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पेशावर की साझा विरासत

मरिआना बाबर, वरिष्ठ पाकिस्तानी पत्रकार Updated Thu, 24 May 2018 06:41 PM IST
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सिख रिपोर्टर
इस हफ्ते पाकिस्तान में सिख समुदाय चर्चा में रहा, क्योंकि इस अल्पसंख्यक समुदाय के प्रति नए सिरे से सम्मान और समर्थन जताया गया है, खासतौर से ऐसे दौर में जब इस क्षेत्र में असहिष्णुता तेजी से फैलती जा रही है। दिलचस्प है कि सिख समुदाय से संबंधित दो घटनाक्रम इन दिनों चर्चा में हैं और ये दोनों खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के पेशावर से संबंधित हैं, जहां सदियों से सिख समुदाय रहता आया है और 1947 के विभाजन के बाद उनमें से अनेक परिवारों ने यहीं रहना पसंद किया था। 


अनुमान के मुताबिक पाकिस्तान में तकरीबन 20 हजार सिख रहते हैं, हालांकि वास्तविक आंकड़े के बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता, क्योंकि जनगणना में सिख धर्म को 'अन्य धर्मों' के साथ जोड़कर रखा गया। इसे अदालतों में चुनौती दी गई है। वैश्विक सिख समुदाय के विपरीत पाकिस्तान की सिख आबादी मुख्यतया पख्तून है और उत्तर-पश्चिम खैबर पख्तूनख्वा क्षेत्र और कबायली क्षेत्रों में बसती है। हाल ही में शुरू हुए हम न्यूज टेलीविजन चैनल ने ऐतिहासिक कदम उठाते हुए पाकिस्तान की पहली महिला सिख रिपोर्टर को नियुक्ति दी है। 


पेशावर की रहने वाली मनप्रीत कौर ने पेशावर यूनिवर्सिटी से सोशल साइंस में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। वह मानवाधिकार, स्थानीय समुदायों, अल्पसंख्यकों और एनजीओ से संबंधित मुद्दों को कवर करेंगी। पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के साथ होने वाले बर्ताव को लेकर मनप्रीत ने कहा,'प्रतिभाशाली लोगों के साथ सम्मान का व्यवहार किया जाता है, फिर वह किसी भी जाति, धर्म या समुदाय से संबंधित क्यों न हो। 


मैं एक पत्रकार के रूप में अपने देश की सेवा करना चाहती हूं और दुनिया को दिखाना चाहती हूं कि हम सिख महिलाएं भी प्रतिभाशाली होती हैं।' हालांकि पत्रकारिता उनका विषय नहीं था, लेकिन मनप्रीत कौर कहती हैं कि उनकी इसमें रुचि थी और जब मौका मिला तो उन्होंने इसे अपना लिया। कौर कहती हैं, हमारे देश (पाकिस्तान) में अधिकांश सिख लड़कियां औपचारिक शिक्षा के बाद घरेलू जीवन में व्यस्त हो जाती हैं। वह चाहती हैं कि उनके समुदाय की लड़कियों को भी चारदीवारी से बाहर निकलकर व्यावहारिक दुनिया में कदम रखना चाहिए। ऐसे बहुत से सामाजिक और सांस्कृतिक मुद्दे हैं, जिन्हें वह एक पत्रकार के नाते सामने लाना चाहती हैं, खासतौर से सिख समुदाय के उत्थान से संबंधित।


पेशावर स्थित जिन्ना कॉलेज फॉर वीमन से सामाजिक विज्ञान की पढ़ाई करने के बाद पत्रकार बनीं मनमीत बताती हैं कि पाकिस्तानी सिखों की साक्षारता दर बेहद कम है और अब वह अपने समुदाय की महिलाओं को प्रेरित करेंगी कि उन्हें खुद को शिक्षित करना चाहिए और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनना चाहिए। वह कहती हैं कि पाकिस्तान का समाज भी काफी बदल चुका है और बदल रहा है। उन्हें कभी महसूस नहीं होता कि उन्हें रिपोर्टिंग करते हुए बुर्का पहनने की जरूरत है। वह कहती हैं, 'हर कोई मेरा सम्मान करता है और वास्तव में मुझे मेरे समुदाय के बौद्धिक चेहरे के रूप में देखा जा रहा है।' मनमीत के पिता एक कारोबारी थे। वह बताती हैं कि अब वह और उनकी बहन जोकि एक बैंक में काम करती है, घर का खर्च चलाती हैं। उनका सपना है कि वह अमृतसर जाकर धार्मिक रिपोर्टिंग करें और इस क्षेत्र में स्थापित हों। 


पेशावर एक और वजह से चर्चा में रहा। वहां विभिन्न समुदायों के बीच सद्भाव की तब मिसाल नजर आई, जब सिख समुदाय ने प्रांतीय राजधानी में अनेक जगह इफ्तार का आयोजन किया और मुस्लिमों को भोजन कराया। मुस्लिम दुनिया में रमजान के महीने में सूर्योदय से लेकर दिन भर रोजा रखने के बाद सूर्यास्त होने पर कुछ खाया जाता है। पिछले वर्ष भी पेशावर के सिख समुदाय ने श्रमिकों और दुकानदारों के लिए इफ्तार का आयोजन किया था। सिख समुदाय स्थानीय धर्मादा संगठनों की मदद से इफ्तार का आयोजन करता है। युवा और बुजुर्ग लोगों के साथ ही सिख बच्चों तक को उत्साह के साथ मुस्लिम मेहमानों की खातिरदारी करते देखा जा सकता है।


सिख समुदाय के नेता बाबा गुरपाल सिंह कहते हैं, 'हमने पिछले साल रमजान में 29 दिनों तक पेशावर, मर्दन तथा अन्य जिलों के विभिन्न स्थानों पर इफ्तार दस्तरख्वान का आयोजन किया था।' पिछले वर्ष जिन जगहों पर इफ्तार का आयोजन किया गया था, उनमें अस्पताल, यतीमखाने, विकलांगों के स्कूलों और पेशावर की सेंट्रल जेल भी शामिल थीं। इस वर्ष सिख समुदाय ने जिन जगहो पर इफ्तार का आयोजन किया उनमें गुलबहार और लेडी रीडिंग हॉस्पिटल भी शामिल हैं। सिख समुदाय की इस सह्रदयता का व्यापक रूप से स्वागत किया गया है। पेशावर के पुराने शहर के रहने वाले इसानुल्लाह कहते हैं, 'यह शहर के लोगों के एक-दूसरे के प्रति प्रेम को प्रदर्शित करता है। सिख और मुस्लिम समुदाय बरसों से पेशावर में साथ-साथ रह रहे हैं।' वह याद करते हैं कि पेशावर के सुप्रसिद्ध वकील खुर्शीद खान ने सिख गुरुद्वारों में जाकर वहां आने वाले श्रद्धालुओं के जूते साफ कर दोनों समुदायों के बीच सद्भाव का प्रदर्शन किया था। 
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हालांकि यह भी सच है कि पाकिस्तानी वीजा हासिल करना आज भी काफी मुश्किल होता है। इसके बावजूद पिछले महीने हासन अब्दाल स्थित ननकाना साहब में बैसाखी उत्सव में शामिल होने के लिए सैकड़ों सिख तीर्थयात्री पाकिस्तान आए थे। ननकाना साहब के डिप्टी कमिश्नर मलिक अब्दुल वहीद और एवेक्यू ट्रस्ट प्रापर्टी बोर्ड के अधिकारियों ने खुद विशेष ट्रेन से यहां पहुंचे सिख तीर्थयात्रियों का स्वागत किया और उनके ठहरने का इंतजाम किया था। 


 पेशावर मुस्लिम और सिख समुदाय के बीच परस्पर सद्भाव की मिसाल बना हुआ है।  

 
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