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नोबेल मुक्का!

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नोबेल पुरस्कार से सम्मानित वीएस नायपॉल पर गत दिनों नाटककार गिरीश कर्नाड ने हमला बोला, तो कई लोगों ने कहा कि नोबेल विजेता पर ऐसा आक्रमण नहीं करना चाहिए।
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फेसबुक पर किसी ने पूछा कि क्या उस तरह करना चाहिए जैसे वर्गास ल्योसा ने गाब्रिएल गार्सिया मार्क्वेज पर किया था। जब इस मामले की पड़ताल करने निकले तो साइबर वर्ल्ड में यह तस्वीर मिली। मार्क्वेज की यह फोटो उनके दोस्त राद्रिगो मोया ने 1976 में खींची थी।

इस फोटो में बाईं आंख और नाक पर कुछ काले धब्बे नजर आ रहे हैं। ये धब्बे उस घूंसे के गवाह हैं, जो ल्योसा ने उन्हें एक मैक्सिकन थियेटर में मारा था।

एक रोचक तथ्य यह है कि तब तक दोनों लेखकों को नोबेल नहीं मिला था। मार्क्वेज को उक्त घूंसा-कांड के छह साल बाद 1982 में और ल्योसा को 34 साल बाद 2010 में नोबेल मिला।
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इस घूसा-कांड से पहले दोनों दोस्त थे।

मार्क्वेज के बाद ल्योसा को भी नोबेल मिल जाने पर साहित्यकारों के हंसी- मजाक में नोबेल मुक्का के नाम से चर्चित हो चुके उस मुक्के ने इन दोनों को पुरस्कार दिलाने में भले ही कोई भूमिका न निभाई हो, उनकी दोस्ती तो तोड़ ही दी थी।
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