पिछले कुछ समय से नवाचार और शिक्षा प्रणाली के प्रदर्शन में सुधार के लिए खोज बढ़ गई है। नीति निर्माताओं के पास समाज के हित में शिक्षा प्रणाली में बदलाव की प्रक्रिया शुरू करने की क्षमता है। ऐसे बदलाव बाजार की मांग के साथ विश्वविद्यालयों के लक्ष्यों के बीच तालमेल पर निर्भर करते हैं। समावेशी शिक्षा का अवसर प्रदान करने के लिए उच्च शिक्षा प्रणाली में नवाचार और सर्वोत्तम प्रथाओं को लाने के उद्देश्य से एक प्रयास होना चाहिए।
भारत के विकास की कहानी उल्लेखनीय है और यह व्यवसाय करने के लिए विश्व का आकर्षक गंतव्य बन गया है। हालांकि, समय की मांग यह है कि देश भर के विश्वविद्यालय पिछले कुछ दशकों में हुए सामाजिक-आर्थिक और तकनीकी परिवर्तनों के रूप में विश्व अर्थव्यवस्था में आए बदलावों के साथ तालमेल बिठाएं। उदाहरण के लिए, इंडस्ट्री 4.0 एक तकनीकी क्रांति करने और व्यावसायिक माहौल की गतिशीलता को बदलने जा रहा है, जहां नए उद्योग और नौकरियां पारंपरिक उद्योग और नौकरियों की जगह ले लेंगी।
इंडस्ट्री 4.0 एक नया शब्द है, जो नई डिजिटल औद्योगिक प्रौद्योगिकियों को दिया गया है, जिसमें साइबर-फिजिकल सिस्टम, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, क्लाउड कंप्यूटिंग, कॉग्निटिव कंप्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, 3 डी प्रिंटिंग, एनर्जी स्टोरेज और क्वांटम कंप्यूटिंग शामिल हैं। इंडस्ट्री 4.0, जिसे चौथी औद्योगिक क्रांति भी कहा जाता है, व्यावसायिक वातावरण में और महत्वपूर्ण बदलाव लाएगा। भावी फैक्टरियां ऑटोमेशन पर आधारित होंगी और रोबोटिक्स का इस्तेमाल बढ़ेगा। इंटरनेट ऑफ थिंग्स हमारे जीने और काम करने के तरीकों को बदल देगा। यह विनिर्माण प्रौद्योगिकियों की गतिशीलता को बदल देगा, जिससे व्यावसायिक वातावरण में बदलाव आएगा। इस तरह की तकनीकी क्रांति के कारण पारंपरिक नौकरियों की जगह आधुनिक उद्योग की नई नौकरियां ले लेंगी। समय के साथ कई नियमित नौकरियों की संख्या घट जाएगी। विनिर्माण में ऑटोमेशन के बढ़ते प्रचलन के कारण फैक्टरियों में श्रमिकों के लिए जगह नहीं होगी। हालांकि कुशल नौकरियों की मांग बढ़ सकती है।
भविष्य में अधिकांश लोगों को मल्टी-ट्रैक करियर और कई नौकरियों की आवश्यकता होगी। यह भारतीय विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा व्यवस्था के सामने अवसर और चुनौती पेश करेगा। ऐसे हालात में रोजगार के लिए एक नए तरह के कौशल की आवश्यकता होगी। इन जरूरतों को पूरा करने के लिए भारतीय विश्वविद्यालयों को पाठ्यक्रम, अनुसंधान, उद्योग इंटरफेस, नेतृत्व, संकाय गुणवत्ता इत्यादि के संदर्भ में संरचनात्मक परिवर्तन करने की आवश्यकता है। समय की मांग है कि भारत में उच्च शिक्षा आर्थिक और सामाजिक विकास के साथ-साथ पिछले कुछ दशकों में कारोबारी माहौल में हुए बदलाव के साथ तालमेल बनाए। भारत में कई प्रसिद्ध विश्वविद्यालय और शिक्षा संस्थान हैं, जिनमें प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। इनका इस्तेमाल चौथी औद्योगिक क्रांति की चुनौतियों से निपटने के लिए किया जा सकता है। यह तभी संभव है, जब सभी अग्रणी विश्वविद्यालय मिलकर प्रौद्योगिकी-अनुकूल वातावरण, स्वदेशी मुद्दों पर उच्च गुणवत्ता वाले शोध और उद्योग भागीदारी के माध्यम से जागरूक, सचेत और गंभीर प्रयासों के साथ रोजगार क्षमता बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करें। इसके लिए भारत में उच्च शिक्षा को ज्यादा प्रभावशाली और प्रासंगिक बनाने के लिए काफी धन और प्रयास की जरूरत है। चौथी औद्योगिक क्रांति के अवसरों को हासिल करने के लिए हमें तैयार होने की जरूरत है। ऐसा करने के लिए विश्वविद्यालयों को व्यापक रोडमैप बनाने के साथ-साथ संरचनात्मक परिवर्तन की रणनीति बनानी चाहिए।
-लेखक आईआईएम, तिरुचिरापल्ली में प्रोफेसर हैं