बीते साल 21 और 22 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कुवैत यात्रा के दौरान आईटी, फार्मास्यूटिकल्स, फिनटेक, बुनियादी ढांचे आदि क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर समझौते किए गए। कुवैत खाड़ी देशों में भारत के शीर्ष व्यापारिक साझेदारों में से एक है। कुवैत भारत का छठा बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता है। वहीं, 16 दिसंबर को श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके अपने सबसे पहले राजकीय विदेशी दौरे पर भारत आए और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ लाभदायक द्विपक्षीय वार्ता की। दिसानायके ने 2022 के आर्थिक संकट के दौरान श्रीलंका के लोगों को भारत द्वारा किए गए सहयोग के लिए आभार जताया। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय वार्ता के दौरान व्यापार, निवेश, ऊर्जा विकास व आर्थिक रोडमैप पर सहमति व्यक्त की। इसमें कोई दो मत नहीं है कि प्रधानमंत्री मोदी अपने तीसरे कार्यकाल में भारत के वैश्विक व्यापार और निर्यात बढ़ाने के मद्देनजर विदेश दौरों में द्विपक्षीय व्यापार वार्ताओं और व्यापार समझौतों की रणनीति लगातार आगे बढ़ा रहे हैं। खासतौर से इस वर्ष पिछले छह महीनों में इस रणनीति से द्विपक्षीय व्यापार के अच्छे अध्याय लिखे गए हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने 16 से 21 नवंबर तक ब्राजील, नाइजीरिया व गुयाना के दौरे पर, जहां जी-20 शिखर सम्मेलन में भुखमरी और गरीबी के खिलाफ एकजुटता विषय पर प्रभावी संबोधन दिया, वहीं नाइजीरिया और गुयाना पहुंचकर इन देशों के साथ व्यापार बढ़ाने की सार्थक वार्ताएं कीं। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा जी-20 शिखर सम्मेलन से इतर ब्रिटेन, फ्रांस, इटली, ब्राजील, सिंगापुर, इंडोनेशिया, पुर्तगाल व स्पेन समेत कई देशों के नेताओं के साथ की गई 31 द्विपक्षीय और अनौपचारिक वार्ताओं में भारत का रणनीतिक महत्व उभरकर दिखाई दिया है।
उल्लेखनीय है कि रूस के कजान में 22 से 24 अक्तूबर तक आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भारत ने द्विपक्षीय वार्ताओं का रणनीतिक लाभ लिया। भारत और चीन के बीच पांच साल बाद अहम द्विपक्षीय वार्ता हुई। इस वार्ता के बाद भारत और चीन के बीच संबंधों का नया अध्याय दिखाई दे रहा है। यह बात भी महत्वपूर्ण है कि मोदी ने सितंबर में अमेरिका में आयोजित क्वाड लीडर्स सम्मेलन में भाग लेकर इस संगठन की भारत के लिए उपयोगिता बढ़ाई। वहीं, मोदी और जो बाइडन के बीच हुई बातचीत में कोलकाता में एक सेमीकंडक्टर प्लांट स्थापित करने का करार हुआ है। यह भी छोटी बात नहीं है कि गत नौ जुलाई को 22वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में मास्को में भारत और रूस के बीच बहुआयामी संबंधों की संपूर्ण शृंखला की समीक्षा के बाद भारत और रूस ने द्विपक्षीय कारोबार को 2030 तक 100 अरब डॉलर तक बढ़ाने, व्यापार में संतुलन लाने, गैर-शुल्क व्यापार बाधाओं को दूर करने और यूरेशियन आर्थिक संघ (ईएईयू)-भारत मुक्त व्यापार क्षेत्र की संभावनाएं तलाशने का लक्ष्य रखा है।
जून में इटली में हुए विकसित देशों के संगठन जी-7 के शिखर सम्मेलन में विशेष आमंत्रित देश के रूप में भारत की अहमियत दिखाई दी है। भारत के लिए सबसे ठोस लाभ जी-7 की उस प्रतिबद्धता से उपजा, जिसमें कहा गया कि भारत-पश्चिम एशिया-यूरोप आर्थिक गलियारे (आईएमईसी) को बढ़ावा दिया जाएगा।
इसमें कोई दो मत नहीं है कि अब भारत को आर्थिक दुनिया के एक उभरते सितारे के रूप में देखा जा रहा है। जहां अमेरिका और रूस भारत को एक जैसा महत्व दे रहे हैं। वहीं, सभी महत्वपूर्ण वैश्विक मंचों पर भारत को विशेष अहमियत मिल रही है। डोनाल्ड ट्रंप ने भारत से मित्रता बढ़ाने की बात कही है, तो रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने भारत के बढ़ते आर्थिक कद को स्वीकार करते हुए भारत को वैश्विक महाशक्ति कहा और भारत से मैत्रीपूर्ण संबंधों की जमकर तरफदारी की है। हम उम्मीद करें कि सरकार वैश्विक भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच विभिन्न देशों के साथ जिस तरह द्विपक्षीय वार्ताओं, द्विपक्षीय व्यापार समझौतों और मुक्त व्यापार की डगर पर बढ़ रही है, उससे इस वित्तीय वर्ष 2024-25 में निर्यात के रिकॉर्ड लक्ष्य 800 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंचने के साथ-साथ विदेश व्यापार बढ़ेगा और व्यापार घाटे में भी कमी लाई जा सकेगी।