रणधीर जायसवाल ने साफ कहा कि भारत और कनाडा के रिश्ते दशकों पीछे की स्थिति में पहुंच गए हैं। साप्ताहिक प्रेसवार्ता में रणधीर जायसवाल ने यही संकेत दिया कि अभी दोनों देशों के बीच में इस तरह के खराब रिश्ते का दौर चलता रहेगा। इसके पीछे की एक वजह कनाडा में चुनाव और जस्टिन ट्रूडो सरकार की राजनीतिक मंशा भी बताई। हालांकि जायसवाल यह स्पष्ट नहीं कर सके कि इस मुद्दे पर अमेरिका, ब्रिटेन, आस्ट्रेलिया समेत भारत के रणनीतिक साझीदार देश कनाडा का पक्ष क्यों ले रहे हैं?
कनाडा में 17-18 लाख भारतीय और बुरे दौर में भारत का रिश्ता
कनाडा में 17-18 लाख के करीब भारतीय हैं। चार लाख के करीब भारतीय छात्र हैं। रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत को भरोसा है, कनाडा सरकार भारतीयों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देगी। उन्होंने माना कि दोनों देशों के रिश्ते बहुत बुरे दौर से गुजर रहे हैं। कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के आरोपों पर आज भी विदेश मंत्रालय का जवाब दो टूक जवाब देने वाला रहा। रणधीर जायसवाल ने साफ कहा कि रिश्ते को कठिन दौर में लाने की वजह कनाडा का एकतरफा व्यवहार, आधारहीन आरोप, जस्टिन ट्रूडो सरकार का भारत के अनुरोध पर ध्यान न देना है। इसके लिए ट्रूडो सरकार दोषी है। मंत्रालय ने वीजा सहित अन्य सुविधाओं के बारे में कहा कि जहां तक संभव है, सभी प्रक्रियाएं चलती रहेंगी। लेकिन कनाडा के साथ संबंधों में यह तनाव दूर होने और रिश्तों को पटरी पर लाने का कोई रोडमैप नहीं दे पाए। समझा जा रहा है कि भारत अभी प्रतीक्षा करने की रणनीति पर चलेगा। कनाडा में चुनाव संपन्न होने और नई सरकार के गठन के बाद ही दोनों देशों के रिश्ते में कोई सुधार की संभावना बन सकेगी।
अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड जैसे देश क्यों दे रहे हैं कनाडा का साथ?
यह सवाल थोड़ा सा गंभीर है। अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन भारत के रणनीतिक साझीदार देशों में हैं। न्यूजीलैंड ने भी मुंह खोलना शुरू कर दिया है। अमेरिका ने भारत से कनाडा की चिंता पर सहयोग करने के लिए कहा है। विदेश मंत्रालय ने इस पर अभी कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह इस संवेदनशील मुद्दे पर भारत सहयोगी देशों और अधिकारियों के संपर्क में है। भारत ने अपने हितों और सुरक्षा के मुद्दे को गंभीर बताया है। रणधीर जायसवाल ने कहा कि विमानों में बम की सूचना और धमकी की जानकारियों को भारत ने गंभीरता से लिया है। भारत का इस मामले में स्पष्ट कहना है कि वह अपनी सुरक्षा चिंताओं से किसी तरह का समझौता नहीं कर सकता।