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इस सांप की कहानी जानकर आप हैरान रह जाएंगे

Sat, 04 Apr 2015 01:15 PM IST
रामकृष्ण परमहंस
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एक जंगल में कुछ चरवाहे गाय चराने जाते थे। वहां एक तरफ एक विषधर सर्प रहता था। उसके डर से चरवाहे उधर बड़ी सावधानी से आते-जाते। एक दिन एक ब्रह्मचारी उसी रास्ते से जा रहे थे। चरवाहे उन्हें उस रास्ते पर जाने से रोकने लगे। ब्रह्मचारी ने कहा, सांप का मुझे कोई डर नहीं। मैं मंत्र जानता हूं। यह कहकर वह आगे बढ़ गए।रास्ते में सांप फन फैलाए उन पर लपका, मगर उसके पास पहुंचने से पहले ही ब्रह्मचारी ने मंत्र पढ़ा। सांप आकर उनके पैरों पर लोटने लगा। ब्रह्मचारी ने उसे उपदेश देते हुए कहा, मैं तुझे एक मंत्र देता हूं। इस मंत्र को जपेगा, तो ईश्वर पर तेरी भक्ति बढ़ेगी। उस दिन के बाद से सांप ने अपनी हिंसक प्रवृत्ति छोड़ दी।देखें,7 स्थान जहां स्नान करने मात्र से मनुष्य स्वर्ग जाता हैअब चरवाहों ने देखा कि सांप काटता नहीं है। ढेला मारने पर भी उसे गुस्सा नहीं होता। तो एक दिन उन्होंने उसकी पूंछ पकड़कर उसे घुमाया और नीचे पटक दिया। चोट लगने से सांप बेहोश हो गया। चरवाहों को लगा कि वह मर गया। यह सोचकर वे वहां से चले गए। जब बहुत रात बीती, तब सांप होश में आया। वह धीरे-धीरे अपने बिल में पहुंचा। अब वह सिर्फ रात में ही बाहर निकलने लगा।पढ़ें,अप्रैल महीने का राशिफलः जानिए कैसा रहेगा यह महीना आपके लिएसाल भर बाद ब्रह्मचारी फिर उधर से गुजरे। उन्हें सांप की गति के बारे में पता चला। वे उसे ढूंढते हुए जंगल में पहुंचे। गुरुदेव की पुकार सुनकर सांप बिल से बाहर आया। भक्तिभाव से प्रणाम करके उसने उन्हें आपबीती बताई। उसकी बातें सुनकर ब्रह्मचारी बोले, तू मूर्ख है। अपनी रक्षा करना भी नहीं जानता? मैंने तो तुझे काटने के लिए मना किया था, फुफकारने के लिए नहीं। दुष्ट लोगों को भय दिखाना चाहिए, ताकि वे कोई अनिष्ट न कर सकें। लेकिन उनमें विष नहीं डालना चाहिए। यानी किसी का बुरा नहीं करना चाहिए। सांप उनके उपदेशों का मर्म समझ चुका था।
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