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तमिलनाडु में राजनीतिक शून्य

Fri, 04 Nov 2016 06:20 PM IST
भास्कर साईं
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भास्कर साईं
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तमिलनाडु फिलहाल ऐसी स्थिति से गुजर रहा है, जैसा पहले कभी नहीं देखा गया। मुख्यमंत्री जयललिता और पूर्व मुख्यमंत्री एम करुणानिधि, दोनों दिग्गज नेता संभवतः इतिहास में पहली बार सक्रिय नहीं हैं। पिछले करीब तीन दशकों से तमिलनाडु की राजनीति इन्हीं दोनों नेताओं के इर्द-गिर्द घूमती रही है और लोगों ने शायद ही कभी इन दोनों को निष्क्रिय देखा हो। वित्त मंत्री ओ पन्नीरसेलवम के नेतृत्व में हालांकि सरकार का कामकाज चल रहा है, जिन्हें मंत्रियों और शीर्ष अधिकारियों की टीम सहयोग करती है। लेकिन जयललिता के लंबे समय से अस्पताल में होने के कारण जो खालीपन पैदा हुआ है, उसे आसानी से महसूस किया जा सकता है। उसी तरह विपक्षी पार्टी द्रमुक में वैसे तो कोषाध्यक्ष और करुणानिधि के छोटे पुत्र एमके स्टालिन ने सारा कामकाज संभाल लिया है। लेकिन करुणानिधि की सक्रियता का अभाव तमिलनाडु के लिए नया है और द्रमुक के सदस्य इस कमी को दोगुना महसूस कर रहे हैं।
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अलबत्ता दोनों ही पार्टियों के सूत्रों के मुताबिक, सारी उम्मीदें अभी कायम हैं और पार्टी कार्यकर्ता दोनों नेताओं के स्वास्थ्य के बारे में आशावादी हैं। अन्नाद्रमुक प्रवक्ता और पूर्व मंत्री पनरुति एस रामचंद्रन भरोसा जताते हैं कि 22 सितंबर से अपोलो अस्पताल में दाखिल 68 वर्षीया जयललिता की हालत में सुधार हो रहा है और उन्हें उम्मीद है कि गरीबों के लिए काम करने वह शीघ्र लौटेंगी। दूसरे प्रवक्ता सी आर सरस्वती कहते हैं कि डॉक्टरों के मुताबिक जयललिता अब ठीक हो गई हैं, लेकिन वे उन्हें कुछ दिन अपने निरीक्षण में रखना चाहते हैं। उधर करुणानिधि के स्वास्थ्य के बारे में द्रमुक सांसद और पार्टी प्रवक्ता टीकेएस एलागोविन कहते हैं कि वह लगभग स्वस्थ हो गए हैं और आराम कर रहे हैं। यहां तक कि वह अपना बयान लिखवाने में भी सक्षम हैं। हफ्ते भर के भीतर ही वह पार्टी के कामकाज में जुट जाएंगे।

लेकिन जयललिता और करुणानिधि किस हद तक अस्वस्थ हैं? पहले जयललिता की बात करते हैं। मुख्यमंत्री को 22 सितंबर की मध्यरात्रि को एंबुलेंस से अपोलो अस्पताल ले जाया गया। उनके स्वास्थ्य के बारे में अस्पताल द्वारा जारी पहले बुलेटिन में कहा गया कि उन्हें बुखार और डिहाइड्रेशन की शिकायत है। उसके तुरंत बाद जारी बुलेटिन में कहा गया कि उनकी हालत सुधर रही है और वह सामान्य भोजन ले रही हैं और कुछ ही दिनों में उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी। पर दिन पर दिन बीतते गए, और जयललिता को अस्पताल से छुट्टी नहीं मिली। इस बीच उनके स्वास्थ्य को तरह-तरह की अफवाहें फैलती रहीं। अफवाहें फैलाने वालों को पुलिस गिरफ्तार भी करने लगी। हालांकि अब उनकी तबीयत ठीक बताई जा रही है और अगले कुछ दिनों में उन्हें सीसीयू (क्रिटिकल केयर यूनिट) से सामान्य केबिन में शिफ्ट किए जाने की संभावना है।
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दरअसल अम्मा की गैरमौजूदगी में तमिलनाडु में सरकारी कामकाज प्रभावित हो रहा है। चूंकि पार्टी और सरकार में जयललिता का कठोर नियंत्रण है, इसलिए लंबे समय से उनकी गैरमौजूदगी के कारण अलग-अलग गुट सक्रिय होने लगे हैं। अम्मा के अस्पताल में भर्ती होने के तुरंत बाद शशिकला के सक्रिय होने की बातें सामने आई थीं। पन्नीरसेलवम भले ही अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं, लेकिन सरकार के भीतर उन्हें पसंद न करने वाले लोग भी सक्रिय होने लगे हैं। दूसरी ओर, राज्य की जनता अम्मा की लंबी गैरमौजूदगी से स्तब्ध है। उसने छह महीने पहले ही अन्नाद्रमुक को सत्ता सौंपी थी, इसलिए अब वह उनकी जगह किसी दूसरे को नहीं देखना चाहती। आम नागरिकों में अम्मा के स्वास्थ्य के बारे में जानने को बेचैनी है। अम्मा की लोकप्रियता मुख्यतः दो वजहों से है। एक तो उन्होंने गरीबों की बेहतरी के लिए अनेक योजनाएं शुरू कीं। इसके अलावा करुणानिधि के परिवार की तरह उनका कोई परिवार नहीं है, और न ही अन्नाद्रमुक में नेतृत्व के स्तर पर विवाद या गुटबाजी है। अम्मा की बीमारी पर द्रमुक ने जो खबरें फैलाईं, उसे भी लोगों ने अच्छा नहीं माना। पिछले दिनों एक द्रमुक नेता ने कहा कि विभिन्न वजहों से मंत्री और अधिकारी अस्पताल जाकर जयललिता की उंगलियों की छाप ले रहे हैं।

जहां तक करुणानिधि के स्वास्थ्य का सवाल है, तो द्रमुक मुख्यालय से अन्ना अरिवलयम द्वारा एक बयान जारी किया गया है, जिसमें कहा गया है कि पार्टी नेता फिलहाल आराम कर रहे हैं, क्योंकि नियमित रूप से ली जाने वाली एक दवा से एलर्जी हो जाने के कारण उनकी तबीयत बिगड़ गई थी। डॉक्टरों ने उन्हें कुछ और दिन आराम करने की सलाह दी है। इसलिए उस बयान में लोगों से यह अपील भी की गई कि वह पार्टी मुख्यालय या घर में उनसे मिलने के लिए फिलहाल नहीं आएं।

हालांकि इस नास्तिक नेता के लिए कोई प्रार्थना नहीं हो रही, लेकिन कार्यकर्ताओं को इस खबर से जरूर झटका लगा, जिसे पार्टी के वरिष्ठ नेताओं द्वारा समझाने-बुझाने के बाद शांत किया गया। पर कांग्रेस समेत द्रमुक के सभी सहयोगी दलों के नेता इस 92 वर्षीय नेता के स्वास्थ्य के बारे में जानने को उत्सुक हैं। हालांकि इतना तो तय है कि उम्र के इस मोड़ पर करुणानिधि अब राजनीति में पहले जैसी सक्रियता दिखाने के काबिल नहीं हैं।

नेताओं का बीमार पड़ना नई बात नहीं है। अतीत में एमजी रामचंद्रन भी तमिलनाडु के मुख्यमंत्री रहते हुए बीमार होने पर अस्पताल में भर्ती हुए थे और उन्हें इलाज के लिए अमेरिका भी ले जाया गया था। लेकिन यह पहली बार है कि राज्य की मुख्यमंत्री और प्रमुख विपक्षी दल के नेता, दोनों की तबीयत एक साथ खराब है। इन दोनों नेताओं का राज्य की राजनीति और रोजमर्रा के कामकाज पर काफी असर पड़ता है, जो इन दिनों साफ दिख रहा है।
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-चेन्नई स्थित वरिष्ठ पत्रकार
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