पाकिस्तान फिलहाल भारी आर्थिक संकट से जूझ रहा है और नकदी की कमी के कारण उसे भुगतान संकट का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) पाकिस्तान को सात अरब डॉलर कर्ज के तौर पर देने पर विचार कर रहा है। लेकिन कर्ज को लेकर आईएमएफ की कुछ कठिन शर्तें भी हैं, जो पाकिस्तान को पूरी करनी होंगी। जैसे कि पाकिस्तान को कर (टैक्स) आधार व्यापक बनाने के अलावा राजकोषीय और मौद्रिक नीति को मजबूत करने, राज्य स्वामित्व वाले उद्योगों के प्रबंधन में सुधार, प्रतिस्पर्धा को मजबूत करने के लिए निवेश खातिर सुरक्षित व्यवस्था करने आदि की शर्तों को पूरा करना होगा।
फिलहाल आईएमएफ ने पाकिस्तान को तीन साल का एक पैकेज आर्थिक समस्याओं से निपटने के लिए दिया है, जिससे उसे काफी हद तक आर्थिक संकट से निपटने में मदद मिलेगी। यह मदद 2023 'स्टैंड बाय अरेंजमेंट' के तहत दी गई है। इस तरह की मदद आईएमएफ भुगतान संकट का सामना कर रहे अपने सदस्य देशों को देता है।
इधर पाकिस्तान ने अपने सालाना बजट में कुछ ऐसे प्रावधान किए हैं, जिससे उसे टैक्स से आय में बढ़ोतरी की उम्मीद है। काबिले गौर है कि पाकिस्तान अब चौदहवीं बार आईएमएफ के सामने कर्ज के लिए हाथ फैलाने जाएगा। पाकिस्तान में पहली बार 1958 में अयूब खान की फौजी सरकार आईएमएफ के पास कर्ज मांगने गई थी और उसने कर्ज हासिल किया था। आईएमएफ के कहने पर अब गैस, बिजली और बुनियादी जरूरतों की चीजों के रेट तय किए जा रहे हैं।
आईएमएफ ने नए कर देने वालों की संख्या 30 लाख से बढ़ाकर 60 लाख करने के लिए कहा है। सेल टैक्स में भी बढ़ोतरी का प्रावधान है। खेती के लिए बीज, खाद, ट्रैक्टर पर पूरा सेल टैक्स लगाने की बात की गई है। निस्संदेह नए टैक्स मुल्क में महंगाई में बढ़ोतरी करेंगे, इससे पाकिस्तान में रोष देखा जा रहा है। सरकार ने आयकर अदा करने वालों की श्रेणी कम करके चार कर दी है। इससे उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। पाकिस्तान के लिए आईएमएफ की शर्तों पर अमल करना एक बहुत बड़ी चुनौती है।
पाकिस्तान के बजट के बारे में न सिर्फ पाकिस्तानी आवाम, बल्कि वहां के राष्ट्रपति आसिफ जरदारी ने भी यह आरोप लगाया है कि आईएमएफ से कर्ज लेकर अावाम का इम्तिहान लिया जा रहा है। हम सरकार बनाना ही नहीं, गिराना भी जानते हैं। जाहिर है, राष्ट्रपति आईएमएफ से कर्ज लेने के हक में नजर नहीं आते। शरीफ सरकार के वित्त मंत्री मोहम्मद औरंगजेब ने खुद स्वीकार किया है कि बजट में लगाए गए कर से लोग तनाव में हैं। उनके राजस्व प्रस्ताव की सबने आलोचना की थी।
हाल ही में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ जून में अपने कुछ मंत्रियों व सहयोगियों के साथ चीन गए थे। इस शिष्टमंडल में सेना प्रमुख जनरल आसिफ मुनीर भी शामिल थे। उनका मकसद चीन से माली मदद हासिल करना था। इससे पहले कि वे चीन से माली मदद मांगें, चीन ने पाकिस्तान से ताईवान, शिनजियांग, शिझांग, हांगकांग और दक्षिण सागर पर समर्थन की मांग की।
पाकिस्तान चाहता था कि चीन उसके मुल्क में नई परियोजना में 46 अरब डॉलर का निवेश करे, लेकिन चीन ने केवल 25 अरब डॉलर के निवेश की पुरानी योजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए स्वीकृति दी। पुरानी योजनाओं में सबसे प्रमुख बेल्ट ऐंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) की परियोजना है। इनमें ज्यादातर चीन के ही इंजीनियर और मजदूर काम रहे हैं और स्थानीय लोग गवादर एरिया में बलूची मजदूरों पर बराबर जानलेवा हमले करते रहते हैं। इसलिए चीन पाकिस्तान से उनकी सुरक्षा करने का भरोसा चाहता है। शहबाज शरीफ ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से भी मुलाकात की और आपसी रिश्तों को और मजबूत करने का संकल्प लिया।
पाकिस्तान के आर्थिक संकट का अंत होता नहीं दिखता। अब देखना यह है कि अगले कुछ दिनों में पाकिस्तान में हालात क्या शक्ल अख्तियार करते हैं!