प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दूसरे सबसे ताकतवर नेता गृह मंत्री अमित शाह ने कश्मीर पर वाजपेयी फॉर्मूले को याद किया है। कश्मीर के अलगाववादी नेता भी बड़ी शिद्दत से वाजपेयी का जिक्र करते हैं। इसलिए इतिहास में झांक कर देखते हैं कि तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का फॉर्मूला क्या था और उसके बाद क्या हुआ था। बात मई 2002 की है। वाजपेयी सीमावर्ती क्षेत्रों का दौरा करने के बाद जब दिल्ली लौट रहे थे, श्रीनगर हवाई अड्डे पर एक पत्रकार ने उनसे पूछा, 'आप ने कहा, सबसे बात करेंगे। तो क्या यह संविधान के दायरे में होगी ?' उन्होंने जवाब दिया, 'उसकी बात क्यों करते हैं, हम इंसानियत के दायरे में बात करेंगे।' बाद में इंसानियत के साथ जम्हूरियत और कश्मीरियत को भी जोड़ दिया गया।
जनवरी 2004 के पहले हफ्ते में वाजपेयी सार्क शिखर सम्मलेन में भाग लेने के लिए इस्लामाबाद गए। वाजपेयी और राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ में समग्र वार्ता पर सहमति हुई। प्रेस कॉन्फ्रेंस में वाजपेयी ने कहा कि हम कश्मीर पर भी बात करेंगे। मुशर्रफ ने कहा, कश्मीर में रायशुमारी की मांग छोड़ी जा सकती है। इसी महीने 22 तारीख को हुर्रियत नेताओं के प्रतिनिधिमंडल ने तत्कालीन गृहमंत्री लालकृष्ण आडवाणी से भेंट की। अगले दिन हुर्रियत नेताओं के अनुरोध पर वाजपेयी के साथ उनकी मुलाकात रखवाई गई।