गुजरात ने नरेंद्र मोदी के लिए प्रधानमंत्री पद तक पहुंचने के लिए प्रवेश द्वार का काम किया, और अब ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने आज से शुरू हो रही दो दिवसीय भारत यात्रा के लिए अहमदाबाद को अपना पहला पड़ाव बनाया है। वह यहां ब्रेग्जिट बाद की रणनीतियों को लागू करने और महामारी के प्रभाव को खत्म करने के लिए एक बड़े निवेश की घोषणा करने वाले हैं, जो ब्रिटेन में रहने वाले करीब छह लाख से अधिक गुजरातियों (जिनमें अधिकांश समृद्ध हैं) पर मोदी के प्रभाव का उपयोग करके संभव हो सकता है।
ब्रिटेन की जीडीपी में भारतीय छह फीसदी का योगदान करते हैं। भारतीय डायस्पोरा की स्वामित्व वाली कंपनियां 36.84 अरब पाउंड के संयुक्त राजस्व के साथ 1,74,000 से अधिक लोगों को रोजगार देती हैं और कॉर्पोरेशन टैक्स में एक अरब पाउंड से अधिक का भुगतान करती हैं, जिससे दोनों देशों के रिश्ते को मजबूती मिली है। जॉनसन की यात्रा इस रिश्ते को और मजबूत करेगी, जो दोनों देशों के लिए अच्छा है। अहमदाबाद में जॉनसन प्रमुख व्यवसायियों से मिलेंगे और ब्रिटेन एवं भारत के फलते-फूलते वाणिज्य, व्यापार और लोगों के संबंधों पर चर्चा करेंगे।
पर्यवेक्षकों को लगता है कि जॉनसन ने काफी सोच-समझकर भारत के पांचवें सबसे बड़े राज्य गुजरात को चुना है, क्योंकि यह ब्रिटेन में बड़ी संख्या में रहने वाले ब्रिटिश-भारतीय आबादी का पैतृक घर होने के कारण भावनात्मक रूप से जुड़ा हुआ है। कोविड-19 के प्रकोप के कारण इससे पहले उनकी यात्रा तीन बार स्थगित की गई थी। इस महत्वपूर्ण यात्रा से पहले ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने उत्साह से कहा था कि 'मेरी भारत यात्रा रोजगार सृजन और आर्थिक विकास पर केंद्रित होगी। इसमें वे सब कदम भी उठाए जाएंगे, जो दोनों देशों के बीच दीर्घकालीन साझेदारी को गहरा करने के लिए वास्तव में मायने रखते हैं।
चूंकि निरंकुश राष्ट्रों से हमारी शांति और समृद्धि को खतरा है, इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि सभी लोकतंत्र एवं मित्र देश एकजुट रहें। भारत एक प्रमुख आर्थिक शक्ति के साथ दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, इसलिए इस अनिश्चित समय में ब्रिटेन के लिए यह अत्यधिक मूल्यवान रणनीतिक भागीदार है।' ब्रेग्जिट बाद की रणनीति के रूप में उम्मीद है कि जॉनसन गुजरात में कोई बड़ा निवेश करने की घोषणा कर सकते हैं, जिससे अत्याधुनिक विज्ञान, स्वास्थ्य एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नए सहयोग के माध्यम से रोजगार और विकास को बढ़ावा मिलेगा।
नई रणनीति ब्रिटेन के उपभोक्ताओं के लिए भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था के साथ व्यापार के अवसरों से प्रमुख वस्तुओं की कीमतों में कमी करने पर जोर देती है, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों में कुशल रोजगार, संबंधित क्षेत्रों में हरित प्रौद्योगिकी सेवा और मजदूरी में बढ़ोतरी जैसे क्षेत्रों में ब्रिटिश व्यापारियों को अवसर प्रदान करना शामिल है। आधिकारिक आंकड़े के मुताबिक, भारतीय कंपनियां पूरे ब्रिटेन में 95,000 रोजगार प्रदान करती हैं, जिसे भविष्य के व्यापार सौदे और आगामी निवेश घोषणाओं को अंतिम रूप देने के बाद बढ़ाया जा सकता है।
जॉनसन और मोदी ब्रिटेन और भारत की रणनीतिक रक्षा, राजनयिक और आर्थिक साझेदारी पर गहन बातचीत करेंगे, जिसका उद्देश्य हमारी घनिष्ठ साझेदारी को मजबूत करना और भारत-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा सहयोग को आगे बढ़ाना है। विश्लेषकों का मानना है कि जॉनसन मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर बातचीत में प्रगति पर जोर देंगे। ब्रिटेन ब्रेग्जिट के बाद की स्थिति का सामना करने के लिए अपनी कार्ययोजना के हिस्से के रूप में इस सौदे की उम्मीद कर रहा है।
जॉनसन को लगता है कि भारत के साथ इस तरह के व्यापार सौदे में 2035 तक ब्रिटेन के कुल व्यापार को सालाना 28 अरब पाउंड (36.5 अरब डॉलर) तक बढ़ाने की अपार संभावनाएं हैं, जो इस महीने के अंत में तीसरे दौर की एफटीए वार्ता के माध्यम से संभव होगा और यह ब्रिटेन में आय को तीन अरब पाउंड (3.9 अरब डॉलर) तक बढ़ा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रिटेन ने यूक्रेन पर भारत के तटस्थ रुख और दोनों युद्धरत देशों को शांतिपूर्ण और कूटनीतिक तरीके अपनाने के लिए राजी करने के प्रयासों की सराहना की है।
भविष्य में ब्रिटिश-भारत संबंध घनिष्ठ रक्षा संबंधों पर आधारित हो सकते हैं, जो प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और 'मेक इन इंडिया' पहल के उपयोग को प्राथमिकता देते हैं और यह रूस के साथ भारत के पुराने रक्षा संबंधों के बावजूद संभव है। हालांकि रूस के यूक्रेन पर आक्रमण करने के बाद से ब्रिटेन भारत को मास्को पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए मनाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन भारत ने हमेशा ब्रिटेन को यह समझाने का प्रयास किया है कि रूस के साथ घनिष्ठ संबंधों को अल्पकालिक लाभ के लिए छोड़ा नहीं जा सकता है।
ब्रिटिश विदेश मंत्री लिज ट्रस पिछले महीने रूस पर प्रतिबंध लगाने के लिए भारत को राजी करने और जॉनसन की यात्रा की तैयारियां करने के लिए भारत आई थीं। भारत ने बूचा नरसंहार की निंदा की, लेकिन रूस की आलोचना करने से परहेज किया। अन्य महत्वपूर्ण एजेंडा अफगानिस्तान में उथल-पुथल और ब्रिटेन के हिंद-प्रशांत झुकाव सहित क्षेत्रीय मामलों से संबंधित है, जिस पर आम सहमति बनाने के लिए इस यात्रा के दौरान दोनों पक्षों के बीच चर्चा होगी।
जॉनसन और मोदी पिछले साल उनके द्वारा हस्ताक्षरित समझौतों को आगे बढ़ाएंगे, जो यूके-भारत व्यापक रणनीतिक साझेदारी से संबंधित थे, जिसमें स्वास्थ्य, जलवायु, व्यापार, सुरक्षा और रक्षा में गहन द्विपक्षीय संबंधों के अलावा 53 करोड़ पाउंड के निवेश की घोषणा की गई है। याद रहे कि मोदी और जॉनसन ने नवंबर, 2021 में ग्लासगो में कॉप-26 जलवायु शिखर सम्मेलन के मौके पर व्यक्तिगत मुलाकात की थी, जब उनकी बातचीत भारत-यूके जलवायु साझेदारी के साथ-साथ 2030 के रोडमैप समीक्षा पर केंद्रित थी, जिस पर मई, 2021 में वर्चुअल शिखर सम्मेलन में उन्होंने हस्ताक्षर किए थे। उस रोडमैप का उद्देश्य 2030 तक भारत और ब्रिटेन के बीच द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करना है।