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आईएमएफ की शरण में पाकिस्तान

मरिआना बाबर Updated Thu, 11 Oct 2018 06:23 PM IST
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पाकिस्तानी मुद्रा

यह बिल्कुल कयामत का मंजर था, क्योंकि इस हफ्ते लोगों ने जागने के तुरंत बाद मुद्रा बाजार में अफरातफरी और अर्थव्यवस्था को ध्वस्त होते देखा। मुल्क के सबसे बड़े शेयर बाजार (कराची शेयर बाजार) ने सूचकांक में 1,382 अंकों की गिरावट देखी। शेयर दलाल दहशत में आ गए, क्योंकि यह कुल मिलाकर 238 अरब रुपये का भारी नुकसान था। रुपये में भी रिकॉर्ड स्तर पर गिरावट आई, क्योंकि बाजार में भारी उथल-पुथल देखी गई। खुले बाजार में एक अमेरिकी डॉलर की कीमत 137 रुपये हो गई।


 

यहां तक कि पाकिस्तान स्टेट बैंक ने सूत्रों को बताया कि गिरते रुपये को संभालने के लिए वे कुछ नहीं कर सकते। ऐसा लगता है कि किसी ने प्रधानमंत्री इमरान खान को इस बारे में सूचित नहीं किया था, क्योंकि वह उस समय लोगों को यह बताने में व्यस्त थे कि मुल्क को साफ रखना और ज्यादा शौचालय बनवाना कितना महत्वपूर्ण है, विदेशी पर्यटकों के पाकिस्तान न आने का यह एक कारण है। जब प्रधानमंत्री के सामने वास्तविक और बीमार अर्थव्यवस्था की रिपोर्ट रखी गई, तब वह अर्थव्यवस्था को संभालने में असमर्थ अपने वित्त मंत्री के नतीजे से अचंभित थे और तुरंत उन्होंने अपने मीडिया सेल की उच्च स्तरीय बैठक बुलाई, ताकि घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में जो खबरें चल रही थीं, उनसे होने वाले नुकसान पर नियंत्रण किया जा सके। अचानक एलान किया गया कि पाकिस्तान तहरीक-ए इंसाफ (पीटीआई) सरकार राहत पैकेज के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से गुहार लगाएगी। सरकार पहले इस राहत पैकेज से बच रही थी, क्योंकि आईएमएफ की शर्तें सख्त थीं।


पीटीआई सरकार ने पहले ही रसोई गैस, बिजली और सीएनजी की कीमत बढ़ा दी थी। इसके साथ डॉलर की कीमतों में लगातार वृद्धि बाजार में कीमतों पर प्रभाव डाल रही थी। केंद्रीय सूचना मंत्री फवाद चौधरी ने माना है कि पाकिस्तान ने अरबों डॉलर के राहत पैकेज के लिए चीन और सऊदी अरब से संपर्क किया था, लेकिन इन कर्जों की शर्तें नई सरकार को स्वीकार नहीं थीं। जब सारे दरवाजे बंद हो गए, तब सरकार ने आईएमएफ से गुहार लगाने का फैसला किया। यह जानने के बावजूद, कि आईएमएफ के अलावा और कोई विकल्प नहीं है, फैसला लेने में देरी करके इमरान खान ने अर्थव्यवस्था का जो नुकसान किया है, उसकी भरपाई होने में काफी लंबा समय लगेगा।


अगर यह आर्थिक संकट नहीं होता, तो सरकार अब भी  इंतजार कर रही होती। आईएमएफ से कर्ज हालांकि पहले भी शर्तों पर मिला है, लेकिन इस बार अमेरिका ने पाकिस्तान को चेतावनी दी है कि आईएमएफ से मिले कर्ज की राशि चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे का कर्ज चुकाने में खर्च न किया जाए। आईएमएफ में अमेरिका का वर्चस्व है और उसकी सहमति के बिना वह पाकिस्तान को कोई राहत नहीं दे सकता।


केंद्रीय राजस्व राज्य मंत्री ने एक समझदार सुझाव दिया कि सरकार को आईएमएफ द्वारा प्रस्तावित राहत पैकेज का उपयोग बहुत दिनों से लंबित संरचनात्मक सुधार के लिए करना चाहिए। दूसरा विवादित फैसला सरकार ने तब लिया, जब आर्थिक मामलों के लिए एक नए प्रवक्ता की नियुक्ति की घोषणा की। तुरंत ही सोशल मीडिया इस नई नियुक्ति की आलोचनाओं से भर गया।

 

द डॉन ने अपने संपादकीय में लिखा, 'इसका संकेत मंगलवार की रात को तभी आया, जब आर्थिक मामलों के एक नए प्रवक्ता की नियुक्ति की खबरें आईं, यह नए प्रवक्ता तथ्यों के बजाय दृष्टि विज्ञान (ऑप्टिक्स) पर ध्यान केंद्रित करने के लिए जाने जाते हैं।' विशेषज्ञों ने भी सरकार के इस फैसले की आलोचना की है। वरिष्ठ अर्थशास्त्री डॉ इकराम उल हक कहते हैं, 'सरकार ने कुछ चिंताजनक क्षेत्रों को छुआ भर है। पार्टी इन वेटिंग के रूप में पीटीआई ठोस नीति तैयार करने और आर्थिक चुनौतियों को संभालने के लिए योजना बनाने में नाकाम रही है।' 


इससे पहले प्रधानमंत्री ने कहा था कि मुल्क की आर्थिक समस्याएं इतिहास में सबसे ज्यादा दबाव में हैं। उन्होंने अपने फेडरल बोर्ड ऑफ रेवेन्यू को बदलने तथा विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए प्रोत्साहन देने का वायदा किया था। पाकिस्तान के चालू खाते का घाटा पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 40 फीसदी से ज्यादा बढ़कर 18 अरब डॉलर हो गया है। प्रधानमंत्री ने कहा है कि पाकिस्तान के इतिहास में मुल्क की आर्थिक स्थिति कभी इतनी बदतर नहीं थी, जितनी आज है। प्रधानमंत्री पद की शपथ लेते वक्त इमरान खान ने कल्पना भी नहीं की होगी कि अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना कितना मुश्किल होगा।
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उन्होंने विशाल प्रधानमंत्री आवास में रहने से इन्कार कर दिया, जहां सभी पूर्व प्रधानमंत्री रहते थे। इसके बजाय उन्होंने उसे विश्वविद्यालय में तब्दील करने का आदेश दिया। खर्च घटाने के लिए वह, उनकी पत्नी और कुत्ते सैन्य विशेषज्ञ के बंगले में रहने चले गए। मुल्क के सभी गवर्नर हाउस को खाली करा दिया गया है और हर रविवार जनता उन्हें देखने आती है। इन्हें पर्यटकों के लिए रिसॉर्ट के रूप में तब्दील करने की योजना है। प्रधानमंत्री आवास में पांच सौ से ज्यादा कर्मचारी थे, जो घटकर अब मात्र पांच रह गए हैं। अस्सी कारें थीं, जिनमें से 33 बुलेट प्रूफ कारों की नीलामी की गई। प्रधानमंत्री आवास में नवाज शरीफ ने जो भैंसें पाल रखी थीं, उन्हें भी नीलाम कर दिया गया।


राजनीतिक मोर्चे पर पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री शहबाज शरीफ (नवाज शरीफ के भाई) को गिरफ्तार कर लिया गया है और भ्रष्टाचार के आरोपों में उन्हें सलाखों के पीछे रखा गया है। इसने कई लोगों को नाराज कर दिया है, जो कहते हैं कि यह बदला लेने का समय नहीं है, खासकर तब, जब चुनाव नजदीक हैं, और इससे उन्हें प्रचार करने का मौका नहीं मिलेगा। अब उनके बेटे भी सरकार के निशाने पर हैं। 

राजनीतिक विश्लेषक जाहिद हुसैन कहते हैं कि वित्तीय संकट और घरेलू चुनौतियों की विशालता को देखते हुए सरकार को स्थिरता की आवश्यकता है। वह कहते हैं, राजनीतिक टकराव से परहेज करना इस अल्पमत की सरकार के हित में है, जिसका अस्तित्व विभिन्न राजनीतिक समूहों के समर्थन पर निर्भर है। 

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