कृषि उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने के लिए किसान डिजिटल कृषि और कृषि जैव प्रौद्योगिकी पर ध्यान दे रहे हैं। डिजिटल कृषि में खेती के तरीकों को अनुकूलित करने के लिए जीपीएस, सेंसर, ड्रोन और एआई जैसी तकनीकों का उपयोग शामिल है। यह सटीक कृषि को सक्षम बनाता है, जिससे किसान अपने खेतों के विशिष्ट क्षेत्रों के लिए इनपुट (पानी, उर्वरक, कीटनाशक) तैयार कर सकते हैं, जिससे पैदावार अधिकतम होती है और बर्बादी कम होती है। एआई वास्तविक परिस्थितियों में खेती की निगरानी और भविष्यवाणी के लिए जिम्मेदार हो सकता है। जबकि, कृषि जैव प्रौद्योगिकी में कीट प्रतिरोध और बढ़ी हुई पोषण सामग्री जैसे बेहतर गुणों वाली आनुवंशिक रूप से संशोधित (जीएम) फसलें शामिल हैं। कृषि क्षेत्र में लाभप्रदता बढ़ाने के लिए किसान तेजी से अपने उत्पादों को संसाधित और पैकेज करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, ताकि मूल्य जोड़ा जा सके और बाजार का एक बड़ा हिस्सा हासिल किया जा सके। किसानों के बाजार, सामुदायिक समर्थित कृषि (सीएसए) कार्यक्रम और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म किसानों को सीधे उपभोक्ताओं को बेचने की अनुमति देते हैं, मध्यस्थों को हटाकर उनके मुनाफे में वृद्धि करते हैं। इसके अितरिक्त, फार्म स्टे, शैक्षिक पर्यटन और फसल उत्सव जैसे पर्यटन अनुभव प्रदान करके अपनी आय में विविधता ला रहे हैं।
कृषि गुणवत्ता बढ़ाने के लिए उपभोक्ता तेजी से अपने भोजन की उत्पत्ति और उत्पादन विधियों के बारे में जानकारी मांग रहे हैं। ब्लॉकचेन जैसी तकनीकों का उपयोग पूरी आपूर्ति शृंखला में उत्पादों को ट्रैक करने के लिए किया जा रहा है, जिससे पारदर्शिता और गुणवत्ता आश्वासन सुनिश्चित होता है। इसके अलावा, चूंकि जैविक और टिकाऊ रूप से उत्पादित भोजन की मांग बढ़ रही है, किसान इस मांग को पूरा करने के लिए जैविक खेती, बायो डायनामिक खेती और कृषि वानिकी और नियंत्रित पर्यावरण कृषि (सीईए) जैसी प्रथाओं को अपना रहे हैं। सीईए में ऊर्ध्वाधर खेती और हाइड्रोपोनिक्स जैसी इनडोर खेती के तरीके शामिल हैं।
कृषि स्थिरता बढ़ाने के लिए पुनर्योजी दृष्टिकोण अपनाया जा रहा है, जो मिट्टी के स्वास्थ्य को बहाल करने, जैव विविधता को बढ़ाने और पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं को बढ़ाने पर केंद्रित है। इसके अलावा, जलवायु-स्मार्ट कृषि का उद्देश्य कृषि से ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करना और जलवायु परिवर्तन के लिए कृषि प्रणालियों के लचीलेपन को बढ़ाना है। इसमें उर्वरक उपयोग को कम करना, जल प्रबंधन में सुधार लाना और कृषि वानिकी को बढ़ावा देना जैसी प्रथाएं शामिल हैं। पूरी आपूर्ति शृंखला में, खेत से थाली तक, खाद्य हानि और अपशिष्ट को कम करने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसमें भंडारण और परिवहन बुनियादी ढांचे में सुधार के साथ-साथ खाद्य अपशिष्ट के बारे में उपभोक्ता जागरूकता बढ़ाना शामिल है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म कृषि व्यापार में तेजी से महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, किसानों को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय, दोनों खरीदारों से जोड़ रहे हैं।
हालांकि, अधिक व्यापक रूप से किसानों और सरकार को संयुक्त रूप से कृषि की योजना बनानी चाहिए और तदनुसार तैयारी करनी चाहिए। इसके लिए जरूरी है कि किसान दक्षता और उत्पादकता में सुधार के लिए डिजिटल उपकरणों और तकनीकों को अपनाएं। पर्यावरण की रक्षा करने और उपभोक्ता मांग को पूरा करने के लिए टिकाऊ कृषि पद्धतियों को लागू करें। लाभप्रदता बढ़ाने के लिए मूल्यवर्धित उत्पादों, प्रत्यक्ष विपणन और कृषि-पर्यटन का पता लगाएं और कृषि में नवीनतम रुझानों और अनुसंधान से अपडेट रहें। दूसरी तरफ, सरकारें अनुसंधान और विकास में निवेश करें, किसानों को नई तकनीकों और प्रथाओं को अपनाने हेतु प्रशिक्षण व तकनीकी सहायता प्रदान करें, कृषि व्यापार का समर्थन करने के लिए परिवहन, भंडारण तथा बुनियादी संचार ढांचे में निवेश करें और ऐसी नीतियां लागू करें, जो टिकाऊ कृषि को बढ़ावा दें, व्यापार बाधाओं को कम करें और किसानों की आजीविका का समर्थन करें। इन रुझानों को अपनाकर और एक साथ काम करके ही किसान और सरकारें एक अधिक उत्पादक, लाभदायक, टिकाऊ और न्यायसंगत कृषि क्षेत्र सुनिश्चित कर सकते हैं, जो बढ़ती वैश्विक आबादी की जरूरतों को पूरा करेगा।
(लेखक भारतीय कृषि सांख्यिकी अनुसंधान संस्थान के पूर्व महानिदेशक हैं।)