फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मिस्ड कॉल की महिमा

Sun, 26 Apr 2015 08:22 PM IST
सहीराम
विज्ञापन
विज्ञापन
देखिए, अभी तक फिल्म वाले और विज्ञापन वाले यही बताते रहे हैं कि एक साला मच्छर क्या नहीं कर सकता। पर इधर जब से एक मिस्ड कॉल ने दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी खड़ी कर दी है, तब से यही कहने का मन कर रहा है कि एक मिस्ड कॉल क्या नहीं कर सकता। जो लोग इंसान तक को मच्छर समझने की भूल करते हैं, उन्हें तो फिल्म वालों ने बता दिया कि एक मच्छर क्या नहीं कर सकता। और जो लोग मिस्ड कॉल के लिए अपने दोस्तों तथा रिश्तेदारों को गाली दिया करते थे कि देखो, दो पैसे बचाने के लिए मिस्ड कॉल दिए जा रहा है, उन्हें भाजपा ने बता दिया कि एक मिस्ड कॉल भी क्या कमाल कर सकता है।
विज्ञापन


वैसे मिस्ड कॉल को हमेशा बचत का तरीका माना जाता रहा है। आपके मोबाइल में पैसा नहीं है, लेकिन किसी से बात करना जरूरी है, तो मिस्ड कॉल कर दीजिए। वह कॉलबैक करेगा और बात हो जाएगी। हालांकि हर आदमी मिस्ड कॉल के झांसे में नहीं फंसता। जैसे बड़ा वाला मोबाइल रखने के बावजूद कुछ लोग मिस्ड कॉल करने की आदत से बाज नहीं आते, वैसे ही कुछ लोग मिस्ड कॉल पर कॉलबैक नहीं करते। हालांकि इसका उल्टा भी होता है। यानी कोई आपको बार-बार फोन कर रहा है, फिर भी आप नहीं उठाते। पर कोई मिस्ड कॉल आया नहीं कि पीछा करने लगते हैं।

एक जमाने में केजरीवाल जी इसे राजनीति में लाए थे, लेकिन अब कांग्रेस हो या भाजपा, सबने इसे अपना लिया है। राजनीति के हमाम में यह तो चलता ही रहता है। जो काम पहले पूरी पार्टी मिलकर करती थी, गांव-गांव, गली-गली और घर-घर जाकर करती थी, और फिर भी पार्टी बढ़ती नहीं थी, वह काम अब एक मिस्ड कॉल कर देता है, और ऐसा कर देता है कि पार्टी दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी बन जाती है। तो सबसे बड़ी पार्टी बनने का श्रेय न तो संगठन को दीजिए, न नेताओं की वाक्पटुता को और न ही विचारधारा को। इसका श्रेय मिस्ड कॉल को दीजिए। पर यह भी मत भूलिए कि दिल्ली में भाजपा की जितनी सदस्यता थी, वोट उससे कम ही आए थे और सत्ता की बस मिस हो गई थी।
विज्ञापन
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें