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कविता- कुछ अहसास

Sat, 18 Jan 2014 10:18 PM IST
सुरेश सौरभ
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कुछ कागज
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बिखरे से
उखड़े से
सिमटे से
सिकुड़े से
अकड़े से
कुछ सीना ताने
कुछ अनमने से
कुछ शरमाए
कुछ सकुचाए
कुछ फटे
कुछ नुचे
कुछ मुद्रित
कुछ अमुद्रित
अक्सर तड़पते हैं
आपस में लड़ते हैं
मचलते हैं
किसी कवि की कलम का
आलिंगन पाने को
-सुरेश सौरभ
सुरेश की कविता हमारी जान-पहचान की दुनिया को नए ढंग से परिभाषित करती है। लखीमपुर (खीरी) में रहते हैं।
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