हमारे देश में तीन प्रकार की सड़कें हैं- पहली राष्ट्रीय राजमार्ग, दूसरी राज्य राजमार्ग और तीसरी अन्य सड़कें। अन्य सड़कों में वे संपर्क मार्ग भी शामिल हैं, जो गांवों को शहरों से जोड़ते हैं। शहरों और कस्बों के भीतर विभिन्न प्रकार की चौड़ाइयों और लंबाइयों की सड़कें भी होती हैं, जिनका नामकरण किसी नेता अथवा विख्यात व्यक्ति अथवा किसी देवी-देवता के नाम पर कर दिया जाता है। इन सड़कों के दोनों ओर पैदल चलने वाले यात्रियों के लिए फुटपाथ बनाए जाते हैं। इन फुटपाथों की ऊंचाई, चौड़ाई और मोटाई के लिए संभवतः कोई नियम नहीं है। अगर होगा भी तो, उसका पालन नहीं किया जाता।
फुटपाथ बनाने के लिए कहीं ईंट, कहीं पत्थर, कहीं कंकरीट के स्लीपर, तो कहीं घटिया सीमेंट, बालू आदि का प्रयोग किया जाता है। ऐसी अधिकतर सड़कों के एक ओर अथवा दोनों ओर गहरे नाले अथवा नालियां होती हैं। ऐसे अनेक नाले-नालियां अनेक स्थानों पर खुले होते हैं, जिनसे दुर्घटना की आशंका हमेशा बनी रहती है। अधिकांश शहरी और कस्बाई फुटपाथों पर स्थानीय दुकानदारों का अवैध कब्जा होता है। वे निर्भीकता से अपनी दुकानें फुटपाथों पर बनाते हैं।
इतना ही नहीं, मोटर साइकिल, साइकिल, स्कूटर, कार आदि ठीक करने वाले फुटपाथ के अलावा आधी-आधी सड़कें तक घेर लेते हैं। चाट बेचने वाले ज्यादातर खोमचे फुटपाथों पर लगते हैं। फल और सब्जी बेचने वाले भी धड़ल्ले से फुटपाथों पर दुकानें सजा लेते हैं। पान-बीड़ी-सिगरेट आदि बेचने वालों के ठेले फुटपाथों पर लगते हैं और उनके इर्द-गिर्द पीक और गंदगी बिखरी होती है। अनेक जगह फुटपाथों पर गोबर के उपले थापे और सुखाए जाते हैं। फुटपाथों पर अनेक लोग अस्थायी झोपड़ियां भी बना लेते हैं, जिनमें उनके परिवार रहते हैं। इसकी वजह से वहां कई बार दर्दनाक हादसे भी होते हैं। कई जगह फुटपाथों पर लोग हल्के वाहन चलाते भी देखे जा सकते हैं।
प्रश्न उठता है कि आखिर फुटपाथ खाली करवाने की जिम्मेदारी किसकी है। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि आखिर लोग फुटपाथ घेर क्यों लेते हैं? कहीं न कहीं सरकारी ढील तो जरूर है, जिस कारण लोग फुटपाथ का इस्तेमाल अपने उपयोग के लिए बेखौफ कर रहे हैं। फुटपाथों को खाली कराने के लिए यदि अधिकृत अधिकारियों से शिकायत की भी जाती है, तो उसका कोई फायदा नहीं होता। उलटे टका-सा जवाब दे दिया जाता है कि इसके लिए वे जिम्मेदार नहीं। एक अनुमान के अनुसार, देश में प्रत्येक वर्ष राष्ट्रीय राज्य मार्गों पर डेढ़ से दो लाख, राज्य राजमार्गों पर दो से ढाई लाख और अन्य सड़कों पर ढाई से तीन लाख हादसे होते हैं, जिनमें हजारों लोग मारे जाते हैं, जबकि सैकड़ों अपाहिज होते हैं।
बेशक खराब सड़कें, नशीले पदार्थों का सेवन करने वाले वाहन चालक और वे वाहन, जो सड़कों पर चलने योग्य नहीं होते, सड़क दुर्घटनाओं के लिए जिम्मेदार हैं। मगर यदि सड़कों के दोनों ओर फुटपाथ ठीक तरीके से बनाए जाएं, उनका रखरखाव बेहतर तरीके से हो और सिर्फ पैदल चलनेवालों के लिए ही वे सुरक्षित और संरक्षित रहें, तो क्या सड़कों पर होने वाली इन मौतों में कमी नहीं लाई जा सकती?