जब अमेरिकी कांग्रेस के सदस्य खाद्य कूपन कार्यक्रम की कटौती पर विचार करेंगे, तो उनसे पूछा जाना चाहिए कि क्या वे यही चाहते हैं कि कई और छोटे बच्चे नाश्ता छोड़कर स्कूल आएं। वैसे भी, ओकला के नॉर्थ तुलसा में बेहद विपन्न इलाके के एक प्रि-किंडरगार्डेन की शिक्षका किशा हिल की मानें, तो खाद्य कूपन कार्यक्रम के बाधित होने से पहले महीने के आखिरी कुछ दिनों में कुछ बच्चे अक्सर कम खाना खाने के कारण पढ़ाई पर ध्यान नहीं दे पाते हैं। वह बताती हैं कि जब बच्चे का पेट खाली होगा, तो वे पढ़ाई पर ध्यान कैसे लगा पाएंगे। अभी करीब 4.7 करोड़ अमेरिकी खाद्य कूपन प्राप्त करते हैं, जिनमें कुछ वैसे लोग भी शामिल हैं, जो कूपन न मिलने पर भूखे रह जाएंगे। एक ताजा सरकारी आंकड़े के मुताबिक, करीब पांच प्रतिशत अमेरिकी परिवार के पास बेहद कम खाद्य सुरक्षा है, यानी महीना खत्म होने से पहले ही उनका राशन खत्म हो जाता है।
इसी बीच, 14 फीसदी अमेरिकी बच्चे लौह तत्व आयरन की कमी से पीड़ित हैं। कुपोषण एकमात्र कारण नहीं है, पर यह महत्वपूर्ण कारण जरूर है। और इस वजह से ये बच्चे असंतुलित मानसिक विकास से पीड़ित हो सकते हैं। अमेरिका में ऐसे कुपोषण से निजात मुश्किल है, क्योंकि कुछ बच्चे कुपोषण एवं मोटापे, दोनों से पीड़ित हैं। हम मानते हैं कि अफ्रीका या एशिया में कुपोषित या खून की कमी के शिकार बच्चे होते हैं, लेकिन अमेरिका जैसे अमीर देशों में ऐसे बच्चों को देखना हतोत्साहित करने वाला है। कोलंबिया विश्वविद्यालय के बाल चिकित्सक एवं बाल स्वास्थ्य कोष के अध्यक्ष डॉ. इरविन रेडलनर मानते हैं कि खाद्य कूपनों में कटौती अमेरिकी बच्चों के स्वास्थ्य के लिहाज से एक स्पष्ट खतरा है। इसके चलते बच्चे और भी ज्यादा खून की कमी एवं शैक्षणिक मुश्किलों का सामना करेंगे।
खाद्य कूपन लाभार्थी को पहले ही इस महीने कटौती का सामना करना पड़ा है और आगे भी करना पड़ सकता है। प्रस्तावित कृषि बिल के डेमोक्रेटिक संस्करण के अनुसार खाद्य कूपन में दस वर्षों में चार अरब डॉलर की कटौती की जाएगी, जबकि रिपब्लिकन संस्करण के अनुसार 40 अरब डॉलर की कटौती होगी।
संघीय सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, इसका 90 फीसदी लाभ गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले परिवारों को मिलता है। इनमें से दो तिहाई लाभार्थी बच्चे, बुजुर्ग और विकलांग हैं। सरकार ने पहले ही काफी खाद्य पदार्थों को सब्सिडी दी है। जब अमीर अधिकारी किसी फैंसी फ्रेंच रेस्तरां में भोजन करते हैं, तो उनके बिल के हिस्से में से करों की कटौती की संभावना है, जो कि करदाताओं की सब्सिडी के बराबर है। ऐसे में सवाल उठता है कि एनिमिया पीड़ित बच्चों को खाद्य सब्सिडी देना अधिकारियों को लजीज फ्रेंच व्यंजन के लिए सब्सिडी देने के मुकाबले विवादास्पद कैसे है?
खाद्य कूपनों में कटौती के लिए चर्चित इसी कृषि बिल में कृषि सब्सिडी का भी जिक्र है, जो समस्याओं से जूझते किसानों के लिए ही नहीं, बल्कि एक पर्यावरण कार्य समूह के अनुसार, उन 50 अरबपतियों या कंपनियों के लिए भी है, जो हाल के वर्षों में कृषि क्षेत्र में आए हैं। कृषि सब्सिडी पाने वाले अयोग्य लोगों में एक न्यूयॉर्क टाइम्स का स्तंभकार भी शामिल है। जी हां, मुझे एक वर्ष में 588 डॉलर का भुगतान किया गया, पर मैंने जंगली भूमि पर फसलें नहीं उगाईं। हालांकि बाद में मैंने वह धन सोमालीलैंड के एक प्रसूति अस्पताल को दे दिया। जब हमारा देश न्यूयॉर्क के एक पत्रकार को ओरेगॉन के जंगलों में फसलें उगाने के लिए भुगतान कर सकता है, तो साफ है कि समस्या इस कृषि बिल में है, न कि खाद्य कूपन में।
छोटे बच्चों के पोषण में सुधार के अलावा खाद्य कूपन दीर्घकालीन अर्थों में भी महत्वपूर्ण है। हाल के वर्षों में बढ़ती छात्रवृत्ति के साथ पाया गया है कि छोटे बच्चों में कुपोषण की समस्या बढ़ी है। इसका एक कारण यह लगता है कि जब एक भ्रूण या शिशु कुपोषण का शिकार होता है, तो वह आगे शेष जीवन के लिए भी भोजन की कमी से जूझने के लिए तैयार हो रहा होता है। यदि बाद में उसे पर्याप्त भोजन मिलता है, तो पाचन के अंसतुलन के कारण वह मधुमेह, मोटापा और हृदय संबंधी रोगों का शिकार हो सकता है। इसलिए कांग्रेस द्वारा खाद्य कूपन के लाभ में कटौती एक विवेकपूर्ण राजकोषीय प्रबंधन नहीं होगा, बल्कि यह अदूरदर्शी क्रूरता होगी।