विगत 23 जुलाई को सर्वोच्च न्यायालय ने तीन दर्जन से अधिक याचिकाओं में उठाए गए मुद्दों को संबोधित करते हुए सरकार के स्वामित्व वाली नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कंपनी (एनबीसीसी) को नोएडा और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में आम्रपाली ग्रुप से 42,000 अधूरे घर लेने का निर्देश दिया। सर्वोच्च न्यायालय के इस निर्देश के बाद इससे संबंधित कई प्रासंगिक सवाल सामने आए।
क्या एनबीसीसी के पास इन परियोजनाओं को पूरा करने के लिए आवश्यक धन है? विचार करने योग्य सवाल है कि एनबीसीसी कितनी परियोजनाओं को और कैसे पूरा करेगी। 31 मार्च, 2019 तक एनबीसीसी के पास 1,384 करोड़ रुपये रिजर्व और बचत थे, जबकि मौजूदा देनदारी 6,637 करोड़ रुपये थी। आम्रपाली समूह की अधूरी इकाइयों को पूरा करने की लागत 7,700 करोड़ रुपये से अधिक है। सर्वोच्च न्यायालय के दरवाजे पर कतार में इंसाफ के लिए वे लोग भी खड़े हैं, जिन्होंने जेपी और यूनिटेक की करीब 85,000 रुकी हुई परियोजनाओं में निवेश किया है।