पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के विदेशी मामलों के विशेष सहायक तारिक फतेमी की मौजूदा वाशिंगटन यात्रा नवाज शरीफ और अमेरिका के नव निर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हाल ही में हुई टेलीफोन पर बातचीत से हफ्तों पहले आयोजित की गई थी। हालांकि तारिक फतेमी जब वाशिंगटन पहुंचे, तो वह ओबामा की टीम के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों तथा कुछ ऐसे सांसदों से मिले, जो अभी सेवा में रहेंगे। ऐसी उम्मीद थी कि फतेमी ट्रंप की टीम के अधिकारियों से भी मिलेंगे, हालांकि ऐसा अब तक नहीं हो पाया है। पाकिस्तानी मीडिया में इसे लेकर आलोचना हो रही है कि क्या तारिक फतेमी यह सुनिश्चित करने के लिए वहां टिके हुए हैं कि अगले महीने ट्रंप के शपथ ग्रहण समारोह का निमंत्रण नवाज शरीफ को दिया जाता है या नहीं!
अब तक अमेरिका की तरफ से विदेश विभाग के उप प्रवक्ता मार्क टोनर की मात्र एक टिप्पणी सामने आई है, जिसमें उन्होंने कहा कि अमेरिकी अधिकारियों ने फतेमी के साथ विभिन्न द्विपक्षीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर बातचीत की, जिसमें 'क्षेत्रीय स्थिरता' और 'आतंकवाद विरोधी सहयोग' भी शामिल है। पाकिस्तानी दूतावास के एक अधिकारी ने बताया कि फतेमी ट्रंप की टीम के साथ टेलीफोन पर बात करने में भी काफी सक्रिय हैं। जब उनसे यह पूछा गया कि लगभग एक हफ्ते से अमेरिका में रहने के बावजूद फतेमी अब तक ट्रंप की टीम के अधिकारियों से क्यों नहीं मिल पाए हैं, तो उन्होंने कहा कि हम संभवतः उन्हें प्रभावित करने की स्थिति में पहुंच रहे हैं। हम ऐसे व्यक्ति से मिलने की कोशिश में हैं, जिनका प्रभाव है और जो बदलाव की प्रक्रिया में कोई योगदान दे सके।
ओवल ऑफिस में कदम रखने से पहले ही पाकिस्तान में ट्रंप को लेकर एक लहर है। इस्लामाबाद का कहना है कि वह जम्मू-कश्मीर समेत भारत-पाकिस्तान के बीच तमाम लंबित मुद्दों को सुलझाने में ट्रंप की भूमिका निभाने की इच्छा का स्वागत करता है। अतीत में दुनिया का कोई दूसरा नेता इतना साहसी और आश्वस्त नहीं दिखा, जिसने सार्वजनिक रूप से ऐसी भूमिका निभाने की पेशकश की हो, ज्यादातर नेताओं का यही कहना था कि अगर भारत और पाकिस्तान, दोनों ऐसा चाहेंगे, तभी वे मदद कर सकते हैं। नई दिल्ली ने तीसरे पक्ष की सहायता के प्रति अपनी अनिच्छा को कभी नहीं छिपाया।
ओबामा प्रशासन के मुकाबले ट्रंप प्रशासन को लेकर पाकिस्तान में इतनी ज्यादा उम्मीदें होने की वजह दो घटनाएं हैं। एक तो ट्रंप के राष्ट्रपति निर्वाचित होने के बाद नवाज शरीफ की उनके साथ टेलीफोन पर की गई बातचीत है, जो सामान्य रूप से बेहद अनौपचारिक थी। दूसरा अमेरिकी उप-राष्ट्रपति चुने गए माइक पेंस का पाकिस्तान पर इंटरव्यू था।
ट्रंप को बधाई देने के लिए किए गए फोन कॉल का पाठ जब पहली बार शरीफ के कार्यालय द्वारा जारी किया गया, तो हर किसी ने समझा कि यह झूठा है। ऐसा मूलतः ट्रंप द्वारा पाकिस्तान और शरीफ के लिए इस्तेमाल की गई भाषा के कारण हुआ। जब तक ट्रंप की टीम ने इसकी पुष्टि नहीं की, तब तक किसी को इस पर यकीन नहीं हुआ। प्रोटोकॉल के अनुसार, आम तौर पर वैश्विक नेता फोन पर बेहद संयमित भाषा का प्रयोग करते हैं, पर ट्रंप के मामले में ऐसा नहीं था। खासकर जब उन्होंने कहा कि वह पाकिस्तान के समक्ष उपस्थित समस्याओं का समाधान ढूंढने में भूमिका निभाएंगे। पाकिस्तान ने इसका यह मतलब निकाला कि वह कश्मीर मुद्दे के समाधान में भूमिका निभाएंगे।
वाशिंगटन में जब फातेमी से इस बारे में पूछा गया, तो उनका जवाब था, निर्वाचित राष्ट्रपति इसी भाषा का प्रयोग करते हैं। और यह एक बहुत ही ईमानदार बयान है, जिसे हमने उनके कार्यालय से मंजूरी के बाद जारी किया है। और अगर इससे दिलचस्पी और उत्साह पैदा हुआ है, तो हमारे निराश होने की कोई वजह नहीं है। शरीफ द्वारा पाकिस्तान आने का न्योता दिए जाने पर ट्रंप ने कहा कि 'वह शानदार लोगों के शानदार देश में आना पसंद करेंगे। कृपया पाकिस्तान के लोगों को बता दीजिए कि वे अद्भुत हैं और मैं जितने पाकिस्तानियों को जानता हूं, वे अनूठे लोग हैं।'
सवाल यह है कि जब ट्रंप अपना कार्यभार संभालेंगे और भू-रणनीतिक राजनीति की वास्तविकताएं और जटिलताएं उनके सामने आएंगी, तो क्या उन्हें ये शब्द याद रहेंगे? बराक ओबामा ने भी अपने पहले कार्यकाल के चुनाव प्रचार के दौरान कश्मीर मुद्दे को सुलझाने के प्रति उत्साह का इजहार किया था। पर वह इस मुद्दे से परहेज करते रहे। इस बीच उन्होंने भारत के साथ द्विपक्षीय रिश्ते को नई ऊंचाई पर पहुंचाया।
पाकिस्तानियों की दिलचस्पी पेंस के इंटरव्यू में थी, जिसमें उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शरीफ के साथ बातचीत का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों परमाणु शक्ति संपन्न देशों के साथ लगातार बातचीत जरूरी है। पेंस ने कहा कि हम शांति और सुरक्षा बढ़ाने के लिए दोनों देशों से बातचीत का इरादा रखते हैं। उन्होंने आगे यह भी कहा कि ट्रंप दुनिया में एक ऊर्जावान नेतृत्व देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं, और दुनिया की समस्याओं के समाधान और तनाव कम करने के लिए उन उपायों की तलाश कर रहे हैं, ताकि वह समस्या-समाधान के असाधारण कौशल का प्रदर्शन कर सकें।
जबकि अमेरिका स्थित स्टिमसन सेंटर के विद्वानों का कहना है कि इस बात की पूरी आशंका है कि अमेरिका और पाकिस्तान के रिश्ते खराब होंगे, लेकिन ट्रंप द्वारा हैरान करने की घटना से इन्कार नहीं किया जा सकता। अमेरिकी विद्वानों का कहना है कि चूंकि पाकिस्तान अगले कुछ वर्षों में महत्वपूर्ण ऊर्जा गलियारा बनने जा रहा है, इसलिए अमेरिका सामान्य सुरक्षा मैट्रिक्स के परे इस्लामाबाद के साथ अपने रिश्ते को व्यापाक बनाकर उसका लाभ उठाने के लिए तैयार है।
यह तो समय ही बताएगा कि ट्रंप प्रशासन का रवैया कैसा रहता है और क्या उसके पास पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय रिश्ते को आगे बढ़ाने के लिए समय होगा!