क्या मालदीव, जो 90,000 से ज्यादा वर्ग किलोमीटर में फैले 26 प्रवाल द्वीपों के आसपास करीब 1,200 मूंगा द्वीपों से बना है, अपने भविष्य पर ध्यान देगा? यदि ग्लोबल वार्मिंग मौजूदा गति से ही जारी रही, तो मालदीव अगले एक दशक में गायब हो जाएगा। फिर क्या वहां के लोग चीन जाएंगे?
मालदीव के आयात शुल्क संग्रह में भारी गिरावट आई है, क्योंकि उसका चीन के साथ मुक्त व्यापार समझौता है। मार्च, 2024 में मालदीव के राष्ट्रपति ने भारत को अपना करीबी सहयोगी बताते हुए ऋण राहत की गुहार लगाई, क्योंकि उसकी अर्थव्यवस्था ध्वस्त हो गई है और पर्यटकों की संख्या भी 30 फीसदी कम हो गई है। बड़ी संख्या में भारतीयों द्वारा मालदीव का दौरा रद्द करने से उसके पर्यटन उद्योग में भूचाल आ गया है और आतंकवादियों से भी उसके रिश्ते उजागर हो गए हैं। फिर भी अप्रैल 2024 में, भारत से आवश्यक खाद्य पदार्थों की मांग के बाद, जिनमें कुछ ऐसे सामान भी थे, जिनके निर्यात पर प्रतिबंध है, हमने वे चीजें भेजकर दयालुता दिखाई, जबकि चीन ने केवल पीने का पानी भेजा था। मालदीव के विदेश मंत्री ने ट्वीट किया कि वह भारत की उदारता के लिए दिल से आभारी हैं। भारत ने 1980 के दशक में तख्तापलट के प्रयास को विफल करने में मालदीव की सहायता की और 2000 के दशक में जब वहां पानी का घोर संकट था, तो पेयजल की आपूर्ति की थी। फेलिक्स श्वार्जेनबर्ग ने हमें 19वीं सदी के मध्य में बताया था कि अंतरराष्ट्रीय मामलों में कृतज्ञता जैसी कोई चीज नहीं होती है। यह बात हम जानते हैं।
वर्ष 2023 में आतंक समर्थक मुइज्जू ने अपने तीन कट्टर मुस्लिम मंत्रियों को हिंदू धर्म, भारत के प्रधानमंत्री और भारत के प्रति दुर्व्यवहार करने और अपने चीनी आका का पक्ष लेने के लिए कहा, क्योंकि वह चीन की यात्रा पर जा रहे थे। मुइज्जू अंतरराष्ट्रीय संस्थानों से धन चाहते हैं, लेकिन उन्होंने एक संदिग्ध चीनी कंपनी को निर्माण परियोजनाएं सौंपी हैं, जिसने कंबोडिया और अंगोला को धोखा दिया है और जो विश्व बैंक एवं एडीबी की काली सूची में है। मालदीव पर चीन का लगभग 1.3 अरब अमेरिकी डॉलर बकाया है, जो उसके विदेशी ऋण का पांचवां हिस्सा है। इस्लामी देशों में सबसे छोटा देश मालदीव पैगंबर से भी अधिक इस्लामी होने की कोशिश कर रहा है, और इस प्रक्रिया में खुद को नुकसान पहुंचाता दिख रहा है। चीन इस इस्लामी देश के साथ आ तो सकता है, लेकिन श्रीलंका की तरह जल्द ही पीछे हट जाएगा, क्योंकि मालदीव एक घातक कॉकटेल के नशे में है-कट्टरपंथी इस्लाम, भारी असमानता, सड़ी हुई राजनीति, ड्रग्स और आतंकवाद। खबरों के मुताबिक, मालदीव की संलिप्तता से भारत के खिलाफ 26/11 जैसे कम से कम दो हमले हुए, जिन्हें विफल कर दिया गया। हाशिये पर रहने वाले वर्गों के दस में से नौ मालदीव के युवाओं को दुनिया के इस्लामीकरण अभियान के लिए कट्टरपंथी बनाया गया है। वर्ष 2023 में भारतीय खुफिया विभाग ने एक मुस्लिम खनन इंजीनियर (जो विस्फोटकों के बारे में जानता था) को गिरफ्तार किया, जिसने अपने कुछ इंजीनियर दोस्तों के साथ मिलकर कई शहरों में विस्फोट किया था। उसकी हैंडलर मालदीव की एक महिला थी।
राष्ट्रपति बनते ही मुइज्जू तुर्किये के दौरे पर गए थे। अब यह बात उजागर हो गई है कि वह मालदीव के आईएस से जुड़े 36 युवाओं को सीरिया से माले लाने के लिए अंकारा से मदद मांगने गए थे। तुर्किये ने उनकी मदद की और बदले में तुर्किये निर्मित लाखों डॉलर के ड्रोन बेचे, जो मालदीव के समुद्री क्षेत्र में गश्त लगाते हैं। पहले यह काम भारत और मालदीव मिलकर करते थे। चीन से उन्होंने गुहार लगाई कि वह तालिबान को 2019 में अफगानिस्तान में गिरफ्तार किए गए 243 आईएस खुरासान-प्रशिक्षित मालदीव के लोगों को रिहा करने के लिए राजी करें, जिन्हें 21 साल की जेल की सजा सुनाई गई थी। लेकिन काबुल ने साफ इन्कार कर दिया। गरीबी, खतरनाक राजनीति, सनकी नेता, अवसरों की कमी और आतंकी धन ने मालदीव को सनकियों का मुल्क बना दिया है। वहां के पांच फीसदी सबसे समृद्ध लोगों के पास देश की कुल संपत्ति का 95 फीसदी हिस्सा है। हाल में मालदीव में धार्मिक असहिष्णुता, इस्लामीकरण और आतंकवाद में बढ़ोतरी हुई है। मालदीव डूबने के कगार पर है, पर दुनिया के पास इसके लिए समय नहीं है। इसलिए मौजूदा चुनावी नतीजे का हमारे द्विपक्षीय रिश्ते पर असर नहीं पड़ेगा। हम उसी तरह मालदीव से निपटेंगे, जैसे निपटना चाहिए।