जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 को वापस लेने व अनुच्छेद 35ए को निरस्त करने और जम्मू और कश्मीर को दो भागों में बांट कर केंद्र शासित क्षेत्र बनाने के सरकार के प्रस्ताव पर संसद की मोहर लगने व राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने से पाकिस्तान की बौखलाहट बढ़ती जा रही है। उसने व्यापार तोड़ने के फैसले समेत कुछ ऐसे कदम उठाए हैं, जिनसे उसके कड़े तेवरों का पता चलता है।
लेकिन पाकिस्तान को जम्मू-कश्मीर पर न अपने घर के अंदर से समर्थन मिल रहा है, न ही बाहर से। अधिकांश देशों ने इसे भारत का अंदरूनी मामला बताकर पल्ला झाड़ लिया है। कश्मीर पर संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने भी पाक की हस्तक्षेप करने की गुहार ठुकरा दी है। पाकिस्तान के घनिष्ठ मित्र चीन ने भी पाक-भारत को तनाव बढ़ाने वाले कदमों से बचने की सलाह दी है।