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अर्थव्यवस्था: किसानों की आमदनी बढ़ाने वाला हो बजट… कृषि समृद्धि के एक नए युग की शुरुआत का मौका

सार

कल आ रहे वर्ष 2024-25 के बजट में पीएम किसान सम्मान निधि जैसी प्रत्यक्ष आय सहायता वाली योजनाओं के लिए आवंटन बढ़ना चाहिए।  
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गांवों से मिल रही भारत की अर्थव्यवस्था को दिशा (सांकेतिक फोटो) - फोटो : एएनआई


कृषि क्षेत्र की प्रगति भारत की नब्ज तय करती है। मंगलवार को 2024-25 का बजट आ रहा है, लेकिन यह स्वीकार करना और महत्वपूर्ण हो जाता है कि कृषि का योगदान देश के आर्थिक और सामाजिक ढांचे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। एक तरफ एमएसपी बढ़ोतरी और फसल बीमा योजनाओं, जैसी हालिया पहलों ने आशा की किरणें जगाई हैं, दूसरी तरफ भारतीय कृषि को प्रभावित करने वाली चुनौतियां जैसे-बढ़ती लागत, अस्थिर बाजार कीमतें, कर्ज के नीचे दबता किसान, जलवायु परिवर्तन और सीमित बुनियादी ढांचा नए सिरे से ध्यान केंद्रित करने और नवीन समाधानों की मांग करती हैं। यह बजट नई जमीन तैयार करने और अधिक मजबूत, टिकाऊ और समावेशी कृषि परिदृश्य विकसित करने का एक महत्वपूर्ण अवसर प्रस्तुत कर सकता है। किसान देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं।


बीज, उर्वरक, बिजली और पानी आदि पर भारी सब्सिडी देने के बावजूद कई किसान संकट में हैं। बढ़ती कृषि लागत के बीच भारतीय किसानों को गंभीर ऋण संकट का सामना करना पड़ता है, औसत घरेलू ऋण सात लाख रुपये से अधिक है। कर्ज और आर्थिक संकट के बोझ तले दबे किसान आत्महत्या करने को मजबूर हैं। एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2022 में 6,083 कृषि मजदरों ने खुदकुशी की। देश की औसत प्रति व्यक्ति आय 12,500 है, किसानों की इससे भी कम।


बजट में किसानों की आय बढ़ाने वाली नीतियों को बढ़ावा मिले। पीएम किसान सम्मान निधि जैसी प्रत्यक्ष आय सहायता वाली योजनाओं के लिए आवंटन बढ़ाना, समय पर व कुशल संवितरण सुनिश्चित करते हुए बहुत जरूरी वित्तीय स्थिरता प्रदान कर सकता है। किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य देने के लिए प्रत्येक फसल की घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद सुनिश्चित करने के लिए बजट में विशेष प्रावधान किया जाए।


ऋण राहत योजनाओं, सब्सिडी ऋण या फसल बीमा कार्यक्रमों के लिए ज्यादा धनराशि का प्रावधान जरूरी है। आर्थिक सर्वेक्षण 2022-23 के अनुसार, भारत के केवल 47 फीसदी शुद्ध बोए गए क्षेत्र में सुनिश्चित सिंचाई तक पहुंच है और अपर्याप्त भंडारण के कारण फसल के बाद के नुकसान का अनुमान 10-25 फीसदी है। बजट में सड़क नेटवर्क और कोल्ड स्टोरेज सुविधाओं के निर्माण और उन्नयन के लिए पर्याप्त धनराशि आवंटित की जानी चाहिए। ग्रामीण विद्युतीकरण में निवेश और सूचना प्रौद्योगिकी तक बेहतर पहुंच डिजिटल विभाजन को पाट सकती है। ग्रामीण स्वास्थ्य सुविधाओं, स्वच्छता और बुनियादी ढांचे का विस्तार महत्वपूर्ण है।


बजट में कृषि शिक्षा और कौशल विकास कार्यक्रमों में निवेश को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। समर्पित कृषि विश्वविद्यालयों की स्थापना और मौजूदा संस्थानों को आधुनिक, व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रम पेश करने के लिए प्रोत्साहित करना मौजूदा कौशल अंतर को पाट सकता है। कृषि उद्यमिता और एग्रीटेक स्टार्टअप को बढ़ावा देना नवाचार को बढ़ावा दे सकता है और युवाओं के लिए नए अवसर पैदा कर सकता है। उन्नत बीजों, सूखा प्रतिरोधी फसलों और टिकाऊ कृषि पद्धतियों के लिए अनुसंधान में निवेश बढ़ाने से कृषि उत्पादकता और आय को बढ़ावा मिल सकता है।


मजबूत निर्यात बुनियादी ढांचे का निर्माण और अनुकूल व्यापार समझौतों पर बातचीत से भारतीय कृषि उपज के लिए नए बाजार खुल सकते हैं, आर्थिक विकास को बढ़ावा मिल सकता है और नौकरियां पैदा हो सकती हैं। कृषि में महिलाओं के महत्वपूर्ण योगदान को स्वीकार करते हुए, उन्हें सशक्त बनाने के लिए बजट में महिला-विशिष्ट कार्यक्रमों और पहलों को बढ़ावा देना चाहिए।
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कृषि को पुनर्जीवित करने के लिए बहुआयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता है। कृषि बजट में राशि बढ़ाने के साथ ही आवंटित राशि का सफल और पूर्ण क्रियान्वन सुनिश्चित करना भी आवश्यक है। इस बजट को एक अकेली घटना के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि एक संपन्न, टिकाऊ और समावेशी कृषि पारिस्थितिकी तंत्र के दीर्घकालिक दृष्टिकोण की दिशा में एक कदम के रूप में देखा जाना चाहिए। पर्यावरण संरक्षण, किसान सशक्तीकरण, बुनियादी ढांचे के विकास, शिक्षा और मूल्य संवर्धन में निवेश को प्राथमिकता देकर, हम एक ऐसे भविष्य का निर्माण कर सकते हैं, जहां हमारे किसान समृद्ध हों, खाद्य सुरक्षा की गारंटी हो और हमारे ग्रामीण समुदाय समृद्ध हों। आगामी बजट भारत में कृषि समृद्धि के एक नए युग के लिए उपजाऊ जमीन बोने वाला बीज बने।            
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