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नीले पंखों वाली

Sat, 08 Nov 2014 11:32 PM IST
मीरा पुरवार
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नीले पंखों वाली
नीले अंबर में उड़ने वाली
नीली चिड़िया
कितना अंतर
तेरी-मेरी मां में
तू भी मादा
मैं भी मादा
जीने का ढंग
अलग-अलग।

तेरे मादा होने का दुख
कभी नहीं तेरी मां को
देख तेरा सुंदर यौवन
कभी न तेरी मां घबराई।
भयमुक्त
सदा तेरी मां करती
मुझको भय से जकड़ दिया
मेरी मां ने।

मेरे यौवन की देहरी पर
चढ़ते ही
लगा दिये मेरी मां ने
अपनी आंखों के पहरे
मेरे सोने पर सोती है
जगने से पहले जगती है
अनचाहे कितने कष्ट उठाती।

कभी-कभी मन में रोती है
मेरी मां
हर बार डरा करती थी मुझसे
बिन कहे
बहुत कुछ
कहती थी मुझसे
हर माह तकती
मेरे अंदर वाले कपड़े
मैला देख उन्हें
खुश होती
बिन कहे
बहुत कुछ कहती।

दोष नहीं मेरी मां का
उसने भी
नर मादा का भेद जिया
कैसे मन के बंधन तोड़े
कैसे मुक्त करे मुझको
वह समझ नहीं पाती खुद को।

दूर गगन में उड़ने वाली
नीली चिड़िया
मुझको भी यह बता दे
है पता नहीं कुछ मुझको
क्या मैं भी
अपनी मां जैसी बन जाऊं
या फिर
तेरी मां जैसी बन
उड़ने दूं अपनी मादा को?
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