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प्रकृति: मार्च-अप्रैल के बीच 12 राज्यों में वज्रपात से 162 लोगों की मौत, बिजली गिरने से मौतें क्यों बढ़ रहीं?

पंकज चतुर्वेदी
Updated Sat, 17 May 2025 06:17 AM IST

सार

इस बार मार्च-अप्रैल में बीते साल से 184 फीसदी ज्यादा मौतें बिजली गिरने से हुई हैं। ऐसे में ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन रोकने व बिजली से बचाव के उपाय अत्यावश्यक हो गए हैं।
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वज्रपात - फोटो : अमर उजाला डिजिटल


भारतीय मौसम विभाग चेतावनी दे चुका है कि आने वाले साल दर साल प्राकृतिक आपदाओं की घटनाएं बढ़ेंगी और इनमें बिजली गिरना प्रमुख होगी। अब तक देश भर में सिर्फ सात राज्यों ने बिजली पर नीतियां और कार्य योजना बनाई हैं। बिजली गिरने के लिहाज से सबसे संवेदनशील मध्य प्रदेश, ओडिशा, बिहार, बंगाल, छत्तीसगढ़, राजस्थान, तेलंगाना, तमिलनाडु सहित उत्तरी और उत्तर पूर्व के राज्यों ने राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के निर्देश के बावजूद अब तक कोई कार्य योजना नहीं बनाई है। बिजली के शिकार आम तौर पर दिन में ही होते हैं, यदि तेज बारिश हो रही हो और बिजली कड़क रही हो, तो ऐसे में पानी भरे खेत के बीच में, किसी पेड़ के नीचे, पहाड़ी स्थान पर जाने से बचना चाहिए। ऐसे समय में मोबाइल का इस्तेमाल भी खतरनाक होता है। पहले लोग अपनी इमारतों में ऊपर एक त्रिशूल जैसी आकृति लगाते थे, जिसे तड़ित-चालक कहा जाता था, उससे बिजली गिरने से काफी बचत होती थी, असल में उस त्रिशूल आकृति से धातु का एक मोटा तार या पट्टी जोड़ी जाती थी और उसे जमीन में गहरे गाड़ा जाता था, ताकि बिजली उसके माध्यम से नीचे उतर जाए और इमारत को नुक्सान न हो। 


बिजली गिरना वैश्विक आपदा है। अमेरिका में हर साल बिजली गिरने से तीस, ब्रिटेन में औसतन तीन लोगों की मृत्यु होती है, लेकिन भारत में यह आंकड़ा दो हजार से अधिक है। इसका मूल कारण है कि हमारे यहां बिजली के पूर्वानुमान और चेतावनी देने की व्यवस्था पूरी तरह विकसित नहीं हो पाई है। बिजली गिरने के दौरान नाइट्रोजन ऑक्साइड का उत्सर्जन होता है और यह घातक ग्रीनहाउस गैस है। जैसे-जैसे धरती गर्म हो रही है, उतनी ही बिजली गिरने की घटनाएं बढ़ रही हैं। इसकी पुष्टि 2018 में हुए एक वैज्ञानिक शोध में भी हुई। हाल ही में जिन इलाकों में बिजली गिरी, उनमें से बड़ा हिस्सा धान की खेती का है, जहां धान के लिए पानी एकत्र किया जता है, वहां से ग्रीनहाउस गैस मीथेन का उत्सर्जन अधिक होता है। मौसम जितना अधिक गर्म होगा, जितनी ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जित होंगी, उतनी ही अधिक बिजली, अधिक ताकत से धरती पर गिरेगी। धरती की गर्मी को नियंत्रित करने के साथ ही सरकार और सामुदायिक स्तर पर बिजली से बचाव के उपाय करना जरूरी है। दामिनी नामक एप बिजली गिरने का पूर्वानुमान जारी करता है, जिससे हम अपने खुद के बचाव के प्रयास कर सकते हैं।

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