क्रमिक कदम उठाए जाते रहेंगे।
 
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सैन्य सुधारों की नई राह पर फौज। - फोटो : अमर उजाला


कोलकाता में संपन्न संयुक्त कमांडरों के सम्मेलन में भविष्य के सुधारों पर विशेष जोर दिया गया। इस सम्मेलन को प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री सहित अन्य लोगों ने संबोधित किया। सम्मेलन का विषय था ‘सुधार का वर्ष-भविष्य के लिए परिवर्तन।’ ऐसा आयोजन 2023 में भी हुआ था। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में परिचालन तत्परता बढ़ाने के लिए एकजुटता, आत्मनिर्भरता और नवाचार पर जोर दिया।


रक्षा मंत्री ने स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से प्रधानमंत्री मोदी द्वारा घोषित वायु रक्षा की सुदर्शन चक्र परियोजना का जिक्र किया। रक्षा मंत्री ने जॉइंट मिलिटरी स्पेस डॉक्टरिन (जेएमसी) भी जारी किया। सम्मेलन के दौरान सेनाओं के बीच अंतर-संचालन, निर्णय लेने की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करना और अंतरिक्ष, साइबर तथा विशेष अभियानों के क्षेत्रों में संस्थागत ढांचों में सुधार जैसे विषयों पर चर्चा की गई। सीडीएस ने सम्मेलन के अंतिम दिन प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री द्वारा दिए गए निर्देशों का उल्लेख किया और समूह ने उनके कार्यान्वयन के लिए एक रोडमैप पर चर्चा की।


सम्मेलन के दौरान तीनों सेनाओं के बीच एकजुटता बढ़ाने वाले कुछ बड़े फैसले लिए गए। सीडीएस के अधीन काम करने वाले और इस कार्यक्रम का समन्वय करने वाले आईडीएस (एकीकृत रक्षा स्टाफ) मुख्यालय ने ट्वीट किया कि ‘संयुक्त कमांडरों के सम्मेलन के अंतिम दिन, सभी प्रमुखों और कमांडरों द्वारा तीनों सेनाओं की शिक्षा शाखाओं का विलय करके एक त्रि-सेवा शिक्षा कोर बनाने के निर्णय की घोषणा की गई।’


इसके अलावा, तीन संयुक्त सैन्य स्टेशनों के गठन के निर्णय की भी घोषणा की गई, जो देश में पहली बार हो रहा है। तीनों सेनाओं का शिक्षा विभाग गैरिसन, सैनिक स्कूलों और व्यक्तिगत सेवाओं के प्रशिक्षण संस्थानों में सैनिकों के शैक्षिक स्तर को समान रूप से बढ़ाने के लिए जिम्मेदार है। सेना ने पहले अपनी शिक्षा वाहिनी को साइबर, सूचना प्रौद्योगिकी और भाषाई क्षमताओं सहित व्यापक उद्देश्यों के साथ आर्मी नॉलेज एंड एनेबलर्स कोर में पुनर्गठित करने की योजना बनाई थी। इसका उद्देश्य भाषा विज्ञान के साथ-साथ साइबर सुरक्षा, सूचना प्रौद्योगिकी और धारणा प्रबंधन के लिए जिम्मेदारी को संभालना था। इन क्षेत्रों में प्रशिक्षित विशेषज्ञों की नियुक्ति शुरू हो चुकी है। आईडीएस मुख्यालय की प्रारंभिक घोषणा में यह स्पष्ट नहीं था कि क्या यह नौसेना और वायु सेना के लिए भी मानक होगा।


साथ ही, अगर शिक्षा शाखा का विलय अपने वर्तमान स्वरूप में होता है, तो सेना के कोर के पुनर्निर्देशन के इरादे पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा, इस बारे में विस्तृत जानकारी सार्वजनिक होने में अभी समय लग सकता है। जहां तक संयुक्त सैन्य स्टेशनों के निर्माण की बात है, तो सरकार के निर्णय के आधार पर, मौजूदा छावनियों को सैन्य स्टेशनों में परिवर्तित किया जा रहा है और नागरिक क्षेत्रों को स्थानीय नगर निकायों को सौंपा जा रहा है।


कई छावनियां वर्तमान में सैन्य स्टेशनों में परिवर्तित होने की प्रक्रिया में हैं। सैन्य स्टेशन वे स्थान हैं, जहां सैनिकों को उनके परिवारों के साथ रखा जाता है और प्रशिक्षण भी होता है। मौजूदा संयुक्त सैन्य स्टेशन केवल अंडमान और निकोबार कमान के अंतर्गत पोर्ट ब्लेयर में स्थित हैं। मुंबई, गुवाहाटी और पोर्ट ब्लेयर में संयुक्त परिचालन रसद केंद्र पहले से ही कार्यरत हैं।
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इस समय जहां एक स्टेशन पर एक से ज्यादा सैन्य सेवाएं हैं, वहां प्रत्येक सेना अपनी अलग व्यवस्था और सुविधाएं रखती है। क्लब और अस्पताल जैसी कुछ सुविधाएं सभी के लिए समान हैं। नई नीति का अर्थ होगा कि सभी व्यवस्थाएं और सुविधाएं वरिष्ठ सेवा के नियंत्रण में होंगी, जो उन्हें एक ही रोस्टर के तहत आवंटित करेंगी। यह कैसे काम करेगा, यह देखना बाकी है।


थिएटराइजेशन का उद्देश्य सेना की तीनों सेवाओं और उनके संसाधनों को एक विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र में एकल, एकीकृत कमान संरचना के तहत परिचालन तैनाती के लिए विशिष्ट ‘थिएटर’ कमानों में एकीकृत करना है। तीन संयुक्त सैन्य स्टेशन बनाने का फैसला भारतीय सेना के तीनों अंगों के बीच बेहतर एकीकरण लाने में कारगर तो होगा ही, इससे बड़े एकीकृत थिएटर कमान के लिए जनशक्ति, बुनियादी ढांचे और परिसंपत्तियों के अनुकूलन में भी मदद मिलेगी। इससे संसाधनों के बेहतर उपयोग से आर्थिक बचत तो होगी ही, आधुनिक युद्ध और आपदा राहत जैसे साझा अभियानों को पूरा करने में भी भारतीय सेना की क्षमता बढ़ेगी और सीमाओं की बेहतर ढंग से सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।


हाल में कोलकाता में हुए सम्मेलन में तीन संयुक्त स्टेशनों के निर्माण की घोषणा की गई है, जहां इन्हें शुरू में परीक्षण के तौर पर लागू किया जाएगा। हालांकि, स्टेशन कहां होंगे, इसकी घोषणा अभी नहीं की गई है, लेकिन उम्मीद है कि परीक्षण में एक-एक स्टेशन शामिल होगा, जहां एक सेवा प्रमुख हितधारक है। हालांकि, सैन्य ठिकानों को नहीं छुआ जाएगा, लेकिन अन्य सुविधाओं को मिला दिया जाएगा। सशस्त्र बल लगातार एकीकरण और एकजुटता की ओर बढ़ रहे हैं। अंततः एकीकृत थिएटर कमांड का निर्माण होगा, जो अभी कुछ दूर है। तब तक ऐसे क्रमिक कदम उठाए जाते रहेंगे।

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