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जानना जरूरी है: पद्मावती के साथ मायके में हुआ छल, दैत्य ने उनके पति का रूप धर; बच्चे के जन्म पर नामकरण कंस हुआ

सार

पद्मावती मायके में सखियों के साथ सैर पर निकली थीं। तभी एक दैत्य ने उनके पति का रूप धरकर छल किया, जिससे जन्म लेने वाला बालक कंस कहलाया।
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पद्मावती से जन्मे बच्चे का नाम कंस रखा गया - फोटो : अमर उजाला प्रिंट-ग्राफिक्स
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विस्तार
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मथुरा नगरी में यदुवंशी राजा उग्रसेन राज्य करते थे। उनका विवाह विदर्भराज सत्यकेतु की पुत्री पद्मावती से हुआ था। उग्रसेन अपनी पत्नी से इतना प्रेम करते थे कि उसके बिना भोजन तक नहीं करते थे। दोनों का दांपत्य जीवन अत्यंत सुखपूर्वक बीत रहा था। कुछ समय बाद पद्मावती के पिता सत्यकेतु को अपनी पुत्री की याद आई। उनकी माता भी उन्हें देखने के लिए व्याकुल थीं। उन्होंने दूत भेजकर उग्रसेन से आग्रह किया कि पद्मावती को कुछ समय के लिए मायके भेज दें। उग्रसेन ने स्नेहपूर्वक उनकी इच्छा स्वीकार कर ली और पद्मावती विदर्भ चली गईं।

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एक दिन अपने मायके में पद्मावती अपनी सखियों के साथ किसी उपवन में घूूम रही थीं। वहीं एक सुंदर सरोवर था। पद्मावती अपनी सखियों के साथ उसमें जलक्रीड़ा करने लगीं। उसी समय कुबेर का सेवक गोभिल नामक दैत्य वहां से गुजर रहा था। उसकी दृष्टि पद्मावती पर पड़ी, तो वह मोहित हो गया और उसके मन में कुटिल विचार उत्पन्न होने लगे। उसे ज्ञात था कि पद्मावती पतिव्रता हैं, इसलिए सामान्य रूप से उन्हें पाना असंभव था। तब गोभिल ने छल किया और मायाशक्ति से उग्रसेन का रूप धारण कर लिया। फिर, उसने मधुर संगीत में गाना शुरू किया। पद्मावती ने जब वह स्वर सुना, तो उन्हें लगा कि शायद उग्रसेन वहां आए हैं। वह अपनी सखियों के साथ उसके पास पहुंचीं।

गोभिल ने उग्रसेन के स्वर में उसे पुकारा, ‘प्रिये! तुम्हारे बिना मैं नहीं रह सकता। तुम्हारे वियोग में जीवन मेरे लिए असह्य हो गया है।’ पद्मावती उसके छल को पहचान न सकीं। गोभिल उसे एकांत में ले गया और फिर उसने पद्मावती के साथ समागम किया। उस बीच पद्मावती ने ध्यान से देखा कि गोभिल के शरीर में वह विशेष चिह्न नहीं था, जो उसके वास्तविक पति उग्रसेन के शरीर में था। यह देखकर वह क्रोधित होकर बोलीं, ‘तुमने मेरे पति का रूप धारण करके मेरे पातिव्रत्य को नष्ट किया है। इसलिए मैं तुम्हें शाप दूंगी।’

  • गोभिल ने पद्मावती पर ही दोष लगाना शुरू कर दिया। उसने कहा, ‘यदि पतिव्रता हो, तो पति को छोड़कर यहां क्यों आई हो? शृंगार, आभूषण व सुंदर रूप धारण करके क्यों घूम रही हो? 
  • उसने आगे कहा, ‘दंड देकर मैं तुम्हें सीधी राह पर ले आया हूं। अब कभी तुमसे ऐसी धृष्टता नहीं हो सकती।’ गोभिल ने पद्मावती को अपराधिनी सिद्ध करने की कोशिश की।

पद्मावती ने उत्तर दिया, ‘मेरे पिता ने स्नेह के कारण मुझे कुछ समय के लिए मायके बुलाया है। मैं यहां भी अपने पति का स्मरण करती हूं। तुमने उनका रूप धारण करके मेरे साथ छल किया है। अपराधी तुम हो, मैं नहीं!’ परंतु, गोभिल ने कहा, ‘तुम्हारे मन में मायके आने की इच्छा उत्पन्न हुई, उसी क्षण तुम्हारा मन पति के चिंतन से हट गया था।’ उसके तर्क सुनकर पद्मावती का दुख और बढ़ गया। अंततः गोभिल ने कहा, ‘तुम्हारे गर्भ से एक पुत्र जन्म लेगा, जो तीनों लोकों के लिए भय का कारण बनेगा।’ यह कहकर वह चला गया। पद्मावती फूट-फूटकर रोने लगीं। उन्होंनेे सखियों को अपने साथ हुए छल की घटना सुनाई। उसकी सखियों ने यह सारी बात पद्मावती के माता-पिता को बताई तो, वे बहुत दुखी हुए। उन्होंने पुत्री को सम्मानपूर्वक उसके पति के घर मथुरा भेज दिया।

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उग्रसेन ने पद्मावती को देखा, तो वह बहुत प्रसन्न हुए। वह इस बात से अनजान थे कि पद्मावती के गर्भ में गोभिल के छल के कारण एक शिशु पल रहा है, जो भविष्य में संकट लाएगा। पद्मावती इस रहस्य को जानती थीं और भीतर ही भीतर चिंता तथा भय से घिरी रहती थीं। वह शिशु गर्भ दस वर्षों तक बढ़ता रहा और अंततः पद्मावती ने एक अत्यंत तेजस्वी तथा बलवान पुत्र को जन्म दिया। यही बालक आगे चलकर ‘कंस’ के नाम से प्रसिद्ध हुआ। गोभिल की भविष्यवाणी के अनुरूप कंस के अत्याचारों से तीनों लोक कांप उठा। परंतु, उसकी मृत्यु अंततः भगवान श्रीकृष्ण के हाथों हुई और उसे मोक्ष मिल गया।

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