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माफी की करंसी महानता का सट्टा

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अभियान चल रहा है कि संजय दत्त को माफ कर दो। एक गुनाह करके बीस साल तक ग्लैमर के मजे लूटने के बाद भी जब मामला टाडा-वाडा से हटकर थोड़ी सी सजा पर रह गया, तो उन्हें स्वाभाविक ही बड़ा कष्ट हो रहा है।
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चूंकि जनता महान है और वही 'खलनायक', 'चिकनी चमेली' या 'मुन्नी बदनाम' हिट करती है, इसलिए डेढ़ सौ करोड़ के धंधे वालों ने पेट पर लात न मारने के लिए जनता की अदालत में आवाज लगा दी है।

जनता को महानता की लत है इसलिए वह श्रेष्ठ गुनाहगारों को उत्तम भोजन, श्रेष्ठ मोबाइल, बेहतरीन मालिश आदि की कमी नहीं आने देती। उन्हें वह प्रेमपूर्वक जिताती है, हिट करती है और उनकी लीलाएं देख-देखकर निहाल होती है। सारी आशाएं इसी निहाल-तत्व पर लदी पड़ी हैं।
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जिनके हृदय रईसी की सिगरेट हो रहे हों, उन्हें छल्ले उड़ाने की लीला करने का हक है। विद्वानों का विचार है कि जनता इसे अच्छी तरह समझती है, इसलिए खुद भले ही एक वकील न कर पाने की मजबूरी में निचली कोर्ट के भरोसे बरसों जेल में सड़ते रहने को तैयार हो जाए, मगर इन लीलाधरों को अंतिम अदालत तक से माफी को अपना मोक्ष मान लेगी।

जैसा कि संजय दत्त से लेकर आर्मस्ट्रांग और ओ.जे. सिम्पसन तक जानते हैं, माफ करना महान लोगों का लक्षण है। इस हिसाब से देश को अगर सचमुच महान बनाना है, तो उतनी ही मात्रा में माफियों का इंतजाम भी करना पड़ेगा। चूंकि देश की मुख्य चिंता महान होना ही है, इसलिए यह काम हमें इफरात में करना होगा।

इस योजना के तहत माफी के कुछ नए मॉडल ईजाद करने पड़ेंगे। इनके आधार पर माफी की खदानें तैयार हो जाएंगी। अगर इन खदानों में भी कोई घोटाला निकल आए, तो उसकी माफी उससे भी अधिक महानता प्राप्त करने में जोड़ी जाएगी।

एक मॉडल यह हो सकता है, जिसमें हम सुरेश कलमाड़ी, ए राजा या कनिमोझी को केंद्र में रख लें। इन्हें माफ किया जाना चाहिए, क्योंकि कॉमनवेल्थ और टूजी-थ्रीजी से हम बोर हो गए। इसका लाभ जनता तक पहुंच भी गया।

ये तीनों एक प्रदर्शन मैच खेलें। उद्घाटन यूपीए प्रमुख के हाथों हो। उससे होने वाली आय को मोबाइल कंपनियों के कर्मचारियों तथा खेल विभाग के कर्मियों के परिवारों के कल्याण के लिए दे दिया जाए। इससे उनके पाप भी तत्काल प्रभाव से धुल जाएंगे और हमें तीन गुना महानता प्राप्त होगी।

एक अन्य माफी मॉडल दाऊद इब्राहिम मॉडल हो सकता है। इसके तहत हम दाऊद इब्राहिम को पूरी डी कंपनी सहित भारत आमंत्रित करें। उनके समधी जावेद मियांदाद भी साथ आएं। ये सब मिलकर पुलिस कल्याण ट्रस्ट के लिए 'कट्टे, क्रिकेट और कोकीन' विषय पर जागरूकता अभियान चलाएं।
 
अभियान में टिकट रखे जाएं। पुलिस चाहे तो इन टिकटों को बिकवाने की व्यवस्था के लिए किसी इवेंट कंपनी को साथ ले ले। इस अभियान से प्राप्त राशि दाऊद का महादान हो जाएगी। उन्हें माफ कर दिया जाएगा। भारत-पाक रिश्ते प्रेम में नहा जाएंगे और हमारा महानता का स्तर इंटरनेशनल हो जाएगा।

कुछ मॉडल इटली से आयात किए जा सकते हैं, खासतौर पर बर्लुस्कोनी मॉडल। जो भी लीडर भोग-विलास-व्यापार-कमीशन-दलाली आदि के शिखर पर हों उन्हें माफ करने के लिए यह मॉडल एकदम उपयुक्त होगा। बर्लुस्कोनी फिर-फिर चुनाव में उतरने का साहस करते हैं और विपक्षी भी होते हैं। इस विजय से हमारा आत्मा की महानता में विश्वास मजबूत होता है।

कुछ लोग क्लिंटन मॉडल की बड़ी वकालत करते पाए गए हैं। इसमें होता यह है कि व्यक्ति स्वयं नैतिक-आनंद संबंधी सबकुछ करने के बाद माफी मांग लेता है और उसकी पत्नी परिवार बचाने के लिए माफ कर देती है। फिर पत्नी को इस माफी के ऐवज में उस व्यक्ति की जगह मिल जाती है और जबर्दस्त महानता का सागर हिलोरें लेने लगता है। व्यक्ति भी प्रसन्न रहता है, परिवार संस्था भी बच जाती है। धंधा भी बच जाता है और धर्म भी।

कुछ विश्लेषक कहते हैं कि भारत में इस माफी-मॉडल की सफलता की संभावनाएं न्यूनतम हैं, क्योंकि इसकी माफी की मांग भी कोई नहीं करता। जनता मानकर चलती है कि इसमें माफ करने जैसा क्या है? इससे बेहतर तो उन आईएएस दंपती को माफ करना महान काम होगा, जिन्होंने साझे पारिवारिक सूत्र को प्रशासकीय रणनीति में बदला और करोड़ों इकट्ठे कर लिए।

अफजल गुरु और कसाब पर भी अब तक कुछ माफी विद्वान यह राय रखते हैं कि उनकी क्षमा का मॉडल अपनाया जाता तो भारत की महानता 'सोने की चिड़िया' वाले काल से भी ऊपर पहुंच चुकी होती।

पार्लियामेंट पर हमला, बाजार को उड़ाने की साजिश, हथियार तस्करी, दंगे में पांच-पचास लोगों को जला देना-ये सब महानता एकत्र करने के अद्भुत अवसर हैं। लोग बिलावजह बीएम डब्ल्यू फुटपाथ पर चढ़ाकर लोगों के मार डालने वालों के पीछे पड़े रहते हैं।

माफी मॉडल विकसित किया जाता तो न कार का नंबर एफआईआर से गायब करने की जरूरत होती न गवाह के मुकर जाने की व्यवस्था करनी पड़ती। बल्कि, आदमी अपने संतत्व से, सीना ठोंककर देश की महानता के अभियान में शामिल हो जाता।

वैसे जो महान होते हैं, वे जनता की प्रतीक्षा नहीं करते। वे जेल जाने को भी महानता के अवसरों में बदल लेते हैं। जेफ्री आर्चर जालसाजी में जेल गए तो वहां की किताब लिखकर लाखों में बेच ली। शोभराज ने प्रेमिका भी पाई और प्रेमिका में उपलब्ध वकील भी। संजय दत्त के एक प्रशंसक मानकर चल रहे थे कि इंडस्ट्री में पैसा और लोग, दुबई की पार्टी या दो नंबर का आनंद तो सहज भाव है।

यह तो परमावस्था को प्राप्त जगत है, जहां ऑटोग्राफ से जेलर के बच्चे प्रसन्न हो जाते हैं। उन्होंने विचार व्यक्त किया था कि संभवतः संजय दत्त को दो साल की सजा होगी। जिसमें से डेढ़ साल कटा हुआ मान लिया जाएगा और छः महीने के लिए उन्हें समाजसेवा का आदेश दिया जाएगा। तब वे रक्तदान शिवरों का रेला बहा देंगे, कई ब्रांड उन मेलों को प्रायोजित करेंगे और वे पवित्रतम 'बालक बनकर पुनर्जन्म लेंगे'।

संभावनाएं अभी भी मरी नहीं हैं। जेल गए तो भी जेल में उनके संतत्व की खबरें बनाई जाएंगी, एके छप्पन और आतंकियों से पुरानी यारी की नहीं। वे प्रेम करेंगे, फोटू देंगे, हम माफी देते-देते महान होते चले जाएंगे।

तीन साल बाद हो सकता है वे किसी ब्लॉक बस्टर में 'बबली बदमाश' टाइप क्रांति कर रहे हों और आप जानते हैं कि हमें तो महान होना ही है, सो उसे हिट करने को उधार बैठे हैं।
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