फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

भारत के खिलाफ पाक का मनोवैज्ञानिक युद्ध

Tue, 30 Aug 2016 07:22 PM IST
शिवदान सिंह
विज्ञापन
शिवदान सिंह
विज्ञापन
आतंकवाद को और ज्यादा प्रभावी तथा सफल बनाने के लिए आतंकवाद संचालित करने वाला देश प्रोपेगेंडा तथा मनोवैज्ञानिक युद्ध का भी इस्तेमाल करता है और यही सब हमारा पड़ोसी देश पाकिस्तान लंबे समय से भारत के विरुद्ध कर रहा है। जैसा कि पूरा विश्व जानता है, वर्ष 1971 के बांग्लादेश युद्ध में करारी हार मिलने के बाद पाकिस्तान ने भारत से बदला लेने के लिए पहले पंजाब में खालिस्तान के नाम पर आतंकवाद का बीज रोपने तथा सांप्रदायिक फूट डालने की कोशिश की और जब उसमें सफल नहीं हुआ, तो उसने अपना ध्यान जम्मू-कश्मीर पर केंद्रित कर लिया।
विज्ञापन


आतंकी बुरहान वानी की मौत पर हुआ प्रदर्शन पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा का ही एक उदाहरण है, जिसके कारण घाटी में तनाव बढ़ गया और वहां कर्फ्यू लगाना पड़ा। कूटनीतिक, आर्थिक तथा सेना के द्वारा लड़े जाने वाले युद्ध से भी ज्यादा प्रभावी प्रोपेगेंडा तथा मनोवैज्ञानिक युद्ध साबित होता है। इसका ताजा उदाहरण सीरिया और इराक में देखा जा सकता है, जहां इस्लामिक स्टेट ने दुनिया भर से लड़ाके इकट्ठा करके बड़े भूभाग पर कब्जा कर रखा है।

यह ऐसा युद्ध है, जिसमें लक्षित क्षेत्र की जनता के मन-मस्तिष्क का क्रमबद्ध ढंग से इस प्रकार प्रबंधन किया जाता है कि वे प्रोपेगेंडा करने वालों की बातों को सत्य तथा हितकारी मानकर अपनी विचारधारा उसके अनुकूल बना लें। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई जैश-ए मोहम्मद, लश्करे तैयबा और जमात-उद-दावा जैसे आतंकी संगठनों के सरगनाओं-महमूद अजहर, हाफिज सईद और सैयद सलाहुद्दीन के साथ मिलकर कश्मीर में यही करने की कोशिश कर रही है।
विज्ञापन


मनोवैज्ञानिक युद्ध का मुख्य उद्देश्य संबंधित क्षेत्र के लोगों की विचारधारा को बदलना होता है, परंतु इसके लिए पहले लोगों के नैतिक मूल्यों तथा विश्वास को बदलना होता है। विचारधारा इन्हीं से बनती है। कश्मीर में पाक प्रोपेगेंडा का मुख्य केंद् कट्टरपंथी इस्लामी एजेंडा होता है। इसलिए हाफिज सईद जैसे कट्टरपंथी 'इस्लाम खतरे में है' का नारा लगाकर कश्मीरी युवाओं को भारत विरोधी बनाने की कोशिश कर रहे हैं। रूसी सेनाओं द्वारा अफगानिस्तान पर कब्जे के विरोध में अमेरिका की सीआईए ने पाकिस्तान को अपना मुख्य अड्डा बनाकर आईएसआई को प्रोपेगेंडा युद्ध में पूरी तरह आधुनिक तकनीक के अनुसार तैयार किया। 80 के दशक में रूसी सेना अफगानिस्तान छोड़कर चली गई। पर आईएसआई ने भारत के विरुद्ध वही गतिविधि शुरू कर दी।

पाकिस्तानी सेना की इंटर सर्विसेज पब्लिक रिलेशन मीडिया का प्रबंधन करती है और आईएसआई अपने आतंकियों द्वारा मीडिया में किए गए प्रोपेगेंडा को जमीन पर असल रूप देती है। वर्ष 1989-90 में कश्मीर में भारत विरोधी माहौल बनाने के लिए उसने विश्व में जगह-जगह सरकार विरोधी विद्रोही की तस्वीर सैटेलाइट टीवी के जरिये दिखानी शुरू की थी। डर का माहौल कायम करने के लिए कश्मीर के प्रमुख राजनीतिक तथा धार्मिक नेताओं की हत्या तक की गई। बुरहान बानी ने स्वयं दो संरपचों की सरेआम हत्या की थी।

आईएसआई ने भारत विरोधी प्रदर्शनों तथा मुहिम चलाने के लिए ओवर ग्राउंड एजेंट भी तैयार किए हुए हैं। इनकी गतिविधियों को चलाने के लिए आईएसआई हवाला के जरिये बड़ी धनराशि भेज रही है। हाल ही में प्रकाश में आया कि घाटी में पत्थरबाजी के लिए आईएसआई ने 60 करोड़ रुपये भेजे थे। पाकिस्तानी दुष्प्रचार का संज्ञान लेकर उसका माकूल जवाब देने की जरूरत है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें