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नए राजनीतिक ढांचे की जरूरत

Sat, 15 Mar 2014 09:24 PM IST
मेधा पाटकर
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भारत में वैकल्पिक राजनीति को दो तरह से समझा जा सकता है। एक आंदोलन की राजनीति, जिसमें एक्टिविज्म यानी आंदोलन जोर पर रहता है। दूसरा मुख्य धारा की उन पार्टियों से बिल्कुल अलग हटकर काम करना, जो पुरानी व्यवस्थाओं के तहत आज भी अपने हितों के लिए काम कर रही हैं। उनके लिए अपना स्वार्थ सर्वोपरि है। जनता उनके लिए सिर्फ सत्ता पाने की चाबी है।
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आंदोलन की राजनीति मेरी अपनी जमीन है और इससे मेरा जुड़ाव शुरू से था और आगे भी बना रहेगा। इस विकल्प के तहत हमने जनता की समस्याओं को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाया है। लेकिन अब देश के तेजी से बदलते माहौल में जहां सत्ता जनता को उनके अधिकारों से वंचित रखने को लेकर जिद पर अड़ जाती है, कहीं न कहीं इस बात की जरूरत आन पड़ी है कि अब वैकल्पिक राजनीति के दूसरे विकल्प को चुना जाए। यानी मुख्य धारा की राजनीति से जुड़कर लोगों की भलाई के लिए काम किया जाए। जहां तक मेरा प्रश्न और मेरी सोच है, तो मेरे हिसाब से अभी तक सभी पार्टियां भ्रष्टाचार में लिप्त थीं। ऐसी कोई पार्टी, ऐसा कोई नेता मुश्किल से ही दिखाई पड़ता है, जो भ्रष्टाचार के कीचड़ में न डूबा हो।

मुख्य धारा की राजनीति के इसी संकटकाल ने भारत में नई वैकल्पिक राजनीति की शुरुआत की है। सही और जनता की हितैषी पार्टियों की कमी होने की वजह से अभी तक मुख्य धारा की राजनीति में उतरना बेहद मुश्किल था, क्योंकि इस बात को समझना कठिन हो जाता था कि किससे दूरी रखी जाए और किसकी तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाया जाए। किसी भी सार्वजनिक जीवन वाले व्यक्ति के लिए किसी भी राजनीतिक पार्टी से जुड़ना एक बड़ी जिम्मेदारी है, क्योंकि उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करने वाले कार्यकर्ता और जनता को उनसे उम्मीदें होती हैं। वे आपकी विचारधारा से प्रभावित होते हैं।
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निश्चित रूप से आम आदमी पार्टी अभी नई पार्टी है, लेकिन इसकी सोच ने मुझे प्रभावित किया। इसीलिए मैंने इससे जुड़ना और चुनाव लड़ना पसंद किया। आज जिस तरह का राजनीतिक माहौल है, उसमें मुझे विश्वास है कि इस राजनीति से जुड़कर जनता के लिए बेहतर काम किया जा सकता है। आज कांग्रेस का भ्रष्टाचार चरम पर है। भाजपा की गुजरात सरकार में बांधों और नदियों की हालत खराब है। जमीनी तौर पर गुजरात समेत कई राज्यों का दौरा करने के बाद ये साफ नजर आता है कि मुख्यधारा की राजनीति से जुड़े नेताओं के विकास के दावे कहीं न कहीं खोखले हैं। हकीकत छुपाई जा रही है। उदाहरण के तौर पर, गुजरात में अगर इतना ही विकास है, तो वहां कई जगहों पर ग्रामीणों और सरकार के बीच गतिरोध क्यों है? आज देश को ईमानदार छवि वाले नेताओं की पार्टियों की सख्त जरूरत है, क्योंकि अगर देश में बदलाव की राजनीति कर सकते हैं, तो सिर्फ यही लोग कर सकते हैं। परंपरागत राजनीति के ढांचे का टूट जाना देश के लिए हितकर है।

आज वैकल्पिक राजनीति देश का नेतृत्व करने के लिए तैयार है। इसका उदाहरण दिल्ली में देखा जा सकता है। तमाम कयासों और अटकलों के बावजूद अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली में न सिर्फ चुनाव जीता, बल्कि सरकार भी बनाई। इतना जरूर हुआ कि वह सरकार स्थायी साबित नहीं हुई, लेकिन कहीं न कहीं उसने जनता को छुआ। आप देश के लिए मेरा या फिर अरविंद केजरीवाल का दिया हुआ विकल्प नहीं है। यह देश की जनता द्वारा तैयार किया गया विकल्प है। मेरा मन मुख्य धारा की राजनीति से जुड़ने का बिल्कुल नहीं था, लेकिन दिल्ली में आम आदमी पार्टी का काम देखने के बाद मैंने अपना विचार बदल दिया।

एक समाजिक कार्यकर्ता के तौर पर अभी हमने झुग्गीवासियों के लिए लड़ाई लड़ी है, नदियों और बांधों के रखरखाव पर काम किया है, लेकिन हमारा कर्तव्य है कि हम उन आम लोगों के लिए भी लड़ें, जो शहरी हैं और भ्रष्टाचार से त्रस्त हैं। मैं अन्ना हजारे के आंदोलन से भी जुड़ी रही हूं और वर्षों तक आंदोलन और अनशन करके कई लड़ाइयां भी जीती हैं, लेकिन अब विकल्प की यह राजनीति देश बदलेगी, ऐसा मेरा दृढ़ विश्वास है।

पिछड़े, किसानों, गरीबों के साथ-साथ मध्यवर्ग पर हमारा खास ध्यान है। मध्यवर्ग देश का सबसे बड़ा हिस्सा है। जब उसकी भलाई होगी, तभी देश आगे बढ़ेगा। मध्यवर्ग की कई समस्याएं हैं, जैसे रोजगार, शिक्षा, मकान, व्यापार- ये सब चीजें जब उन्हें मिलेंगी, तो उनकी तरक्की होगी। कई राजनीतिक दल मध्यवर्ग को लुभाने के नाम पर पूंजीवादी नीतियां अपना रहे हैं। उन्हें लगता है कि ऐसी नीतियां मध्यवर्ग के हित में हैं। ऐसा नहीं है कि मैं पूंजीवाद के खिलाफ हूं, लेकिन यह गरीब को साथ लेकर होना चाहिए, तभी तरक्की संभव है। हम सबको साथ लेकर चलेंगे। चाहे वे गरीब हों या फिर मध्यवर्ग। हमने हमेशा दोनों के हक के लिए आंदोलन किए हैं। आगे भी इनको साथ लेकर चलना हमारी प्राथमिकता होगी। हमारी राजनीति भ्रष्टाचार मुक्त भारत की राजनीति होगी। लोगों को रोटी, कपड़ा और छत मिले, इसकी व्यवस्था करेंगे। पानी और बिजली की समस्या दूर करेंगे। मुंबई में झुग्गी बस्ती वालों की कई समस्याएं हैं। उनको दूर करने का प्रयास करेंगे। हम कांग्रेस और भाजपा की तरह बात नहीं करेंगे, बल्कि काम करेंगे। हर दबे-कुचले आदमी को आगे लाना हमारा मकसद होगा। रोजगार और शिक्षा के लिए काम करके दिखाएंगे। हम जमीन से जुड़कर काम करेंगे। लोगों की समस्याएं दूर करना और उनके परिवार और बच्चों का भविष्य बनाना हमारी प्राथमिकता होगी।
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