आइए, जरा वर्ष 2017 से सरकार द्वारा संग्रहीत जीएसटी पर नजर डालें, जब अप्रत्यक्ष करों से राजस्व संग्रह राष्ट्रीय स्तर पर 7.19 लाख करोड़ रुपये था। जीएसटी लागू होने के साथ ही राजस्व अब 18.1 लाख करोड़ रुपये हो गया है। इसी तरह, करदाताओं की संख्या 2017 में 67 लाख थी, जो बढ़कर 2023 में 1.4 करोड़ हो गई है। इस साल अप्रैल में जीएसटी संग्रह 1.87 लाख करोड़ रुपये रहा, जो जीएसटी लागू होने के बाद से अब तक का सबसे अधिक मासिक संग्रह है।
हालांकि जीएसटी सरकार के राजस्व संग्रह के लिए वरदान साबित हुआ है, लेकिन इसकी कुछ आलोचनाएं भी होती रहती हैं। जीएसटी के कारण अनुपालन में वृद्धि, जीएसटी की बदलती दरें और अक्सर विभिन्न राज्यों द्वारा जीएसटी संग्रह में से हिस्सा न मिलने की शिकायतों को लगातार सुलझाया जा रहा है। लेकिन सरकार के लिए सबसे बड़ी हैरानी की बात हाल के वर्षों में जीएसटी की चोरी में वृद्धि है। जीएसटी नेटवर्क द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2022-23 में लगभग 14,000 जीएसटी चोरी के मामलों का पता चला है, जो 2021-22 के 12,574 और 2020-21 के 12,596 से अधिक है।
वर्ष 2022-23 में कर चोरी का पता लगने की संख्या दोगुनी होकर 1.01 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गई, जबकि जीएसटी खुफिया महानिदेशालय (डीजीजीआई) के अधिकारियों ने वित्त वर्ष के दौरान 21,000 करोड़ रुपये की वसूली की। वर्ष 2021-22 में जीएसटी व्यवस्था के तहत जांच एजेंसी डीजीजीआई ने 54,000 करोड़ रुपये से अधिक की कर चोरी का पता लगाया और 21,000 करोड़ रुपये से अधिक की कर वसूली की। यह चोरी चिंता का विषय रहा है, क्योंकि जीएसटी लागू करने का मूल आधार कर संग्रह में किसी भी तरह के रिसाव को रोकना था। जिस तरह अन्य सभी अनुपालनों में खामियां होती हैं, वैसे ही जीएसटी में भी हैं।
एक आम धोखाधड़ी, कर योग्य वस्तुओं और सेवाओं का मूल्यांकन कम करके कम कर का भुगतान करना कर चोरी का पुराना तरीका है। फिर कई लोगों ने जानबूझकर या अनजाने में छूट का लाभ उठाना शुरू कर दिया है। लेकिन, सबसे बड़ी गड़बड़ी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का दावा करने का तरीका है। इनपुट टैक्स का दावा करने के लिए फर्मों की ओर से फर्जी चालान जारी करने के मामले भी सामने आ रहे हैं। लेकिन जिस तरह से जीएसटी नेटवर्क की संरचना की गई है और उसके पास जो शक्तियां हैं, उनमें दीर्घकालिक धोखाधड़ी की बहुत कम गुंजाइश है। उदाहरण के लिए, हम एक कार निर्माता और बैटरी आपूर्तिकर्ता का मामला ले सकते हैं। वर्तमान में, जीएसटी प्रणाली खरीदारों को धोखाधड़ी करने वाले आपूर्तिकर्ताओं से आपूर्ति प्राप्त किए बिना आईटीसी का दावा करने की अनुमति देती है। बैटरी निर्माता ऐसी बैटरी बनाता है, जिस पर 18 फीसदी जीएसटी लगता है, यानी 100 रुपये की एक बैटरी का ऑर्डर देने पर कार निर्माता को 118 रुपये का भुगतान करना पड़ता है। आदर्श रूप से बैटरी निर्माता 100 रुपये अपने पास रखता है और 18 रुपये जीएसटी के रूप में जमा करता है।
अब कार निर्माता इस एक बैटरी आपूर्ति पर 18 रुपये इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा कर सकता है। इसका उपयोग जीएसटी का भुगतान करने या कार निर्यात पर नकद रिफंड का दावा करने के लिए किया जा सकता है। धोखाधड़ी के मामले में, बैटरी निर्माता वास्तव में बैटरी की आपूर्ति किए बिना या जीएसटी का भुगतान किए बिना चालान जारी करता है और कार निर्माता बैटरी निर्माता द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर आईटीसी का दावा करता है। फर्जी चालान, कम चालान और आईटीसी का गलत इस्तेमाल जीएसटी चोरी के सबसे आम तरीके हैं। जीएसटी परिषद इस रिसाव को रोकने के तरीकों पर काम कर रही है और यह समय ही बताएगा कि वे सफल होंगे या नहीं।
दूसरी तरह से कर चोरी तब होती है, जब एक ही इकाई को उसके द्वारा पेश की जाने वाली वस्तु एवं सेवाओं के लिए कई तरह की जीएसटी दरों का सामना करना पड़ता है। कई बार ऐसा होता है कि कर का भुगतान अलग-अलग करने के बजाय उन्हें एक साथ मिला दिया जाता है। मसलन, यदि पेश की जा रही कोई सेवा 18 फीसदी जीएसटी के दायरे में आती है और वस्तु पांच फीसदी जीएसटी के दायरे में, तो इस बात की संभावना है कि सेवा प्रदाता उत्पाद एवं सेवाओं का अलग-अलग बिल बनाने के बजाय उनका बिल पांच फीसदी जीएसटी के तहत बनाए। जीएसटी नेटवर्क लगातार डाटा, आपूर्ति शृंखला और कर ढांचों का इस्तेमाल करके व्यवसायों की निगरानी कर रहा है, ताकि राजस्व हानि के लिए जिम्मेदार कर चोरी को रोका जा सके, लेकिन जीवन के हर क्षेत्र की तरह इस क्षेत्र में भी धोखाधड़ी करने वाले हमेशा एक कदम आगे रहते हैं।
जीएसटी ने अब तक अप्रत्यक्ष कर संग्रह में क्रांतिकारी बदलाव लाया है। इसकी एकमात्र कमी कर चोरी और अनुपालन संबंधी समस्याएं हैं, जो जीएसटी के दायरे में आने वालों को नुकसान पहुंचाती हैं, खासकर अनुपालन संबंधी खर्च। अब समय आ गया है कि सरकार और जीएसटी नेटवर्क इन विसंगतियों की जांच करे और तंत्र की गड़बड़ियों को ठीक करने के लिए कदम उठाए।