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दूसरा पहलू: 'ओम जय जगदीश हरे' जिसने घर-घर पहुंचाई, उस शख्स की कहानी कितनी दिलचस्प है?

प्रो. डॉ. कृष्ण कुमार रत्तू Published by: निर्मल कांत Updated Wed, 30 Sep 2026 07:26 AM IST

सार

पंजाब के फिल्लौर का जिक्र है। लंबे समय तक हिंदी का पहला उपन्यास लाला श्रीनिवास दास के परीक्षा गुरु  को माना जाता रहा है, पर शोध में फिल्लौरी के भाग्यवती को हिंदी के आरंभिक उपन्यासों में, और कई विद्वानों द्वारा हिंदी का पहला उपन्यास माना गया है। 
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पंडित श्रद्धाराम फिल्लौरी - फोटो : अमर उजाला प्रिंट


पंडित श्रद्धाराम फिल्लौरी का जन्म 30 सितंबर, 1837 को पंजाब के फिल्लौर में और निधन 24 जून, 1881 को लाहौर में हुआ। उनके पिता जयदयालु ज्योतिष के ज्ञाता थे और इसी धार्मिक वातावरण में पले-बढ़े श्रद्धाराम ने बचपन में ही गुरुमुखी सीख ली थी। आगे चलकर उन्होंने संस्कृत, हिंदी, फारसी, उर्दू और ज्योतिष का अध्ययन किया। यहां एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि जय जगदीश हरे पदबंध की जड़ें जयदेव के गीतगोविंद के श्री दशावतार स्तोत्र तक जाती हैं। 


राजस्थान के देवस्थान विभाग की सामग्री भी इस संबंध का और 1870 में श्रद्धाराम फिल्लौरी द्वारा आरती की रचना का उल्लेख करती है। उनकी चर्चित कृतियों में सिखां दे राज दी विथया, पंजाबी बात चीत, धर्म कसौटी, सत्य धर्म मुक्तावली, धर्म संवाद, धर्म रक्षा, सत्यामृत प्रवाह, शितोपदेश और भाग्यवती जैसी रचनाओं का उल्लेख मिलता है। लंबे समय तक हिंदी का पहला उपन्यास लाला श्रीनिवास दास के परीक्षा गुरु को माना जाता रहा है, पर शोध में पंडित फिल्लौरी के भाग्यवती को हिंदी के आरंभिक उपन्यासों में, और कई विद्वानों द्वारा हिंदी का पहला उपन्यास, माना गया है। हालांकि, अभी इस पर विवाद है।


एक रोचक पक्ष उनका विवाह महताब कौर नामक सिख महिला से होना भी है। यह तथ्य तत्कालीन पंजाब के सामाजिक ताने-बाने की विविधता के अनुभव को सामने लाता है। जब अगली बार आरती की घंटी के बीच ओम जय जगदीश हरेे का अमर स्वर उठे, तो उसके पीछे छिपे नाम को भी याद किया जाना चाहिए।'
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