सवाल है कि कितने एमएसएमई वास्तव में पॉलिसी लेंस के अंतर्गत हैं? आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम, सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए क्रेडिट गारंटी योजना, सूक्ष्म और लघु उद्यम क्लस्टर विकास कार्यक्रम जैसी कोई भी योजना या सब्सिडी केवल पंजीकृत उद्यमों के लिए है। इसलिए, जब भी सरकार किसी नई योजना या सब्सिडी या नई नीति पहल की बात करती है, तो वह केवल उन पंजीकृत उद्यमों का ही समर्थन कर रही होती है।
वर्ष 2006 में एमएसएमईडी अधिनियम के कार्यान्वयन के बाद, चौथी एमएसएमई जनगणना देश में पंजीकृत और अपंजीकृत एमएसएमई, दोनों के लिए पहली जनगणना थी। चौथी एमएसएमई जनगणना के बाद अब तक ऐसी कोई और जनगणना नहीं हुई है। एनएसएस के 2015-16 के आंकड़ों के अनुसार, कुल अनुमानित 6.3 करोड़ एमएसएमई में से केवल 30 प्रतिशत पंजीकृत थे। दुखद है कि इन अधिनियमों या एमएसएमई के प्राधिकरणों के तहत पंजीकरण एक औपचारिकता मात्र है, क्योंकि फैक्ट्री अधिनियम, 1948 की तरह पंजीकृत एमएसएमई में सामाजिक सुरक्षा लाभ और अन्य लाभ सुनिश्चित नहीं हैं।
एमएसएमई की एक बड़ी बाधा सरकारी एजेंसियों के साथ पंजीकरण की बोझिल प्रक्रिया है। अभी एमएसएमई को वस्तु एवं सेवा कर, कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय और उद्यम जैसी विभिन्न योजनाओं के तहत पंजीकरण करने की आवश्यकता है। यह न केवल एमएसएमई के प्रशासनिक बोझ को बढ़ाता है, बल्कि भ्रम और प्रयास के दोहराव को भी पैदा करता है। सरकार ने जुलाई, 2020 में एमएसएमई के पंजीकरण और विभिन्न प्रमाणपत्र प्राप्त करने के लिए एक एकीकृत मंच के रूप में उद्यम पंजीकरण पोर्टल लॉन्च किया। लेकिन लगभग तीन वर्षों के बाद भी केवल 1.4 करोड़ एमएसएमई इस पर पंजीकृत हैं।
कम पंजीकरण से पांच महत्वपूर्ण संकेत मिलते हैं। एक, पंजीकरण के महत्व और इससे होने वाले लाभों के बारे में एमएसएमई में जागरूकता की कमी है । एमएसएमई अक्सर उनके लिए उपलब्ध योजनाओं और लाभों से अनभिज्ञ होते हैं। दो, भारत में एमएसएमई पंजीकरण प्रक्रिया सरल और सीधी होनी चाहिए। अभी जीएसटी, उद्यम और अन्य राज्य-विशिष्ट पंजीकरण जैसे कई पंजीकरण प्राप्त करना शामिल है। तीन, पंजीकरण के बाद, एमएसएमई को विभिन्न वैधानिक आवश्यकताओं का पालन करना पड़ता है, जैसे खातों की पुस्तकों को बनाए रखना, रिटर्न दाखिल करना और कुछ कानूनों/नियमों का पालन करना।
यह कई छोटे व्यवसायियों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है, जिनके पास पेशेवरों को नियुक्त करने के लिए संसाधन नहीं हो सकते हैं। चार, प्रोत्साहनों की कमी एक अन्य कारक है। भारत के एमएसएमई कई प्रोत्साहन के पात्र हैं, जैसे कि सब्सिडी, कर लाभ और क्रेडिट गारंटी। कई छोटे व्यवसायियों को ये प्रोत्साहन पंजीकरण के लिए पर्याप्त नहीं लग सकते हैं। पांच, भारत में एमएसएमई विनियामक जांच, करों और अनुपालन से बचने के लिए अपंजीकृत रहना पसंद कर सकते हैं।
सरकार को सुनिश्चित करना चाहिए कि एमएसएमई की लागत से अधिक पंजीकरण का लाभ उन तक पहुंचे। इसमें क्रेडिट तक आसान पहुंच, बुनियादी ढांचा समर्थन और एक सरलीकृत कर व्यवस्था शामिल है। इसके अतिरिक्त, औपचारिक क्षेत्र में अनौपचारिक क्षेत्र के एमएसएमई के लिए अधिक अनुकूल परिस्थितियों का निर्माण करने की पहल की जा सकती है। इनमें से कई चीजें सरकार प्रौद्योगिकी का उपयोग करके उद्योग संघों और बैंकों से साझेदारी करके कर सकती है।
-विजिटिंग प्रोफेसर, यूनिवर्सिटी ऑफ बाथ।