फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स

घाटे के बजट पर क्षुब्ध पाकिस्तान : इमरान सरकार से हो रहा मोहभंग

कुलदीप तलवार Published by: कुलदीप तलवार Updated Thu, 11 Jul 2019 06:33 AM IST
विज्ञापन
विज्ञापन
Imran Khan

पाकिस्तान की जनता का प्रधानमंत्री इमरान खान और उनकी सरकार से मोहभंग होता जा रहा है। सरकार कह रही है कि एक दो साल की मुश्किल सूरते हाल के बाद जनता खुशहाली का दौर देखेगी, एक करोड़ नौकरियां मिलेंगी और बेघरों को 50 लाख घर बनाकर दिए जाएंगे। पर इसके लिए कोई ठोस योजना नहीं लाई गई। जब तक वहां राजनीतिक अस्थिरता पैदा नहीं होती, तब तक बिगड़ती आर्थिक हालत में सुधार नहीं होगा।

आतंकी वित्तपोषण पर नजर रखने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था एफएटीएफ (फाइनेंशियल ऐक्शन टास्क फोर्स)  ने हाल ही में लश्कर, जैश और अन्य आतंकवादी समूहों का वित्तीय पोषण रोक पाने में विफल रहने पर पाकिस्तान को ग्रे सूची में रखने का फैसला किया है। साथ ही, पाकिस्तान को सितंबर, 2019 तक कार्य योजना को प्रभावी तरीके से लागू करने का समय दिया है।



अगर इस पर भी पाकिस्तान ठोस कदम नहीं उठाता, तो उस पर प्रतिबंध (काली सूची में डालने का) का डर बना रहेगा। काली सूची में डाले जाने पर पाक अर्थव्यवस्था को 10 अरब डॉलर का झटका लगेगा, विदेशी निवेश पर प्रतिकूल असर पड़ेगा और बीमा कंपनियां कारोबार के लिए ज्यादा प्रीमियम लेंगी, क्योंकि पाकिस्तान को ज्यादा जोखिम वाला बाजार माना जाएगा।

कर्ज के लिए पाकिस्तान जगह-जगह हाथ-पैर मार रहा है, पर उसे अब तक बड़ी कामयाबी नहीं मिली। अमेरिका की ओर से चेतावनी दी गई है कि इस बात का खास ध्यान रखा जाए कि पाकिस्तान को दिए जाने वाले छह अरब डॉलर के पैकेज का इस्तेमाल चीन के लिए न किया जाए। अमेरिका पहले ही पाकिस्तान को दी जाने वाली 13 करोड़ डॉलर की मदद रोक चुका है।

विज्ञापन

Imran Khan
पाकिस्तान की जनता का प्रधानमंत्री इमरान खान और उनकी सरकार से मोहभंग होता जा रहा है। सरकार कह रही है कि एक दो साल की मुश्किल सूरते हाल के बाद जनता खुशहाली का दौर देखेगी, एक करोड़ नौकरियां मिलेंगी और बेघरों को 50 लाख घर बनाकर दिए जाएंगे। पर इसके लिए कोई ठोस योजना नहीं लाई गई। जब तक वहां राजनीतिक अस्थिरता पैदा नहीं होती, तब तक बिगड़ती आर्थिक हालत में सुधार नहीं होगा।

आतंकी वित्तपोषण पर नजर रखने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था एफएटीएफ (फाइनेंशियल ऐक्शन टास्क फोर्स)  ने हाल ही में लश्कर, जैश और अन्य आतंकवादी समूहों का वित्तीय पोषण रोक पाने में विफल रहने पर पाकिस्तान को ग्रे सूची में रखने का फैसला किया है। साथ ही, पाकिस्तान को सितंबर, 2019 तक कार्य योजना को प्रभावी तरीके से लागू करने का समय दिया है।

अगर इस पर भी पाकिस्तान ठोस कदम नहीं उठाता, तो उस पर प्रतिबंध (काली सूची में डालने का) का डर बना रहेगा। काली सूची में डाले जाने पर पाक अर्थव्यवस्था को 10 अरब डॉलर का झटका लगेगा, विदेशी निवेश पर प्रतिकूल असर पड़ेगा और बीमा कंपनियां कारोबार के लिए ज्यादा प्रीमियम लेंगी, क्योंकि पाकिस्तान को ज्यादा जोखिम वाला बाजार माना जाएगा।

कर्ज के लिए पाकिस्तान जगह-जगह हाथ-पैर मार रहा है, पर उसे अब तक बड़ी कामयाबी नहीं मिली। अमेरिका की ओर से चेतावनी दी गई है कि इस बात का खास ध्यान रखा जाए कि पाकिस्तान को दिए जाने वाले छह अरब डॉलर के पैकेज का इस्तेमाल चीन के लिए न किया जाए। अमेरिका पहले ही पाकिस्तान को दी जाने वाली 13 करोड़ डॉलर की मदद रोक चुका है।

इधर एशियाई विकास बैंक ने पाकिस्तान की उस घोषणा से खुद को अलग कर लिया है, जिसमें कहा गया है कि उसे इस बैंक से 3.4 अरब डॉलर का कर्ज मंजूर हो गया है। पाकिस्तान के लिए यह शर्मनाक है। एक तरफ कर्ज देने वाली विदेशी संस्थाओं व बैंकों से कर्ज मिलने में बाधाएं आ रही हैं, वहीं उस पर डिफॉल्टर होने का खतरा बढ़ता जा रहा है। 

उस पर 12 महीनों में 700 अरब के फंड की व्यवस्था करने का दबाव है। जबकि न केवल उसका राजस्व घाटा आसमान छू रहा है, बल्कि भुगतान संतुलन भी पटरी से उतर गया है। उसके आयात और निर्यात का अंतर बढ़कर 18.2 अरब डॉलर हो गया है, जो 2015 में मात्र 2.7 अरब डॉलर था।

सरकार ने बजट से पहले एक आर्थिक सर्वे जारी किया, जो मायूस करने वाला है और इस पर सरकार का रवैया भी निराशाजनक है। सरकार ने नेशनल असेंबली में विगत 11 जून को 70 खरब से ज्यादा का सालाना माली बजट पेश किया था, जिसमें 35 खरब का घाटा है और जो पाक की गरीब जनता ही भरेगी। विपक्ष के भारी विरोध के बावजूद इस अवाम-विरोधी बजट को संसद ने मंजूर कर दिया है और इस पर जनता में रोष पनप रहा है। 

वहां के अखबार जसारत ने लिखा है कि बेहतर होगा कि इमरान खान पिछली सरकारों का रोना रोने के बजाय अपनी सरकार की एक साल की उपलब्धियों के बारे में जनता को बताएं। अगर पिछली सरकारों ने देश को लूटा है, तो उस रकम को वापस लाने के लिए इमरान खान ने अब तक कौन-सा तीर मारा है? 

इमरान खान को स्वीकार करना चाहिए कि उनकी सरकार पाक के इतिहास की सबसे विफल सरकार है, जिसका खमियाजा कौम को भुगतना पड़ रहा है। अगर हालात में सुधार न आया तो पाकिस्तान का नाम नाकाम देशों की सूची में शामिल होने की आशंका बढ़ जाएगी। देखना है कि अगले कुछ दिनों में पाक के हालात क्या शक्ल अख्तियार करते हैं।
और पढ़ें...
विज्ञापन
विज्ञापन
Next