रोहित वेमूला की याद फिर ताजा हो गई। मुंबई के नायर अस्पताल में तैनात डॉ पायल तड़वी ने 22 मई को फांसी लगाकर अपनी जान दे दी। चार साल पहले, केंद्रीय विश्वविद्यालय, हैदराबाद के होनहार छात्र रोहित वेमूला ने भी ऐसा ही किया था। दोनों ने ही मरने से पहले लिखे गए पत्रों में कहा कि अपने जन्म के कारण ही उन्हें अपनी जान से हाथ धोना पड़ रहा था। जिस जाति में उनका जन्म हुआ था, वह उनके उत्पीड़न और फिर उनकी मौत का सबब बनकर रही।
पायल तड़वी महाराष्ट्र के जलगांव जिले की मुस्लिम भील आदिवासी थी। उसका समुदाय बहुत ही छोटा –कुछ लाख लोगों का है। इनमें शिक्षा का बहुत अभाव है और वे दिहाड़ी का काम करके ही अपना पेट पालते हैं। पायल की मां, आबेदा जिला परिषद के कार्यालय में काम करती है। उसका बाप, सलीम, मजदूरी करता है और उसे महीने में कुछ ही दिनों के लिए काम मिलता है। पायल का बड़ा भाई विकलांग पैदा हुआ था। वह शुरू से पढ़ने में तेज थी और उसने तय कर लिया कि वह डॉक्टर बनेगी। अपने मां-बाप को उसने आश्वासन दिया कि वह जिंदगी भर अपने भाई का भी ध्यान रखेगी।